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कंगाल पाकिस्तान में सरकारी खर्च पर चली कैंची: सरकारी ईंधन 50% कम; दौरे-दावत भी बंद, जनता के लिए क्या फरमान?
Fri, 18 Sep 2026 02:18 AM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 18 Sep 2026 02:18 AM IST
गंभीर आर्थिक तंगी और कच्चे तेल के बढ़ते दामों से घबराई पाकिस्तान सरकार ने देश में सख्त बचत नियमों का एलान कर दिया है। सरकार ने अपने मंत्रियों के ईंधन कोटे में 50% की कटौती करने और विदेश दौरों पर बैन लगाने के साथ-साथ बाजारों को रात नौ बजे ही बंद करने का आदेश जारी किया है। हालांकि, जनता के गुस्से को शांत करने के लिए बाइक और छोटी गाड़ियों के लिए सीमित पेट्रोल सब्सिडी देने की बात भी कही गई है।
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शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग क्या लगी, कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का बहाना बनाकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आनन-फानन में पूरे देश में 'कड़े परहेज' यानी एस्टेरिटी ड्राइव का फरमान सुना दिया है। अपनी घटती तिजोरी और उड़ते ईंधन बजट को बचाने के लिए सरकार ने जनता को ज्ञान दिया है कि जब संकट आए, तो सबसे पहला 'त्याग' सरकार और देश के रईसों को करना चाहिए, भले ही यह त्याग खुद उनकी अपनी बनाई नीतियों के चलते करना पड़ रहा हो।
मंत्रियों और अफसरों के किन-किन 'शौकों' पर चली कैंची?
सरकारी खजाने की बदहाली को छुपाने के लिए मंत्रियों और बाबुओं की फिजूलखर्ची पर कुछ यूं नकेल कसी गई है:-
सरकार की नाकामियों का बोझ हमेशा की तरह आम जनता और छोटे कारोबारियों की जेब और दिनचर्या पर डाल दिया गया है। रात होते ही गुलजार होने वाले बाजारों, दुकानों और शॉपिंग मॉल्स को रात नौ बजे ही शटर गिराना पड़ेगा। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी बुरी खबर है; रेस्टोरेंट और ढाबे रात 11 बजे बंद कर दिए जाएंगे, जबकि शादी-ब्याह के आयोजनों पर रात 10 बजे का पहरा लगा दिया गया है। शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने के नाम पर 'वन-डिश' नीति को दोबारा सख्ती से लागू किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर ₹1.12 करोड़ ठगे: आईआईटी ग्रेजुएट और बैंक मैनेजर समेत छह गिरफ्तार, क्या है मामला?
रात की पाबंदी में किसे राहत मिलेगी?
हर जगह शटर गिराने का आदेश नहीं है। फार्मेसी, मेडिकल स्टोर, अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल लैब, बेकरी और तंदूर, दूध-दही की दुकानें, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर निर्धारित बंदी समय से बाहर रहेंगे। सरकार ने प्रांतीय और क्षेत्रीय सरकारों से भी ऐसे ही ईंधन बचत और मितव्ययिता उपाय अपनाने पर विचार करने को कहा है।
'पेट्रोल सब्सिडी' का दांव सच में आम जनता का भला कर पाएगा?
बढ़ते जनाक्रोश और सड़कों पर हंगामे के डर से शहबाज सरकार ने 100 रुपये प्रति लीटर वाली पेट्रोल सब्सिडी का झुनझुना भी पकड़ाया है। मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों को महीने में महज 20 लीटर और 800सीसी वाली कारों के मालिकों को 30 लीटर सस्ता तेल देने का वादा किया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि रिकॉर्ड तोड़ महंगाई के दौर में यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है, जो गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति जैसा नजर आता है।
इस पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष कमेटी बना दी गई है, जो हर हफ्ते प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन अतीत के अनुभवों को देखें तो पाकिस्तान में ऐसे एस्टेरिटी प्लान सिर्फ हेडलाइन बनाने और विदेशी कर्जदाताओं को खुश करने के लिए लाए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार वाकई में हुक्मरान अपनी अय्याशियों पर लगाम लगाते हैं या हमेशा की तरह नियम सिर्फ आम नागरिकों की कमर तोड़ने तक ही सीमित रह जाते हैं।
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मंत्रियों और अफसरों के किन-किन 'शौकों' पर चली कैंची?
सरकारी खजाने की बदहाली को छुपाने के लिए मंत्रियों और बाबुओं की फिजूलखर्ची पर कुछ यूं नकेल कसी गई है:-
- सरकारी गाड़ियों के मुफ्त पेट्रोल कोटे में 50 फीसदी का भारी कट मार दिया गया है, ताकि साहब लोग बेवजह की सैर-सपाटे से बाज आ सकें।
- अगले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सीधी पांच फीसदी की कटौती ठोक दी गई है और नई चमचमाती सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया गया है।
- मंत्रियों के विदेश दौरों और सरकारी फिजूलखर्ची पर तीन महीने का बैन लगा है, और अगर बहुत मजबूरी हुई तो अब 'वीआईपी' साहबों को भी आम जनता की तरह इकोनॉमी क्लास में ही सफर करना पड़ेगा।
- दफ्तरों में चाय-समोसे वाली बैठकों की जगह वीडियो कॉल का सहारा लेने को कहा गया है, जबकि सरकारी दावतों और बड़े-बड़े सेमिनारों पर ताला लगा दिया गया है।
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सरकार की नाकामियों का बोझ हमेशा की तरह आम जनता और छोटे कारोबारियों की जेब और दिनचर्या पर डाल दिया गया है। रात होते ही गुलजार होने वाले बाजारों, दुकानों और शॉपिंग मॉल्स को रात नौ बजे ही शटर गिराना पड़ेगा। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी बुरी खबर है; रेस्टोरेंट और ढाबे रात 11 बजे बंद कर दिए जाएंगे, जबकि शादी-ब्याह के आयोजनों पर रात 10 बजे का पहरा लगा दिया गया है। शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने के नाम पर 'वन-डिश' नीति को दोबारा सख्ती से लागू किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर ₹1.12 करोड़ ठगे: आईआईटी ग्रेजुएट और बैंक मैनेजर समेत छह गिरफ्तार, क्या है मामला?
रात की पाबंदी में किसे राहत मिलेगी?
हर जगह शटर गिराने का आदेश नहीं है। फार्मेसी, मेडिकल स्टोर, अस्पताल, क्लीनिक, मेडिकल लैब, बेकरी और तंदूर, दूध-दही की दुकानें, पेट्रोल और सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, आईटी कंपनियां और कॉल सेंटर निर्धारित बंदी समय से बाहर रहेंगे। सरकार ने प्रांतीय और क्षेत्रीय सरकारों से भी ऐसे ही ईंधन बचत और मितव्ययिता उपाय अपनाने पर विचार करने को कहा है।
'पेट्रोल सब्सिडी' का दांव सच में आम जनता का भला कर पाएगा?
बढ़ते जनाक्रोश और सड़कों पर हंगामे के डर से शहबाज सरकार ने 100 रुपये प्रति लीटर वाली पेट्रोल सब्सिडी का झुनझुना भी पकड़ाया है। मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों को महीने में महज 20 लीटर और 800सीसी वाली कारों के मालिकों को 30 लीटर सस्ता तेल देने का वादा किया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि रिकॉर्ड तोड़ महंगाई के दौर में यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है, जो गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति जैसा नजर आता है।
इस पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष कमेटी बना दी गई है, जो हर हफ्ते प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन अतीत के अनुभवों को देखें तो पाकिस्तान में ऐसे एस्टेरिटी प्लान सिर्फ हेडलाइन बनाने और विदेशी कर्जदाताओं को खुश करने के लिए लाए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार वाकई में हुक्मरान अपनी अय्याशियों पर लगाम लगाते हैं या हमेशा की तरह नियम सिर्फ आम नागरिकों की कमर तोड़ने तक ही सीमित रह जाते हैं।