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अफ्रीका में भारत का दांव: घाना-कोट डी आइवर के बाद इथियोपिया पहुंचे जयशंकर, रणनीतिक साझेदारी पर कितना जोर?

Fri, 09 Oct 2026 07:53 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, अदीस अबाबा।
एएनआई, अदीस अबाबा। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 09 Oct 2026 07:53 AM IST
सार
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन देशों के अफ्रीकी दौरे के अंतिम चरण में इथियोपिया पहुंचे हैं। उनका लक्ष्य भारत और इथियोपिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है। इससे पहले घाना और कोट डी आइवर के दौरे में उन्होंने विकास, रक्षा, व्यापार और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया। भारत का आईटीईसी कार्यक्रम 160 से अधिक देशों को प्रशिक्षण के अवसर देता है और भारत-अफ्रीका संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
 

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एस जयशंकर इथियोपिया दौरा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन देशों के अफ्रीकी दौरे के आखिरी पड़ाव में गुरुवार को इथियोपिया पहुंचे। उनका मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है। इथियोपिया पहुंचने पर वहां के राज्य मंत्री बेरहानु त्सेगाये ने उनका स्वागत किया। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस स्वागत के लिए आभार जताया और कहा कि वह दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए सार्थक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं।
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जयशंकर किन देशों के दौरे पर गए थे और क्या है अहमियत?
जयशंकर का यह तीन देशों का अफ्रीकी दौरा है। इथियोपिया पहुंचने से पहले वह घाना और कोट डी आइवर गए थे। कोट डी आइवर में उन्होंने अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों और विकास साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ओर से विकास के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयास अफ्रीकी साझेदार देशों की जरूरतों और उनकी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं।
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भारत अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी कैसे बढ़ा रहा है?
जयशंकर ने कोट डी आइवर में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए भारत अपने विकास, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवों के साथ तकनीक, विशेषज्ञता और बेहतर कामकाजी तरीकों को साझेदार देशों के साथ साझा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम से भारत को दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने का मौका मिलता है और जिन संस्थानों में विदेशी प्रतिभागी प्रशिक्षण लेते हैं, उन्हें भी इसका फायदा होता है।
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आईटीईसी कार्यक्रम क्या है और इससे कितने देशों को फायदा मिलता है?
आईटीईसी कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1964 में हुई थी। इस साल इस कार्यक्रम ने अपने 62 साल पूरे किए। इसके तहत 160 से अधिक साझेदार देशों को हर साल विभिन्न क्षेत्रों में करीब 10 हजार पूरी तरह वित्तपोषित प्रशिक्षण के अवसर दिए जाते हैं। इसके दायरे में सूचना एवं संचार तकनीक, डिजिटल प्रशासन, लोक प्रशासन, कृषि, ऊर्जा, कौशल विकास, रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

कोट डी आइवर के साथ भारत ने किन मुद्दों पर चर्चा की?
जयशंकर ने कोट डी आइवर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री तेने बिराहिमा ओआत्तारा से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने वहां की विदेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मामलों की राज्य मंत्री नियाले काबा के साथ भी बातचीत की। इसमें व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल रहे। जयशंकर ने कोट डी आइवर को पश्चिम अफ्रीका में भारत का अहम साझेदार बताया और उसके आर्थिक विकास, प्रशासनिक बदलाव तथा सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी लक्ष्यों में भारत के समर्थन की बात दोहराई। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में कोट डी आइवर के करीब 800 प्रशिक्षणार्थियों ने आईटीईसी कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण लिया है।
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