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एक्सप्लेनर: अमेरिका ने किया हमला तो समुद्र के नीचे बिछी तारें काट देगा ईरान, दुनिया के लिए होगा कितना खतरनाक?
Sun, 25 Oct 2026 08:30 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 25 Oct 2026 08:30 AM IST
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अमेरिका और इस्राइल के हमले की स्थिति में ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछीं 7 प्रमुख अंडरसी इंटरनेट केबल्स को काटने की धमकी दी है। जानिए क्या होगा इसका दुनिया और क्षेत्र पर असर।
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ईरान ने दी होर्मुज और फारस की खाड़ी में अंडरसी केबल काटने की धमकी।
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच आठ महीने पहले शुरू हुआ संघर्ष फिलहाल थमा हुआ है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की आहट के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर फिर हमले की कोशिश नहीं हुई है। हालांकि, ट्रंप बार-बार तेहरान और उसके नेतृत्व को खत्म करने की धमकियां दे रहे हैं। नतीजतन जहां एक तरफ कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली अहम संसाधनों की आपूर्ति भी थमी हुई है। अब इस बीच ईरान ने अमेरिका पर पलटवार किया है। ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका का एक और हमला होता है तो उसने एक ऐसी योजना बनाई है, जिससे पूरी दुनिया के इंटरनेट पर असर पड़ सकता है।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका की ओर से लगातार मिल रही हमले की धमकियों के बाद अब ईरान ने क्या जवाबी धमकी दी है? खाड़ी में अपने किस कदम से उसने पूरी दुनिया को प्रभावित करने की योजना बनाई है? अगर यह योजना सफल होती है तो इसका असर कितना और कैसा होगा? भारत इससे कितना प्रभावित हो सकता है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- अमेरिका के हमले की स्थिति में क्या करने की धमकी दे रहा ईरान?
ये भी पढ़ें: ईरान के निशाने पर अमेरिकी राजनयिक: खुफिया रिपोर्ट में जारी की गई चेतावनी, क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा टकराव?
- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान ने फारस की खाड़ी में अंडरसी केबल यानी समुद्र के नीचे बिछे संचार और इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाने की विस्तृत योजना तैयार की है।
- केबल्स को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ ईरान हमलों के बाद उनकी मरम्मत की कोशिशों को भी रोकने की कोशिश करेगा, ताकि वैश्विक और क्षेत्रीय इंटरनेट व संचार में लंबे समय तक दिक्कतें बनी रहें।
- ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका से जुड़े डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे डेटा सेंटर और एआई सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा सकता है।
- ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर उन पर हमला हुआ तो पलटवार की कोई सीमा नहीं रहेगी। समुद्र के नीचे के केबल्स से लेकर अमेरिका के गुप्त सैन्य ठिकानों तक को निशाना बनाया जाएगा।
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ईरान के आईआरजीसी के नेता का बयान।
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अब जानें- क्या होती हैं अंडरसी केबल्स, जिन्हें काटने की बात कर रहा ईरान?
- ईरान की तरफ से जिन अंडरसी केबल्स का जिक्र कर उन्हें निशाना बनाए जाने की बात हो रही है, वह समुद्र के नीचे बिछे ऑप्टिकल फाइबर केबल हैं। अगर इंटरनेट नेटवर्क, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और डिजिटल संचार को आपस में शरीर मान लिया जाए तो अंडरसी केबल इन्हें जोड़ने वाली रीढ़ है।
- एक देश के तटीय इलाके से समुद्र के अंदर जाने वाली यह केबल्स हजारों किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद दूसरे देश के तटीय क्षेत्रों में बने लैंडिंग स्टेशनों पर पहुंचते हैं, जहां से वे जमीनी नेटवर्क से जुड़कर संचार-इंटरनेट सेवाओं को आम लोगों और डेटा सेंटरों तक पहुंचाते हैं और लोगों को जोड़ते हैं।
समुद्र के नीचे बिछीं केबल्स कैसे ले जाती हैं इंटरनेट।
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ईरान ने होर्मुज में बिछीं अंडरसी केबल्स काटने की धमकी क्यों दी?
ईरान का पहला मकसद अमेरिका और इस्राइल को दोबारा सैन्य हमला करने से रोकना है। दरअसल, खाड़ी देशों, जैसे- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, आदि में अमेरिका की माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और गूगल जैसी प्रमुख टेक कंपनियों के साथ मिलकर एआई, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है। ईरान का मानना है कि ये खाड़ी देश और टेक कंपनियां अपने अरबों डॉलर के निवेश पर खतरे को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन पर हमला न करने का दबाव बना सकती हैं।फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्र तल पर कई प्रमुख केबल्स, जैसे- फैल्कन (FALCON), एएई-1 और गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल बिछे हुए हैं। अमेरिका के हमले की स्थिति में ईरान इन्हीं सबसी केबल्स को निशाना बनाकर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग और डिजिटल कनेक्टिविटी को लंबे समय के लिए प्रभावित करने की योजना बना रहा है।
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दुनिया के लिए कितनी जरूरी हैं अंडरसी केबल्स।
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अगर ईरान ने होर्मुज में बिछीं अंडरसी केबल्स काट दीं तो क्या असर होगा?
- टेलीकम्युनिकेशन रिसर्च फर्म टेलीजियोग्राफी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे से दुनिया के अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का 1% से भी कम डेटा गुजरता है। इस वजह से वैश्विक स्तर पर इंटरनेट पूरी तरह ठप नहीं होगा और इसका सीधा अंतरराष्ट्रीय प्रभाव सीमित ही रहेगा।
- हालांकि, एक साथ कई केबल्स काट दी जाती हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट की गति काफी धीमी हो जाएगी। इसका असर यह होगा कि पश्चिम एशिया में इंटरनेट की रफ्तार और फैलाव कम हो जाएगा। इससे बैंकिंग, वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी डिजिटल सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
- खाड़ी देशों और अमेरिकी टेक कंपनियों की ओर से क्षेत्र में स्थापित डेटा सेंटर और एआई सुविधाएं भी इस नेटवर्क रुकावट के कारण प्रभावित होंगी। यानी इन कंपनियों को इंटरनेट की दिक्कत की वजह से करोड़ों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
- ईरान की योजना केवल केबल काटने की ही नहीं, बल्कि हमले के बाद उनके मरम्मत के काम को रोकने की भी है। युद्ध क्षेत्र के जोखिम, विशेष मरम्मत जहाजों की कमी, बीमा की उच्च लागत और समुद्री परमिट मिलने में देरी की वजह से केबल्स को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।
- नेटवर्क ऑपरेटर प्रभावित डेटा ट्रैफिक को जमीनी संपर्कों या अन्य वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर डायवर्ट करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, सैटेलाइट (उपग्रह) नेटवर्क इसका पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, क्योंकि यह काफी महंगा है और इसकी क्षमता बहुत सीमित होती है।
होर्मुज में अंडरसी केबल काटी गईं तो क्या भारत पर असर हो सकता है?
अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछी अंडरसी केबल्स को काटता है, तो भारत के समग्र इंटरनेट पर सीधा और बड़ा संकट नहीं आएगा, लेकिन खाड़ी देशों के साथ भारत के संपर्क और कुछ विशिष्ट सेवाओं पर आंशिक असर जरूर पड़ सकता है।
- भारत 17 से 18 अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल्स से जुड़ा हुआ है, जिनका मुख्य केंद्र मुंबई और चेन्नई के लैंडिंग स्टेशनों पर है। नेटवर्क ऑपरेटरों के पास बैकअप क्षमता होती है, जिससे डेटा को अन्य समुद्री मार्गों या जमीनी संपर्कों पर री-रूट किया जा सकता है।
- होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली प्रमुख केबल्स में फैल्कन ऐसी केबल है, जो कि भारत और श्रीलंका को यूएई, सऊदी अरब, कतर जैसे खाड़ी देशों और मिस्र से जोड़ती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर भारत और खाड़ी देशों के बीच डिजिटल-संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक के लिए लाल सागर का मार्ग होर्मुज से कहीं ज्यादा अहम है। अगर लाल सागर गलियारे (यमन से होकर जाने वाले मार्ग) में केबल्स कटती हैं, तो भारत के लगभग 25% इंटरनेट पर गंभीर असर पड़ सकता है।