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जीडीपी आंकड़ों का भ्रम: दो अलग सीरीज की तुलना क्यों, 2.6% के दावे पर उठे सवाल कितने सही?

Fri, 04 Sep 2026 07:01 AM IST
Gaurav Vallabh गौरव वल्लभ
Updated Fri, 04 Sep 2026 07:01 AM IST
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सार
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जीडीपी के आंकड़ों को लेकर 2.6% और 7.8% की वृद्धि दर पर बहस छिड़ी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या दोनों आंकड़ों की तुलना एक ही सीरीज से की गई है। 86.05 लाख करोड़ से 80 लाख करोड़ रुपये तक आंकड़ा कैसे बदला, 2.6% का दावा कहां तक सही है? 
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GDP data confusion why are two different series being compared
जीडीपी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

भारत की 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने बहस छेड़ दी है। आधिकारिक अनुमान में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि 10.3% है, जबकि दूसरी गणना इसे सिर्फ 2.6% बताती है। दोनों सही नहीं हो सकते। यह आशावाद बनाम निराशावाद का विवाद नहीं, बल्कि सांख्यिकी का बुनियादी प्रश्न है: क्या वृद्धि निकालते समय दोनों वर्षों के आंकड़े एक ही सीरीज से लिए गए हैं? इस नियम को अपनाते ही 2.6% का दावा स्वत: ही समाप्त हो जाएगा।


 अगला प्रश्न है कि 86.05 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा 80.00 लाख करोड़ रुपये कैसे हुआ? 29 अगस्त 2025 को पुरानी सीरीज में 2025-26 की पहली तिमाही का आंकड़ा 86.05 लाख करोड़ रुपये था। फरवरी 2026 में नई सीरीज आने पर यह 80.32 लाख करोड़ रुपये, जून में 80.44 लाख करोड़ और आईआईपी तथा पीपीआई आंकड़ों के बाद अगस्त में 80.00 लाख करोड़ हुआ। इसलिए यह अचानक नहीं बदला; डाटा और पद्धति के अनुसार उसे संशोधित किया गया। फिर भी जो 2.6% पर जोर दे, उसे मानना होगा कि नए सर्वे और जीएसटी डाटा ने कोई जानकारी नहीं जोड़ी; सरकारी और कंपनी रिकॉर्ड, कवरेज, डबल काउंटिंग, संशोधित अनुपात तथा नई पद्धति का पुराने अनुमान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। ये मान्यताएं घोषित प्रक्रिया के विपरीत हैं। 86.05 लाख करोड़ पुरानी सीरीज का आंकड़ा है और 80.00 लाख करोड़ रुपये नई सीरीज का तुलनीय आंकड़ा। वृद्धि के लिए दोनों वर्षों पर एक ही पैमाना लगाना अनिवार्य है।


7.8% वास्तविक, 10.3% नॉमिनल वृद्धि ही सही
नॉमिनल यानी मौजूदा कीमतों पर पहली तिमाही की जीडीपी का आकार 88.27 लाख करोड़ रुपये है। नई 2022-23 सीरीज में पिछली समान तिमाही का तुलनीय आंकड़ा 80.00 लाख करोड़ है, इसलिए वृद्धि 10.3% हुई। स्थिर कीमतों पर जीडीपी 75.46 लाख करोड़  से बढ़कर 81.36 लाख करोड़ हुई, यानी वास्तविक वृद्धि 7.8% रही। 2.6% की गणना नई सीरीज के 88.27 लाख करोड़ की तुलना पुरानी सीरीज के 86.05 लाख करोड़ रुपये से करती है। यह दो अलग-अलग पैमानों को मिलाने का गणित है, न कि वैकल्पिक अनुमान।

नॉमिनल व वास्तविक जीडीपी का अंतर जरूरी
नॉमिनल जीडीपी उत्पादन को उसी अवधि की कीमतों पर मापा जाता है; आधार वर्ष की कीमतों पर नहीं। इसे ऐसे समझें...यदि कारखाना 100 वस्तुएं 50 रुपये में बेचता है तो सांकेतिक उत्पादन 5,000 रुपये रहेगा। पर नए रिकॉर्ड से रिटर्न या डबल काउंटिंग मिले, तो अनुमान बदलेगा। 

उत्पादन व कीमत दोनों के बदलाव को समझें
नॉमिनल जीडीपी उत्पादन और कीमत, दोनों का बदलाव दिखाती है; रियल जीडीपी उत्पादन का बदलाव अलग करती है। यह सीपीआई या डब्ल्यूपीआई नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के वैल्यू एडिशन से जुड़ी अनेक कीमतों और अलग-अलग वेट का संयुक्त माप है। इसलिए घरेलू उपभोग, थोक वस्तुओं और वैल्यू एडिशन की कीमतें अलग हो सकती हैं।

तुलनीय आंकड़ों पर करें बहस
हर जीडीपी आंकड़े की यात्रा होती है। बहस का अधिकार सभी को है, लेकिन शुरुआत तुलनीय आंकड़ों से होनी चाहिए। पहली तिमाही का पहला अग्रिम अनुमान अगस्त 2026 में आया, दूसरा नवंबर 2026 में आएगा और प्रोविजनल अनुमान फरवरी 2027 में। पहला संशोधित अनुमान फरवरी 2028 में तथा दूसरा व अंतिम संशोधित अनुमान फरवरी 2029 में आएगा। संशोधन सामान्य प्रक्रिया है, हेरफेर का प्रमाण नहीं। फिर भी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय को सरल ढंग से बताना चाहिए कि डाटा, कवरेज और पद्धति के बदलाव से 86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा 80.00 लाख करोड़ रुपये कैसे बना।
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