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Gurugram News: करोड़ों खर्च के बावजूद सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु
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नगर निगम ने जिस एजेंसी को टेंडर दिया है उसने हाथ खड़े किए, अब नई एजेंसी को काम देने के लिए टेंडर निकाला
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का आतंक जारी है। शहर के बीच में कई डेयरियां संचालित हो रही हैं, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है। विशेषकर पुराने शहर के इलाकों में सड़कों पर सबसे अधिक पशु घूमते नजर आते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। नगर निगम गुरुग्राम ने जिस एजेंसी को टेंडर दिया है उसने पशु पकड़ने से हाथ खड़े कर दिए हैं। अब नई एजेंसी को काम देने के लिए नगर निगम ने 90 लाख रुपये का टेंडर निकाला है जिसके आवंटित होने के बाद समस्या पर काबू मिलने की संभावना है।
इस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम सदन में कई बार मुद्दा उठ चुका है। फरीदाबाद में हुई एक घटना से भी निगम ने कोई सबक नहीं लिया है। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम ने कई बार टेंडर जारी किए हैं। हालांकि, इन टेंडरों के माध्यम से काम करने वाली एजेंसियों पर निगम जुर्माना भी लगा चुका है। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। पशुओं को पकड़ने गई नगर निगम की टीम पर आए दिन हमले होते रहते हैं। इन हमलों के कारण कर्मचारी भी भयभीत रहते हैं।
कई डेयरियां अवैध रूप से संचालित
शहर के मध्य में कई डेयरियां अवैध रूप से चल रही हैं। इन डेयरियों से निकलने वाले पशु अक्सर सड़कों पर घूमते रहते हैं। पुराने शहर के इलाके इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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निगम के प्रयास और चुनौतियों का सामना
नगर निगम ने लावारिस पशुओं की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष टेंडर जारी किए गए हैं। पूर्व में काम करने वाली एजेंसियों पर लापरवाही के लिए जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, निगम की टीमों को अक्सर विरोध और हमलों का सामना करना पड़ता है। इन हमलों के कारण पशु पकड़ने का अभियान बाधित होता है।
गोशालाओं की भूमिका और सदन में उठा मुद्दा
शहर में सात और पूरे जिले भर में तेरह गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं का उद्देश्य लावारिस पशुओं को आश्रय प्रदान करना है। इसके बावजूद सड़कों पर पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही है। इस मुद्दे को नगर निगम सदन में कई बार उठाया जा चुका है। सदस्यों ने इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। फरीदाबाद की घटना के बाद भी निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
नगर निगम क्षेत्र में घूमने वाले पशुओं को पकड़ने के लिए तय एजेंसी की लापरवाही मिली है। उस पर जुर्माना लगाया गया है। नई एजेंसी का आवंटन जल्द किया जाएगा जिससे समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
- नरेश कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम गुरुग्राम
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मयंक तिवारी
गुरुग्राम। नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का आतंक जारी है। शहर के बीच में कई डेयरियां संचालित हो रही हैं, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है। विशेषकर पुराने शहर के इलाकों में सड़कों पर सबसे अधिक पशु घूमते नजर आते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। नगर निगम गुरुग्राम ने जिस एजेंसी को टेंडर दिया है उसने पशु पकड़ने से हाथ खड़े कर दिए हैं। अब नई एजेंसी को काम देने के लिए नगर निगम ने 90 लाख रुपये का टेंडर निकाला है जिसके आवंटित होने के बाद समस्या पर काबू मिलने की संभावना है।
इस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम सदन में कई बार मुद्दा उठ चुका है। फरीदाबाद में हुई एक घटना से भी निगम ने कोई सबक नहीं लिया है। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम ने कई बार टेंडर जारी किए हैं। हालांकि, इन टेंडरों के माध्यम से काम करने वाली एजेंसियों पर निगम जुर्माना भी लगा चुका है। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। पशुओं को पकड़ने गई नगर निगम की टीम पर आए दिन हमले होते रहते हैं। इन हमलों के कारण कर्मचारी भी भयभीत रहते हैं।
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कई डेयरियां अवैध रूप से संचालित
शहर के मध्य में कई डेयरियां अवैध रूप से चल रही हैं। इन डेयरियों से निकलने वाले पशु अक्सर सड़कों पर घूमते रहते हैं। पुराने शहर के इलाके इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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निगम के प्रयास और चुनौतियों का सामना
नगर निगम ने लावारिस पशुओं की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष टेंडर जारी किए गए हैं। पूर्व में काम करने वाली एजेंसियों पर लापरवाही के लिए जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, निगम की टीमों को अक्सर विरोध और हमलों का सामना करना पड़ता है। इन हमलों के कारण पशु पकड़ने का अभियान बाधित होता है।
गोशालाओं की भूमिका और सदन में उठा मुद्दा
शहर में सात और पूरे जिले भर में तेरह गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं का उद्देश्य लावारिस पशुओं को आश्रय प्रदान करना है। इसके बावजूद सड़कों पर पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही है। इस मुद्दे को नगर निगम सदन में कई बार उठाया जा चुका है। सदस्यों ने इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। फरीदाबाद की घटना के बाद भी निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
नगर निगम क्षेत्र में घूमने वाले पशुओं को पकड़ने के लिए तय एजेंसी की लापरवाही मिली है। उस पर जुर्माना लगाया गया है। नई एजेंसी का आवंटन जल्द किया जाएगा जिससे समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
- नरेश कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम गुरुग्राम