भारत में ईवी का बढ़ता बाजार: क्यों जरूरी है बेहतर रेंज, किफायती कीमत और भारतीय फीचर्स को प्राथमिकता?
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन सफर, जो कभी भविष्य का केवल एक सपना लगता था, आज सडकों पर सच होता दिखाई दे रहा है। यह बदलाव अब न केवल सडकों पर दिख रहा है, बल्कि सरकारी नीतियों और उद्योग जगत की चर्चाओं में भी प्रमुखता से शामिल है।
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का अपनाना केवल एक विचार न रहकर सड़कों और सरकारी नीतियों में दिखने वाली हकीकत बन चुका है। मई 2025 में भारतीय इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन निर्माताओं ने 12,384 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल की तुलना में 54 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। मई 2025 में कुल नई कार बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर 4.1 प्रतिशत हो गई, जबकि मई 2024 में यह 2.6 प्रतिशत थी। यह तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता का स्पष्ट संकेत है।
यह बढ़ोतरी बताती है कि भारतीय ग्राहक अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपना रहे हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने के लिए केवल तकनीकी प्रगति पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कीमत, वास्तविक रेंज, रोजमर्रा के उपयोग के अनुकूल फीचर्स और चार्जिंग नेटवर्क भी अहम भूमिका निभाते हैं।
रेंज एंग्जायटी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या सुधार हुआ है?
ईवी अपनाने में सबसे बड़ी बाधा 'रेंज एंग्जायटी' अब खत्म हो रही है। अब ध्यान लैब-टेस्टेड आंकड़ों के बजाय वास्तविक परिस्थितियों में मिलने वाली 'रियल-वर्ल्ड रेंज' पर है। आधुनिक ईवी को भारतीय सडकों, ट्रैफिक और मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हो रहा है:
- नेटवर्क विस्तार: मेट्रो शहरों से लेकर हाईवे तक नए चार्जिंग स्टेशन बन रहे हैं।
- स्मार्ट एप्स और तकनीक: एप्स से रियल-टाइम में चार्जर की उपलब्धता देखना आसान हो गया है।
- तकनीकी सुधार: कुशल मोटर, बैटरी कूलिंग और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीक हर चार्ज में ज्यादा माइलेज दे रही हैं।
ईवी की कीमत और 'वैल्यू फॉर मनी' का नया समीकरण क्या है?
शुरुआत में ईवी की बिक्री में केवल 'किफायती कीमत' ही मुख्य पैमाना थी। लेकिन अब खरीदारों का ध्यान 'वैल्यू फॉर मनी' पर स्थानांतरित हो चुका है।उच्च स्थानीयकरण और सरकारी सब्सिडी के चलते ईवी अब पेट्रोल-डीजल (ICE) वाहनों के बराबर कीमत की सीमा पर पहुंच चुके हैं। इतना ही नहीं, परफॉर्मेंस, तकनीक और सुरक्षा के मामले में ये पारंपरिक गाड़ियों से बेहतर साबित हो रहे हैं।
'बिल्ट फॉर भारत': भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल फीचर्स क्यों जरूरी हैं?
भारत की भौगोलिक विविधता और सडकों की स्थिति के कारण स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ईवी तैयार करना जरूरी है। भारतीय खरीदारों के लिए केवल कीमत या स्पीड काफी नहीं है, बल्कि व्यावहारिक फीचर्स ज्यादा मायने रखते हैं:- स्थानीय जरूरतें: पावरफुल एसी, स्मार्टफोन एप्स, भारतीय भाषाओं में वॉइस कमांड और खराब सडकों के लिए ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस।
- आधुनिक टेक्नोलॉजी: लेवल-2 ADAS, बैटरी पैक पर लाइफटाइम वारंटी, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट और इन-कार डिजिटल पेमेंट जैसी सुविधाएं।
भारत में ईवी का भविष्य कैसा आकार ले रहा है?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार सही दिशा में बढ़ रहा है। बेहतर होती कीमतें, दैनिक उपयोग के अनुकूल प्रैक्टिकल ड्राइविंग रेंज और भारतीय सडकों के हिसाब से बनाए गए फीचर्स ईवी को आम जनता के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बना रहे हैं। मजबूत होता चार्जिंग नेटवर्क और स्मार्ट होती तकनीक ईवी को पेट्रोल-डीजल कारों का एक बेहतर और फ्यूचर-रेडी विकल्प बना रही है।
(लेखक: श्री विवेक श्रीवत्स टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड में चीफ कमर्शियल ऑफिसर हैं।)