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उत्तराखंड को वैश्विक पहचान दिलाएं कंटेंट क्रिएटर्स : धामी

Sun, 11 Oct 2026 01:26 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:26 AM IST
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Content creators should give global recognition to Uttarakhand: Dhami
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026 कार्यक्रम में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स से संवाद किया। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
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धामी ने कहा कि डिजिटल मंच और युवाओं की रचनात्मकता से उत्तराखंड की पहचान नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है। उन्होंने इनफ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, अभिनेता और गायकों के अनुभव सुने। मुख्यमंत्री ने सरकार के विजन और ऐतिहासिक कानूनों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने को कहा। धामी ने वेडिंग पर्यटन, फिल्म शूटिंग और रिवर्स माइग्रेशन पर सरकार का विजन बताया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और अनछुए पर्यटन स्थलों को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने तथ्यों की पुष्टि और सकारात्मक कंटेंट बनाने का आग्रह किया। उन्होंने हरिद्वार कुंभ की तैयारियों पर भी जानकारी दी।
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स्थानीय उत्पादों को बाजार और पर्यटन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए प्रभावी बाजार बन सकता है। राज्य सरकार हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स जैसी पहल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कंटेंट क्रिएटर्स को अपने वीडियो और रील में स्थानीय शिल्प और पहाड़ी व्यंजनों को स्थान देना चाहिए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मिलम, पिंडारी ग्लेशियर, चकराता जैसे अनछुए पर्यटन स्थलों को पहचान मिल सकती है।
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बड़े निर्णयों का आधार और रिवर्स माइग्रेशन
धामी ने बताया कि उनके बड़े निर्णय राज्यहित और भावी पीढ़ियों के कल्याण पर आधारित होते हैं। उन्होंने नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता जैसे फैसलों का उल्लेख किया। समान नागरिक संहिता के प्रारूप में तीन लाख जनसुझाव शामिल किए गए थे। मुख्यमंत्री ने रिवर्स माइग्रेशन के प्रयासों का जिक्र करते हुए लगभग 44 फीसदी का आंकड़ा साझा किया। होमस्टे, स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाएं ग्रामीण रोजगार में सहायक हैं। उन्होंने युवाओं को मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। इस दौरान प्रदेशभर के कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे।
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