{"_id":"6aad99fca1b642ba00027e37","slug":"pentagon-mandatory-testosterone-testing-male-troops-2026-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेंटागन का बड़ा फैसला: 30+ अमेरिकी पुरुष सैनिकों का टेस्टोस्टेरोन टेस्ट अनिवार्य, महिलाओं को बाहर क्यों रखा?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पेंटागन का बड़ा फैसला: 30+ अमेरिकी पुरुष सैनिकों का टेस्टोस्टेरोन टेस्ट अनिवार्य, महिलाओं को बाहर क्यों रखा?
Sat, 19 Sep 2026 01:37 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2026 01:37 AM IST
पेंटागन ने 30 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुष सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की जांच अनिवार्य कर दी है, जबकि महिलाओं के लिए अलग गाइडलाइन अभी समीक्षा में है। विशेषज्ञों के मुताबिक सभी पुरुषों की स्वतः जांच मेडिकल दिशा-निर्देशों के सामान्य तरीके से अलग है। नई गाइडलाइन टेस्टोस्टेरोन के कुछ सीमित लाभों को स्वीकार करती है, लेकिन ऊर्जा, शारीरिक क्षमता और मानसिक क्षमता बढ़ाने के दावों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मानती। तैनाती के दौरान इसके भंडारण और नियंत्रित दवा होने से भी कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं।
विज्ञापन
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का फैसला
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने 30 साल और उससे ज्यादा उम्र के पुरुष सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की जांच अनिवार्य करने की औपचारिक गाइडलाइन जारी कर दी है। यह गाइडलाइन गुरुवार देर रात जारी की गई। हालांकि, फिलहाल यह व्यवस्था केवल पुरुष सैनिकों पर लागू होगी। जुलाई में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के शुरुआती आदेश में सभी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच की बात कही गई थी, लेकिन नई क्लिनिकल गाइडलाइन में इसे खास तौर पर ‘पुरुष सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन की कमी’ से जोड़ा गया है।
महिलाओं को इस कार्यक्रम से बाहर क्यों रखा गया?
नई गाइडलाइन में कहा गया है कि महिलाओं के लिए अलग क्लिनिकल गाइडलाइन की समीक्षा चल रही है और मंजूरी मिलने के बाद उसे जारी किया जाएगा। पेंटागन ने अभी यह नहीं बताया है कि क्या महिला सैनिकों को पेरीमेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति से पहले के दौर में एस्ट्रोजन आधारित उपचार के लिए भी जांच या मूल्यांकन की सुविधा मिलेगी। इस तरह फिलहाल अनिवार्य टेस्ट का दायरा पुरुष सैनिकों तक ही सीमित है।
टेस्टोस्टेरोन को लेकर विवाद और विशेषज्ञों के सवाल क्या हैं?
टेस्टोस्टेरोन उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से कम होता है। इसका असर यौन क्षमता, मनोदशा और हड्डियों की मजबूती समेत कई चीजों पर पड़ सकता है। पिछले एक दशक में संघीय अध्ययनों से यह सामने आया है कि टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने से पुरुषों में स्तंभन दोष, कम यौन इच्छा और कुछ दूसरी समस्याओं में सुधार हो सकता है। लेकिन मेडिकल विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर बहस करते रहे हैं कि इसकी कमी की सही पहचान कैसे हो और हार्मोन की भरपाई कब की जानी चाहिए। मेडिकल संस्थाएं आम तौर पर बिना लक्षण वाले सभी पुरुषों की स्वतः जांच की सलाह नहीं देतीं। सामान्य दिशा-निर्देशों में कम यौन इच्छा या उदासी जैसे लक्षण होने और दो अलग-अलग रक्त जांच में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम आने पर उपचार पर विचार किया जाता है।
विज्ञापन
टेस्टोस्टेरोन से जुड़े वैज्ञानिक रूप से बताए गए लाभ
पेंटागन इस जांच को जरूरी क्यों बता रहा?
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई में कहा था कि सैनिकों को अपनी क्षमता के ‘पूर्णतम स्तर’ पर काम करने में सक्षम बनाने के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच जरूरी है। पेंटागन के शीर्ष प्रवक्ता सीन पार्नेल ने गुरुवार को कहा, “हार्मोन के अपर्याप्त स्तर की सक्रिय रूप से पहचान और इलाज करके पेंटागन अपने योद्धाओं के स्वास्थ्य में निवेश, उनके प्रदर्शन को मजबूत और सैन्य तैयारी को अधिकतम करना चाहता है।” हालांकि, नई गाइडलाइन में टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को लेकर इसके संभावित सीमित लाभ और जोखिमों को भी स्पष्ट किया गया है।
यह भी पढ़ें: सस्ती दवाओं पर राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दांव: जेनरस मॉडल से जुड़ेंगे अमेरिका के सभी 50 राज्य, क्या है योजना?
सैनिकों की तैनाती के दौरान टेस्टोस्टेरोन थेरेपी में क्या मुश्किलें हैं?
टेस्टोस्टेरोन के नियंत्रित पदार्थ होने के कारण विदेश या युद्ध क्षेत्र में तैनाती के दौरान इसके इस्तेमाल से कई व्यावहारिक चुनौतियां जुड़ी हैं। गाइडलाइन में कहा गया है कि तैनाती वाले क्षेत्र में दवा के इस्तेमाल से पहले आपूर्ति, निगरानी, भंडारण और लगातार उपलब्धता से जुड़े मुद्दों को हल करना होगा। इंजेक्शन वाले टेस्टोस्टेरोन को नियंत्रित कमरे के तापमान पर रखना और नियंत्रित पदार्थ के तौर पर उसका हिसाब रखना जरूरी है। साथ ही, जो सैनिक थेरेपी ले रहे हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त दवा हो, जबकि संघीय कानून टेस्टोस्टेरोन जैसे नियंत्रित पदार्थों के नुस्खे पर सीमाएं लगाता है।
विज्ञापन
महिलाओं को इस कार्यक्रम से बाहर क्यों रखा गया?
नई गाइडलाइन में कहा गया है कि महिलाओं के लिए अलग क्लिनिकल गाइडलाइन की समीक्षा चल रही है और मंजूरी मिलने के बाद उसे जारी किया जाएगा। पेंटागन ने अभी यह नहीं बताया है कि क्या महिला सैनिकों को पेरीमेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति से पहले के दौर में एस्ट्रोजन आधारित उपचार के लिए भी जांच या मूल्यांकन की सुविधा मिलेगी। इस तरह फिलहाल अनिवार्य टेस्ट का दायरा पुरुष सैनिकों तक ही सीमित है।
विज्ञापन
टेस्टोस्टेरोन को लेकर विवाद और विशेषज्ञों के सवाल क्या हैं?
टेस्टोस्टेरोन उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से कम होता है। इसका असर यौन क्षमता, मनोदशा और हड्डियों की मजबूती समेत कई चीजों पर पड़ सकता है। पिछले एक दशक में संघीय अध्ययनों से यह सामने आया है कि टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने से पुरुषों में स्तंभन दोष, कम यौन इच्छा और कुछ दूसरी समस्याओं में सुधार हो सकता है। लेकिन मेडिकल विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर बहस करते रहे हैं कि इसकी कमी की सही पहचान कैसे हो और हार्मोन की भरपाई कब की जानी चाहिए। मेडिकल संस्थाएं आम तौर पर बिना लक्षण वाले सभी पुरुषों की स्वतः जांच की सलाह नहीं देतीं। सामान्य दिशा-निर्देशों में कम यौन इच्छा या उदासी जैसे लक्षण होने और दो अलग-अलग रक्त जांच में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम आने पर उपचार पर विचार किया जाता है।
विज्ञापन
टेस्टोस्टेरोन से जुड़े वैज्ञानिक रूप से बताए गए लाभ
- यौन क्षमता से जुड़ी कुछ समस्याओं में सुधार देखा गया है और कम यौन इच्छा वाले पुरुषों को फायदा हो सकता है।
- टेस्टोस्टेरोन की कमी वाले कुछ पुरुषों में हड्डियों की मजबूती और शरीर से जुड़े कुछ अन्य मापदंडों में भी लाभ देखा गया है।
- गाइडलाइन साफ कहती है कि ऊर्जा, जीवन शक्ति, शारीरिक क्षमता या सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाने के लिए इसके इस्तेमाल के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
- टेस्टोस्टेरोन बाहर से देने पर शरीर अपनी प्राकृतिक शुक्राणु उत्पादन प्रक्रिया को कम या पूरी तरह रोक सकता है।
- इसी वजह से सैन्य डॉक्टरों को निकट भविष्य में बच्चे पैदा करने की योजना रखने वाले पुरुषों को टेस्टोस्टेरोन थेरेपी न देने का निर्देश दिया गया है।
- टेस्टोस्टेरोन एक नियंत्रित पदार्थ है, इसलिए इसकी आपूर्ति, भंडारण और इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना सैन्य व्यवस्था के लिए जरूरी है।
- तैनाती के दौरान इंजेक्शन वाले टेस्टोस्टेरोन को नियंत्रित कमरे के तापमान पर रखना और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
पेंटागन इस जांच को जरूरी क्यों बता रहा?
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई में कहा था कि सैनिकों को अपनी क्षमता के ‘पूर्णतम स्तर’ पर काम करने में सक्षम बनाने के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की जांच जरूरी है। पेंटागन के शीर्ष प्रवक्ता सीन पार्नेल ने गुरुवार को कहा, “हार्मोन के अपर्याप्त स्तर की सक्रिय रूप से पहचान और इलाज करके पेंटागन अपने योद्धाओं के स्वास्थ्य में निवेश, उनके प्रदर्शन को मजबूत और सैन्य तैयारी को अधिकतम करना चाहता है।” हालांकि, नई गाइडलाइन में टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को लेकर इसके संभावित सीमित लाभ और जोखिमों को भी स्पष्ट किया गया है।
यह भी पढ़ें: सस्ती दवाओं पर राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दांव: जेनरस मॉडल से जुड़ेंगे अमेरिका के सभी 50 राज्य, क्या है योजना?
सैनिकों की तैनाती के दौरान टेस्टोस्टेरोन थेरेपी में क्या मुश्किलें हैं?
टेस्टोस्टेरोन के नियंत्रित पदार्थ होने के कारण विदेश या युद्ध क्षेत्र में तैनाती के दौरान इसके इस्तेमाल से कई व्यावहारिक चुनौतियां जुड़ी हैं। गाइडलाइन में कहा गया है कि तैनाती वाले क्षेत्र में दवा के इस्तेमाल से पहले आपूर्ति, निगरानी, भंडारण और लगातार उपलब्धता से जुड़े मुद्दों को हल करना होगा। इंजेक्शन वाले टेस्टोस्टेरोन को नियंत्रित कमरे के तापमान पर रखना और नियंत्रित पदार्थ के तौर पर उसका हिसाब रखना जरूरी है। साथ ही, जो सैनिक थेरेपी ले रहे हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त दवा हो, जबकि संघीय कानून टेस्टोस्टेरोन जैसे नियंत्रित पदार्थों के नुस्खे पर सीमाएं लगाता है।