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अमेरिका में इस्कॉन मंदिर पहुंचे मोहन भागवत: कृष्ण चेतना को बताया दुनिया को जोड़ने का रास्ता, क्या संदेश दिया?

Fri, 28 Aug 2026 09:56 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 28 Aug 2026 09:56 PM IST
सार
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न्यूयॉर्क में इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कृष्ण चेतना को दुनिया को जोड़ने वाला आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष और मतभेद हैं, लेकिन चेतना ही लोगों को एक कर सकती है। भागवत ने इस्कॉन मंदिर में दर्शन किए और वंचित लोगों के बीच भोजन वितरण के कार्यक्रम में भी शामिल होने वाले हैं। आखिर कृष्ण चेतना को उन्होंने दुनिया की एकता से क्यों जोड़ा? आइए, विस्तार से जानते उन्होंने और क्या-कुछ कहा...

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Mohan Bhagwat Visits ISKCON Temple Calls Krishna Consciousness a Path to Unite World What Message He Give
इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ पर क्या बोले मोहन भागवत? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

न्यूयॉर्क में इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते संघर्षों और मतभेदों के बीच कृष्ण चेतना को एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत से संघर्ष और द्वंद्व हैं, लेकिन लोगों को जोड़ने वाली चीज चेतना है। उनके अनुसार यही चेतना कृष्ण चेतना है। भागवत ने कहा कि विविधता और मतभेदों के बावजूद मूल रूप से सभी एक हैं और इसी समझ के साथ दुनिया की अलग-अलग परिस्थितियों से आगे बढ़ना होगा।
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मोहन भागवत ने भगवद्गीता की शिक्षा को कैसे समझाया?

भागवत ने कहा कि दुनिया में भले ही अनेक प्रकार की विविधता, द्वंद्व और संघर्ष दिखाई देते हों, लेकिन वास्तव में सब कुछ कृष्ण है। उन्होंने कहा कि यही भगवद्गीता की शिक्षा है। उनके मुताबिक मजबूत समझ के साथ इन मतभेदों और परिस्थितियों को पार करना जरूरी है। उन्होंने कृष्ण चेतना को ऐसी सोच के रूप में सामने रखा, जो अलग-अलग लोगों के बीच एकता की भावना पैदा कर सकती है।
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न्यूयॉर्क में इस्कॉन मंदिर क्यों पहुंचे मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क स्थित इस्कॉन मंदिर का दौरा किया। यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब इस्कॉन अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस दौरान इस्कॉन से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास ने कहा कि मोहन भागवत का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ और इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ का भी उल्लेख किया।
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आगे वंचित लोगों के लिए क्या करेंगे भागवत?

इस्कॉन मंदिर की यात्रा के बाद मोहन भागवत पास के एक स्थान पर जाने वाले हैं। यहां वंचित लोगों के बीच भोजन वितरित किया जाना है। इस तरह उनकी न्यूयॉर्क यात्रा में धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम के साथ सेवा से जुड़ी गतिविधि भी शामिल है। इस्कॉन की ओर से उनके कार्यक्रम को लेकर जानकारी साझा की गई है।
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