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मेरठ की रिया-लावण्या का जज्बा: पापा के कंधों पर सितारे देखे, तो आसमान छूने की ठानी; मिशन शक्तिसैट का हिस्सा

Tue, 25 Aug 2026 11:09 AM IST
Vijay Singh Pundir अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Tue, 25 Aug 2026 11:09 AM IST
सार
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रिया और लावण्या ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में चल रहे ‘मिशन शक्ति सैट’ कार्यक्रम का हिस्सा हैं। मेरठ की रहने वाली दोनों छात्राओं का चयन देशभर की करीब 3000 छात्राओं के बीच हुए कठिन चयन प्रक्रिया के बाद हुआ है।

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Riya and Lavanya from Meerut are contributing to satellite manufacturing
मिशन शक्तिसैट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पापा को रोज ड्यूटी पर जाने से पहले कंधों पर सितारे लगाते देखा, तभी सोचा कि मुझे भी उन सितारों तक पहुंचना है। मेरठ की छात्रा रिया के ये शब्द उसके सपनों और हौसले की कहानी बयां करते हैं। भारतीय सेना में कार्यरत पिता से प्रेरणा लेकर रिया अब अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। वह ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में चल रहे ‘मिशन शक्ति सैट’ कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

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मेरठ की रहने वाली दोनों छात्राओं का चयन देशभर की करीब 3000 छात्राओं के बीच हुए कठिन चयन प्रक्रिया के बाद हुआ है। कुल 20 छात्राओं का चयन किया गया, जिनमें यूपी के मेरठ कैंट में रहने वाली इन दोनों छात्राओं को भी जगह मिली है। कार्यक्रम में 108 देशों की छात्राएं हिस्सा ले रही हैं।

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11वीं की छात्रा रिया ने बताया कि उनके स्कूल के माध्यम से उन्हें कार्यक्रम की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने 21 मॉड्यूल पूरे किए और इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरीं। इंटरव्यू इंडियन एंबेसडर जया तारे ने लिया। इसमें छात्राओं से उनके रुचि क्षेत्र, मॉड्यूल में किए गए कार्य, स्पेस में रुचि और भविष्य के लक्ष्य के साथ तकनीकी और भौतिकी से जुड़े सवाल पूछे गए। नेतृत्व क्षमता और तकनीकी कौशल को भी परखा गया। 

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वहीं, लावण्या ने बताया कि कुछ मॉड्यूल उनके लिए कठिन थे, क्योंकि उनमें उच्च स्तर के विषय शामिल थे। वीडियो, गतिविधियों और क्विज के जरिए तैयारी करने के बाद मुश्किल विषय भी आसान लगने लगे। रिया ने बताया कि लक्ष्य आगे चलकर स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में काम करना है, जबकि लावण्या भारतीय वायुसेना में जाने का सपना देख रही हैं। दोनों छात्राओं के पिता भारतीय सेना में हैं और माताएं गृहिणी हैं। मिशन के तहत छात्राएं सैटेलाइट निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों में भाग ले रही हैं। इसमें पेलोड डेवलपमेंट, वैज्ञानिक इंटीग्रेशन, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और कोडिंग जैसे कार्य शामिल हैं। लावण्या ने बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि डरने के बजाय जिज्ञासु बनें, सवाल पूछें और समाज की तय सीमाओं से आगे बढ़कर अपने सपने पूरे करें। रिया ने कहा कि असफलता के बाद रुकना नहीं, बल्कि दोबारा उठकर आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर लॉन्च होगी सेटेलाइट
स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक डॉ. श्रीमाथी केसान ने बताया कि मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य दुनिया की प्रतिभाशाली छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जोड़ना है। छात्राओं को उपग्रह निर्माण, पेलोड विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिस्टम इंजीनियरिंग और स्टेम शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। छात्राएं उपग्रह की डिजाइन से लेकर विकास, परीक्षण और अंतरिक्ष में तैनाती तक की प्रक्रिया को समझेंगी। मिशन के तहत शक्तिसैट-लियो और शक्तिसैट-मून सहित छात्र-निर्मित उपग्रह विकसित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सैटेलाइट लॉन्च होगी। उन्होंने कहा कि देश की हर लड़की अब आगे बढ़ने को तैयार है।

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