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बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: मिर्जा फखरुल ने ओली अहमद को हराया, कब लेंगे शपथ?
Thu, 20 Aug 2026 05:48 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:48 PM IST
35 साल बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए सीधा मुकाबला हुआ और मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। कुल 349 मतदाताओं में से 343 ने वोट डाला। अब शुक्रवार शाम बंगभवन में शपथ लेने के बाद 78 वर्षीय आलमगीर बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बांग्लादेश को नया राष्ट्रपति मिल गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को हराया। यह चुनाव कई मायनों में खास रहा। बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए सीधा मुकाबला हुआ। 1991 के बाद पहली बार इस पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने थे। हाल के वर्षों में राष्ट्रपति का चुनाव ज्यादातर आम सहमति या निर्विरोध हुआ था।
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मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने नतीजों का एलान किया। उनके मुताबिक, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 वोट मिले। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। यानी आलमगीर ने 167 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
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349 में से 343 सांसदों ने किया मतदान
राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 349 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 343 सांसदों ने मतदान किया। छह सांसदों ने वोट नहीं डाला। वोटिंग गुरुवार को संसद भवन में हुई। मतदान के बाद वोटों की गिनती की गई। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने नतीजे घोषित किए और आलमगीर को बांग्लादेश का निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया।
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ओली अहमद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष हैं। वह जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार थे। वहीं, 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर सत्तारूढ़ बीएनपी के उम्मीदवार थे। चुनाव जीतने के साथ ही वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं।
35 साल बाद चुनाव क्यों?
यह राष्ट्रपति चुनाव अचानक खाली हुए पद की वजह से कराना पड़ा। बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। मोहम्मद शहाबुद्दीन को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी माना जाता था। उनका पांच साल का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद खाली हो गया और नए चुनाव की जरूरत पड़ी।
बांग्लादेश में पिछले 35 वर्षों में राष्ट्रपति पद का चुनाव आमतौर पर आम सहमति से होता रहा। कई बार उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। यही वजह है कि इस बार दो उम्मीदवारों के बीच हुआ सीधा मुकाबला खास माना जा रहा है।
बंगभवन में कब होगा शपथ समारोह?
चुनाव जीतने के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर शुक्रवार शाम बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह राजधानी ढाका स्थित बंगभवन के दरबार हॉल में होगा। शपथ के बाद वह औपचारिक रूप से देश के राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर कौन हैं?
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और बाद में अध्यापन तथा स्थानीय राजनीति से भी जुड़े रहे।
इसके बाद वह बीएनपी में सक्रिय हुए और पार्टी के महासचिव बने। उन्होंने पहले कृषि राज्य मंत्री और बाद में नागरिक उड्डयन व पर्यटन राज्य मंत्री के तौर पर भी काम किया। अब उनका लंबा राजनीतिक सफर देश के सर्वोच्च सांविधानिक पद तक पहुंच गया है।
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आलमगीर का राजनीतिक सफर क्या है?
आलमगीर ने राजनीति में कदम वामपंथी विचारों वाले छात्र नेता के तौर पर रखा था। उस समय बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। भारत की मदद से 1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान से आजाद हुआ था। 90 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल होने के बाद आलमगीर ने कृषि और विमानन राज्य मंत्री के तौर पर काम किया। 12 फरवरी के चुनाव के बाद 17 फरवरी 2026 को नई सरकार बनने पर मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को प्रांतीय सरकार में ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री बनाया गया।
संविधान में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर क्या नियम है?
प्रधानमंत्री और बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के करीबी सहयोगी आलमगीर को राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के अंदर नया राष्ट्रपति चुना जाना जरूरी है। राष्ट्रपति का पद खाली होने के बाद संविधान के नियम के अनुसार संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद फिलहाल कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम कर रहे हैं। संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति का चुनाव संसद करती है।
राष्ट्रपति की शक्तियां कितनी हैं?
बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति मुख्य रूप से नाममात्र के राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। हालांकि, उनके पास संविधान के तहत कुछ अहम अधिकार हैं। इनमें प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना शामिल है। राष्ट्रपति देश की सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं। हालांकि, इन शक्तियों का इस्तेमाल आम तौर पर प्रधानमंत्री की सलाह पर किया जाता है।