{"_id":"6ad99bd3ca6dcd13c00b85de","slug":"israel-elections-2026-explained-benjamin-netanyahu-know-how-voting-system-works-who-are-contenders-for-knesset-2026-10-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्लेनर: चार साल में तीन युद्ध के बाद इस्राइल में फिर आम चुनाव; कितने दल मैदान में, नेतन्याहू का क्या दांव?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
एक्सप्लेनर: चार साल में तीन युद्ध के बाद इस्राइल में फिर आम चुनाव; कितने दल मैदान में, नेतन्याहू का क्या दांव?
Fri, 23 Oct 2026 12:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 23 Oct 2026 12:12 PM IST
इस्राइल में इस बार होने वाले आम चुनावों की खास बात क्या है? इन्हें कैसे कराया जाता है? इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबले का गणित क्या है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
इस्राइल में हालिया चुनावों का लेखा-जोखा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस्राइल में आम चुनाव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 27 अक्तूबर को इस्राइल के नागरिक अपने नए प्रधानमंत्री और संसद में बैठने वाले 120 सांसदों को चुनने के लिए मतदान करेंगे। अगर अब तक के रिकॉर्ड्स को देखा जाए तो सामने आता है कि 1948 में इस्राइल के गठन के बाद से देश ने कुल 14 प्रधानमंत्री देखे हैं।
आइये सवाल-जवाब में जानते हैं कि इस्राइल में इस बार होने वाले चुनावों की खास बात क्या है और इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबले का गणित क्या है?
विज्ञापन
आइये सवाल-जवाब में जानते हैं कि इस्राइल में इस बार होने वाले चुनावों की खास बात क्या है और इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबले का गणित क्या है?
विज्ञापन
Trending Videos
सवाल-1: इस्राइल में चुनाव किसके लिए हो रहे हैं?
- इस्राइल में संसदीय चुनाव हैं। यानी लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नेसेट (इस्राइली संसद) में अपने पसंदीदा दलों को सीट दिलाने के लिए करेंगे।
- 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। जिस भी पार्टी का बहुमत होगा, वह सरकार बनाएगी और प्रधानमंत्री भी तय करेगी।
ये भी पढ़ें: इस्राइल के युवा मतदाताओं में क्यों बढ़ रहा दक्षिणपंथ का आकर्षण?: चुनाव से पहले बदली सोच, शांति से उठ रहा भरोसा
सवाल-2: इस्राइल में चुनाव क्यों हो रहे हैं?
इस्राइल में हर चार साल में चुनाव कराना भी अनिवार्य है। चूंकि इस्राइल की पिछली सरकार ने 1 नवंबर 2022 को शासन संभाला था, इसलिए आम चुनाव अक्तूबर 2026 में ही कराए जाने हैं।
एक दिलचस्प आंकड़ा यह है कि इस्राइल में बीते 38 साल में यह पहली बार है, जब संसद ने अपना कार्यकाल पूरा किया है। हालांकि, इन चार साल में इस्राइल ने तीन युद्ध और एक सैन्य अभियान भी चलाया। जहां इस्राइल ने 2022 के बाद से गाजा के फलस्तीन में हमास से जंग लड़ी तो वहीं लेबनान में हिज्बुल्ला को निशाना बनाया। इसके अलावा इस्राइल ने दो बार ईरान पर भी हमला बोला है। इतना ही नहीं, सीरिया में भी इस्राइल का लंबा सैन्य अभियान चला है।
विज्ञापन
सवाल-3: कैसे होती है इस्राइल में वोटिंग?
- गौर करने वाली बात यह है कि इस्राइल में मतदाता किसी उम्मीदवार के लिए नहीं, बल्कि चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दल के लिए वोट करते हैं।
- ऐसे में जब 120 सीटों के लिए वोटिंग होती है तो जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलता है, उसे संसद में उतनी ही सीटों की अधिकारी होती है।
- उदाहरण के लिए- अगर किसी पार्टी को 30 फीसदी वोट मिलते हैं तो उसे संसद की 30% सीटें मिल जाती हैं। 3.25% से कम वोट लाने वाले दल को सीट नहीं मिलती।
- यही वजह है कि इस्राइल के इतिहास में आज तक किसी दल ने पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनाई है, क्योंकि किसी दल को 50 फीसदी से अधिक वोट मिले ही नहीं।
इस्राइल के वोटिंग सिस्टम की इसी पेचीदगी की वजह से यहां गठबंधन की सरकारें प्रचलित हैं। वहीं छोटे दल, जिन्हें 3.25 फीसदी से कम वोट मिलने की संभावना होती है, वह चुनाव से पहले बड़े दलों के साथ विलय कर लेते हैं।
इस्राइल में वोटिंग प्रक्रिया।
- फोटो : अमर उजाला
सवाल-4: इस्राइल में कितने नागरिक, इनमें वोटर कितने?
- इस्राइल में इस बार 73 लाख 31 हजार 981 वोटर हैं, जो कि कुल जनसंख्या का 71.15 फीसदी है।
- 2022 के चुनाव में इस्राइल में कुल 67 लाख 88 हजार 804 वोटर थे, जो कि कुल आबादी का 70.31 फीसदी थे।
- इस्राइल में मतदान प्रतिशत काफी ज्यादा रहता है और यहां बीते चुनाव में 70.63 फीसदी मतदान हुआ था।
सवाल-5: किसे वोटिंग का अधिकार नहीं?
- अधिकतर देशों की तरह इस्राइल में भी सिर्फ वयस्क ही मतदान का अधिकार रखते हैं। यानी सिर्फ 18 साल से ऊपर के इस्राइली नगारिक ही वोट कर सकते हैं।
- इस्राइल का फलस्तीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है, जहां करीब 30 लाख लोग रहते हैं। लेकिन वे इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते।
- सिर्फ इस्राइली यहूदी और फलस्तीन के इलाकों (वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशलम) में रहने वाले इस्राइली नागरिक ही वोटिंग कर सकते हैं। इनकी संख्या करीब 12 लाख है।
- इसके अलावा विदेश में रह रहे इस्राइली नागरिक भी देश की चुनाव व्यवस्था का हिस्सा नहीं होते, क्योंकि यहां पोस्टल बैलट का विकल्प नहीं है।
- सिर्फ राजनयिकों और देश के बाहर अधिकारियों-सैन्य कर्मियों को ही छूट दी जाती है, जो कि तैनाती वाली जगह पर इस्राइली दूतावासों में मतदान कर सकते हैं।
सवाल-6: इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए किसके बीच मुकाबला?
सत्तासीन लिकुड पार्टी के मुखिया बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। उन्हें चुनौती दे रहे हैं याशर पार्टी के गादी आइजेनकॉट। लेकिन इस्राइल की चुनावी प्रणाली दो पार्टी की जगह बहुदलीय प्रणाली है, इसलिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन कर सरकार बनानी होती है। हालांकि, दो सबसे बड़ी पार्टियां अपने लिए छोटी पार्टियों या कम वोट पाने वाली पार्टियों को साथ लाने की मेहनत कर सकती हैं और बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती हैं।ऐसी गठबंधन की स्थिति में अक्सर उसी पार्टी का नेता गठबंधन का मुखिया और प्रधानमंत्री बनता है, जो कि सबसे बड़ी होती है। यही वजह है कि बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी लगातार सत्तासीन गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे हैं।
ये भी पढ़ें: इस्राइल में गरमाई राजनीति: नेतन्याहू की कुर्सी के लिए खतरा बना अरब किंगमेकर; यहूदी सांसद से क्यों मिलाया हाथ?
इस्राइल चुनाव में इस बार पीएम पद के लिए दो चेहरों के बीच मुकाबला।
- फोटो : अमर उजाला
सवाल-7: फिलहाल गठबंधन कैसे बनते दिख रहे हैं?
- बीते कई चुनावों की तरह इस बार भी एक जैसी विचारधारा वाले दल साथ आते दिख रहे हैं। इनमें इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष पर एकमत रखने वाले दल, समाज कल्याण की नीतियों पर एक राय वाले दल और धार्मिक मुद्दों पर एक जैसी सोच वाले दल शामिल हैं।
- बेंजामिन नेतन्याहू इस्राइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। इस बार के चुनाव में उनका पीएम पद का दावेदार रहना गठबंधनों के साथ आने और बिखरने की वजह बन रहा है। अधिकतर दक्षिणपंथी समूह नेतन्याहू के साथ हैं, जबकि वाम दल विपक्ष के समर्थन में हैं।
- अलग-अलग सर्वेक्षणों के मुताबिक, इस बार किसी भी गठबंधन को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसमें बहुत बड़ी भूमिका 3.25 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करने वाले सियासी दलों की रहेगी।
- इसके अलावा अरब दलों की भी नई सरकार के गठन में अहम भूमिका हो सकती है। इन्हें यहूदी दल आसानी से गठबंधन का हिस्सा नहीं बनाते। 2021-2022 के बीच नाफ्ताली बेनेट की सरकार में अरब दलों को यहूदी पार्टियों के साथ गठबंधन का हिस्सा बनाया गया था।
सवाल-8: चुनाव के नतीजे आने के बाद क्या होगा?
- इस्राइल में 4 नवंबर तक चुनाव के नतीजे घोषित होने हैं। अगर किसी दल को बहुमत मिल जाता है तो राष्ट्रपति सीधा उसे सरकार बनाने का न्योता देंगे और शपथ की तारीख तय कर दी जाएगी।
- हालांकि, अगर बहुमत नहीं आता है तो नतीजे के सात दिन के अंदर राष्ट्रपति उस दल को सरकार बनाने का न्योता देंगे, जो उनके हिसाब से जल्द पार्टियों को साथ लाकर सरकार बना सकता है।
- यानी जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग सबसे बड़े दल को न्योता दें या दूसरे सबसे बड़े दल को आमंत्रित करें, वे प्रभाव के हिसाब से किसी भी पार्टी को सरकार गठन का न्योता दे सकते हैं।
- जिस भी नेता और पार्टी को सरकार गठन का न्योता मिलता है, उसे 28 दिन के अंदर बहुमत हासिल करने लायक गठबंधन तैयार करना होता है। उन्हें इसके लिए अधिकतम 14 दिन और मिल सकते हैं।
इस्राइल में चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
सवाल-9: अगर कोई नेता/पार्टी बहुमत न जुटा पाए तो?
- अगर पहला नेता/दल बहुमत लायक गठबंधन नहीं बना पाता तो राष्ट्रपति अगले उस नेता को बुलाते हैं, जिसे अलग-अलग पार्टियों को जुटाने के लिए उपयुक्त माना जाता है। उसे भी पहले नेता की तरह ही 28 दिन और इसके बाद 14 दिन का अधिकतम समय मिल सकता है।
- हालांकि, अगर कोई भी नेता बहुमत जुटा नहीं पाता या राष्ट्रपति को उनके दलों को न जुटा पाने का अंदाजा हो जाता है तो वे संसद को इत्तला कर देते हैं कि कोई भी सरकार नहीं बना सकता। ऐसी स्थिति में कोई भी 61 सांसद राष्ट्रपति को अपनी पसंद का उम्मीदवार प्रस्तावित कर सकते हैं।
- चूंकि 61 सांसद बहुमत का आंकड़ा है, इसलिए राष्ट्रपति ऐसे नेता को 14 दिन का समय देते हैं ताकि वे सरकार बनाने लायक गठबंधन स्थापित कर सकते हैं। यहां भी असफलता की स्थिति में राष्ट्रपति संसद भंग कर देते हैं और 90 दिन की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है।