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खैबर पख्तूनख्वा में चली ताबड़तोड़ गोलियां: पुलिस अफसर को भुना, पाकिस्तान में बेकाबू हो चुका है आतंकवाद?
Fri, 21 Aug 2026 03:38 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, पेशावर।
पीटीआई, पेशावर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 03:38 PM IST
खैबर पख्तूनख्वा में एक बार फिर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी की सरेराह हत्या ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से एएसआई दोस्त मोहम्मद को निशाना बनाया गया, वह आतंकवादियों के बढ़ते हौसलों की ओर इशारा करता है। इस पूरी वारदात के पीछे किस खूंखार संगठन का हाथ है और क्या पुलिस अपने साथी के कातिलों को पकड़ पाएगी?
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पाकिस्तान में पुलिस अफसर की हत्या
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षाकर्मियों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर अज्ञात बंदूकधारियों ने पुलिस को निशाना बनाया है। ताजा घटना में खातान पुलिस चौकी के अतिरिक्त प्रभारी और सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) दोस्त मोहम्मद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात उस समय हुई जब वे अपनी ड्यूटी पूरी करके घर लौट रहे थे।
घात लगाकर किया हमला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह वारदात गुरुवार देर रात मर्दान जिले के मुख्य मालाकंद रोड इलाके में घटी। एएसआई दोस्त मोहम्मद तबलीगी मरकज झंडे में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मोटरसाइकिल से खातान पुलिस चौकी की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
अस्पताल पहुंचाने से पहले तोड़ा दम
घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 की मेडिकल टीम और एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुंची। हालांकि, तब तक एएसआई दोस्त मोहम्मद दम तोड़ चुके थे। राहत टीम ने उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए तख्त भाई अस्पताल पहुंचाया। हमले के तुरंत बाद पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया और आरोपियों की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
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पूरे राजकीय सम्मान के साथ दी गई विदाई
बलिदान हुए पुलिस अधिकारी दोस्त मोहम्मद की अंतिम यात्रा में पूरा पुलिस विभाग गमगीन नजर आया। शुक्रवार सुबह मर्दान जिले की पुलिस लाइंस में उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान जनाजे की नमाज में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जवानों, पीड़ित परिवार के सदस्यों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और श्रद्धांजलि दी।
यह भी पढ़ें: समंदर में फिर दहशत: यमन-सोमालिया के पास दो जहाज हाईजैक; लुटेरों के कब्जे में 22 भारतीय समेत 30 क्रू मेंबर
आतंकी हमलों में लगातार बलिदान हो रहे पुलिसकर्मी
पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा इस साल आतंकी हिंसा का मुख्य केंद्र रहा है। साल की शुरुआत में ही 11 फरवरी 2026 को आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इसके बाद 24 फरवरी को कोहाट में पांच पुलिसकर्मियों और भककर में दो पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया। हिंसा का सबसे भीषण रूप 10 मई 2026 को बन्नू जिले की फतेह खेल चौकी पर देखने को मिला, जहां एक आत्मघाती कार बम विस्फोट और गोलीबारी में 12 पुलिस अधिकारी मारे गए।
खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में 29-30 जुलाई को आतंकियों ने आधुनिक तकनीकों और क्वाडकॉप्टर ड्रोनों का इस्तेमाल कर एक बड़ा हमला किया, जिसमें 11 पुलिसकर्मियों की जान चली गई। इसके ठीक बाद, दो अगस्त 2026 को स्वात घाटी के काबल में एक शांति रैली के दौरान हुए आत्मघाती विस्फोट में 10 पुलिसकर्मियों सहित 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अगस्त को बाजौर में एक और पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई।
बलूचिस्तान में खूनी संघर्ष
मंगी डैम प्रोजेक्ट पर बड़ा हमलावहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान भी इस दौरान भयंकर आतंकी और विद्रोही हिंसा की आग में झुलसता रहा। बलूचिस्तान के जियारत जिले में सात जुलाई 2026 को मंगी डैम प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात पुलिस चौकी पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकियों ने एक बड़ा और सुनियोजित हमला बोला। इस भीषण मुठभेड़ में दो वरिष्ठ अधिकारियों समेत नौ पुलिसकर्मी बलिदान हो गए और कई अन्य लापता हो गए। पुलिस चौकियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ये हमले प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चुनौती दे रहे हैं।
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घात लगाकर किया हमला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह वारदात गुरुवार देर रात मर्दान जिले के मुख्य मालाकंद रोड इलाके में घटी। एएसआई दोस्त मोहम्मद तबलीगी मरकज झंडे में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद मोटरसाइकिल से खातान पुलिस चौकी की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
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अस्पताल पहुंचाने से पहले तोड़ा दम
घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 की मेडिकल टीम और एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुंची। हालांकि, तब तक एएसआई दोस्त मोहम्मद दम तोड़ चुके थे। राहत टीम ने उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए तख्त भाई अस्पताल पहुंचाया। हमले के तुरंत बाद पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया और आरोपियों की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
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पूरे राजकीय सम्मान के साथ दी गई विदाई
बलिदान हुए पुलिस अधिकारी दोस्त मोहम्मद की अंतिम यात्रा में पूरा पुलिस विभाग गमगीन नजर आया। शुक्रवार सुबह मर्दान जिले की पुलिस लाइंस में उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान जनाजे की नमाज में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जवानों, पीड़ित परिवार के सदस्यों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और श्रद्धांजलि दी।
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आतंकी हमलों में लगातार बलिदान हो रहे पुलिसकर्मी
पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा इस साल आतंकी हिंसा का मुख्य केंद्र रहा है। साल की शुरुआत में ही 11 फरवरी 2026 को आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इसके बाद 24 फरवरी को कोहाट में पांच पुलिसकर्मियों और भककर में दो पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया। हिंसा का सबसे भीषण रूप 10 मई 2026 को बन्नू जिले की फतेह खेल चौकी पर देखने को मिला, जहां एक आत्मघाती कार बम विस्फोट और गोलीबारी में 12 पुलिस अधिकारी मारे गए।
खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में 29-30 जुलाई को आतंकियों ने आधुनिक तकनीकों और क्वाडकॉप्टर ड्रोनों का इस्तेमाल कर एक बड़ा हमला किया, जिसमें 11 पुलिसकर्मियों की जान चली गई। इसके ठीक बाद, दो अगस्त 2026 को स्वात घाटी के काबल में एक शांति रैली के दौरान हुए आत्मघाती विस्फोट में 10 पुलिसकर्मियों सहित 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अगस्त को बाजौर में एक और पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई।
बलूचिस्तान में खूनी संघर्ष
मंगी डैम प्रोजेक्ट पर बड़ा हमलावहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान भी इस दौरान भयंकर आतंकी और विद्रोही हिंसा की आग में झुलसता रहा। बलूचिस्तान के जियारत जिले में सात जुलाई 2026 को मंगी डैम प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात पुलिस चौकी पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकियों ने एक बड़ा और सुनियोजित हमला बोला। इस भीषण मुठभेड़ में दो वरिष्ठ अधिकारियों समेत नौ पुलिसकर्मी बलिदान हो गए और कई अन्य लापता हो गए। पुलिस चौकियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ये हमले प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चुनौती दे रहे हैं।