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Delhi NCR News: ई-कॉमर्स बदलेगा दिल्ली का गोदाम कारोबार, शहर में बढ़ेंगे छोटे भंडारण केंद्र
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एमपीडी-2047 में विकेंद्रीकृत गोदाम और वितरण केंद्रों को बढ़ावा देने का प्रावधान, बढ़ते ऑनलाइन कारोबार के साथ बदलेगी माल पहुंचाने की व्यवस्था
सनी सिंह
नई दिल्ली।
घर बैठे मोबाइल से सामान मंगाने की बढ़ती आदत अब दिल्ली के गोदाम कारोबार का नक्शा बदल रही है। ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ने के साथ सामान को ग्राहक के करीब रखने की जरूरत बढ़ रही है। जिससे आर्डर मिलते ही सामान को ग्राहक तक पहुंचाया जा सके। इसी को देखते हुए मास्टर प्लान दिल्ली (एमपीडी)-2047 में छोटे और विकेंद्रीकृत गोदाम, वितरण केंद्र और ई-कॉमर्स आधारित माल परिवहन नेटवर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी आने वाले समय में बड़े गोदामों के साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों के नजदीक छोटे भंडारण केंद्र भी कारोबार की नई कड़ी बनेंगे।
बड़े गोदाम से छोटे वितरण केंद्र तक
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में ई-कॉमर्स के विस्तार के कारण स्थानीय स्तर पर माल के वितरण के लिए माल परिवहन, रसद और भंडारण बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में नए गोदाम और छोटी भंडारण योजनाओं को लागू करने का प्रावधान किया गया है।
ऑनलाइन बाजार के लिए माल को सिर्फ शहर के बाहरी हिस्सों में बड़े गोदामों में रखने के बजाय ग्राहक के नजदीक पहुंचाने की व्यवस्था पर बढ़ावा दिया जाएगा।
दिल्ली पहले से बड़ा रसद बाजार
मास्टर प्लान के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में रोजाना करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहनों का प्रवेश और निकास होता है। दिल्ली में गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल परिवहन केंद्र और तीन परिवहन नगर भी हैं। वहीं फल-सब्जी कारोबार के लिए सात प्रमुख मंडियां हैं।
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दिल्ली-एनसीआर में भंडारण की मौजूदा मांग भी इस बदलाव की ओर इशारा करती है। 2026 की पहली तिमाही में दिल्ली बाजार में 44.7 लाख वर्गफुट की सकल भंडारण मांग दर्ज हुई और सालाना आधार पर मांग 41 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। तृतीय-पक्ष रसद कंपनियां सबसे बड़ी मांग पैदा करने वालों में रहीं, जबकि ई-कॉमर्स, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की भी हिस्सेदारी रही।
ग्राहक को मिलेगी तेज डिलीवरी, लेकिन सड़क पर बढ़ेगा दबाव
नए मॉडल का फायदा ग्राहक को तेज डिलीवरी के रूप में मिल सकता है। सामान ग्राहक के करीब रहेगा तो लंबी दूरी से हर ऑर्डर लाने की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ छोटे-छोटे गोदाम बढ़ने का मतलब माल चढ़ाने-उतारने और अंतिम चरण की डिलीवरी करने वाले वाहनों की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा
छोटे डी2सी ब्रांड, स्थानीय निर्माता और ऑनलाइन बिक्री करने वाले कारोबारी भी ग्राहक के नजदीक माल का भंडार रखने के लिए तृतीय-पक्ष रसद और माल-पूर्ति कंपनियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। देश में 2026 में तृतीय-पक्ष रसद कंपनियों के लिए भंडारण स्थान की मांग भी पूरी की जाएगी। ऐसे में दिल्ली का पारंपरिक गोदाम कारोबारी भी नए मॉडल का हिस्सा बन सकेगा, बशर्ते जमीन का उपयोग, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, सड़क की क्षमता और अन्य नियामकीय शर्तें पूरी हों।
तथ्य
दिल्ली में रोज करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहनों का प्रवेश-निकास।
गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल परिवहन केंद्र।
दिल्ली में तीन परिवहन नगर।
सात प्रमुख फल-सब्जी मंडियां।
चार प्रमुख मंडियों में करीब 21,123 टन प्रतिदिन फल-सब्जी का कारोबार।
एमपीडी-2047 में छोटे और विकेंद्रीकृत भंडारण तथा वितरण केंद्रों को बढ़ावा देने का प्रावधान।
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सनी सिंह
नई दिल्ली।
घर बैठे मोबाइल से सामान मंगाने की बढ़ती आदत अब दिल्ली के गोदाम कारोबार का नक्शा बदल रही है। ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ने के साथ सामान को ग्राहक के करीब रखने की जरूरत बढ़ रही है। जिससे आर्डर मिलते ही सामान को ग्राहक तक पहुंचाया जा सके। इसी को देखते हुए मास्टर प्लान दिल्ली (एमपीडी)-2047 में छोटे और विकेंद्रीकृत गोदाम, वितरण केंद्र और ई-कॉमर्स आधारित माल परिवहन नेटवर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी आने वाले समय में बड़े गोदामों के साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों के नजदीक छोटे भंडारण केंद्र भी कारोबार की नई कड़ी बनेंगे।
बड़े गोदाम से छोटे वितरण केंद्र तक
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में ई-कॉमर्स के विस्तार के कारण स्थानीय स्तर पर माल के वितरण के लिए माल परिवहन, रसद और भंडारण बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में नए गोदाम और छोटी भंडारण योजनाओं को लागू करने का प्रावधान किया गया है।
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ऑनलाइन बाजार के लिए माल को सिर्फ शहर के बाहरी हिस्सों में बड़े गोदामों में रखने के बजाय ग्राहक के नजदीक पहुंचाने की व्यवस्था पर बढ़ावा दिया जाएगा।
दिल्ली पहले से बड़ा रसद बाजार
मास्टर प्लान के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में रोजाना करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहनों का प्रवेश और निकास होता है। दिल्ली में गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल परिवहन केंद्र और तीन परिवहन नगर भी हैं। वहीं फल-सब्जी कारोबार के लिए सात प्रमुख मंडियां हैं।
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दिल्ली-एनसीआर में भंडारण की मौजूदा मांग भी इस बदलाव की ओर इशारा करती है। 2026 की पहली तिमाही में दिल्ली बाजार में 44.7 लाख वर्गफुट की सकल भंडारण मांग दर्ज हुई और सालाना आधार पर मांग 41 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। तृतीय-पक्ष रसद कंपनियां सबसे बड़ी मांग पैदा करने वालों में रहीं, जबकि ई-कॉमर्स, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की भी हिस्सेदारी रही।
ग्राहक को मिलेगी तेज डिलीवरी, लेकिन सड़क पर बढ़ेगा दबाव
नए मॉडल का फायदा ग्राहक को तेज डिलीवरी के रूप में मिल सकता है। सामान ग्राहक के करीब रहेगा तो लंबी दूरी से हर ऑर्डर लाने की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ छोटे-छोटे गोदाम बढ़ने का मतलब माल चढ़ाने-उतारने और अंतिम चरण की डिलीवरी करने वाले वाहनों की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा
छोटे डी2सी ब्रांड, स्थानीय निर्माता और ऑनलाइन बिक्री करने वाले कारोबारी भी ग्राहक के नजदीक माल का भंडार रखने के लिए तृतीय-पक्ष रसद और माल-पूर्ति कंपनियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। देश में 2026 में तृतीय-पक्ष रसद कंपनियों के लिए भंडारण स्थान की मांग भी पूरी की जाएगी। ऐसे में दिल्ली का पारंपरिक गोदाम कारोबारी भी नए मॉडल का हिस्सा बन सकेगा, बशर्ते जमीन का उपयोग, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, सड़क की क्षमता और अन्य नियामकीय शर्तें पूरी हों।
तथ्य
दिल्ली में रोज करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहनों का प्रवेश-निकास।
गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल परिवहन केंद्र।
दिल्ली में तीन परिवहन नगर।
सात प्रमुख फल-सब्जी मंडियां।
चार प्रमुख मंडियों में करीब 21,123 टन प्रतिदिन फल-सब्जी का कारोबार।
एमपीडी-2047 में छोटे और विकेंद्रीकृत भंडारण तथा वितरण केंद्रों को बढ़ावा देने का प्रावधान।