{"_id":"6a88476e4697471c1f0e64c5","slug":"responsibility-for-action-against-illegal-borewells-lies-with-djb-and-revenue-department-cgwa-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-151577-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध बोरवेल पर कार्रवाई की जिम्मेदारी डीजेबी और राजस्व विभाग की : सीजीडब्ल्यूए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध बोरवेल पर कार्रवाई की जिम्मेदारी डीजेबी और राजस्व विभाग की : सीजीडब्ल्यूए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-यह मामला अनिल कुमार की ओर से एनजीटी में दायर याचिका से जुड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में अवैध बोरवेल और भूजल के गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई को लेकर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने स्थिति साफ की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल जवाब में सीजीडब्ल्यूए ने बताया कि दिल्ली में अवैध बोरवेल पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) और राजस्व विभाग की है। सीजीडब्ल्यूए ने अपने जवाब में बताया कि 12 जुलाई 2010 को दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राजधानी में भूजल के इस्तेमाल और उसके नियमन की जिम्मेदारी सीजीडब्ल्यूए से हटाकर स्थानीय विभागों को दे दी गई थी।
यह मामला अनिल कुमार की ओर से एनजीटी में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में दिल्ली में अवैध तरीके से भूजल निकालने की शिकायत की गई थी। इस पर अधिकरण ने सीजीडब्ल्यूए से जवाब मांगा था। नियमों के अनुसार, दिल्ली में घरेलू, व्यावसायिक या औद्योगिक काम के लिए बोरवेल या ट्यूबवेल लगाने और भूजल निकालने से पहले डीजेबी या एनडीएमसी से अनुमति लेना जरूरी है। सीजीडब्ल्यूए के अनुसार, संबंधित जिले के राजस्व उपायुक्त को अधिकृत अधिकारी बनाया है। उनके पास अवैध बोरवेल के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। वे अवैध बोरवेल सील करने, बिजली कनेक्शन कटवाने, ड्रिलिंग मशीन जब्त करने और जरूरत पड़ने पर मामला दर्ज कराने की कार्रवाई कर सकते हैं। अवैध तरीके से भूजल निकालने वालों पर पर्यावरण मुआवजा लगाने और उसकी वसूली की जिम्मेदारी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की है। सीजीडब्ल्यूए ने एनजीटी को बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायत सीधे दिल्ली के स्थानीय विभागों से जुड़ी है। इसलिए प्राधिकरण ने अधिकरण से डीजेबी, संबंधित जिला प्रशासन और डीपीसीसी को अवैध रूप से भूजल निकालने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में अवैध बोरवेल और भूजल के गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई को लेकर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने स्थिति साफ की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल जवाब में सीजीडब्ल्यूए ने बताया कि दिल्ली में अवैध बोरवेल पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) और राजस्व विभाग की है। सीजीडब्ल्यूए ने अपने जवाब में बताया कि 12 जुलाई 2010 को दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राजधानी में भूजल के इस्तेमाल और उसके नियमन की जिम्मेदारी सीजीडब्ल्यूए से हटाकर स्थानीय विभागों को दे दी गई थी।
यह मामला अनिल कुमार की ओर से एनजीटी में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में दिल्ली में अवैध तरीके से भूजल निकालने की शिकायत की गई थी। इस पर अधिकरण ने सीजीडब्ल्यूए से जवाब मांगा था। नियमों के अनुसार, दिल्ली में घरेलू, व्यावसायिक या औद्योगिक काम के लिए बोरवेल या ट्यूबवेल लगाने और भूजल निकालने से पहले डीजेबी या एनडीएमसी से अनुमति लेना जरूरी है। सीजीडब्ल्यूए के अनुसार, संबंधित जिले के राजस्व उपायुक्त को अधिकृत अधिकारी बनाया है। उनके पास अवैध बोरवेल के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। वे अवैध बोरवेल सील करने, बिजली कनेक्शन कटवाने, ड्रिलिंग मशीन जब्त करने और जरूरत पड़ने पर मामला दर्ज कराने की कार्रवाई कर सकते हैं। अवैध तरीके से भूजल निकालने वालों पर पर्यावरण मुआवजा लगाने और उसकी वसूली की जिम्मेदारी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की है। सीजीडब्ल्यूए ने एनजीटी को बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायत सीधे दिल्ली के स्थानीय विभागों से जुड़ी है। इसलिए प्राधिकरण ने अधिकरण से डीजेबी, संबंधित जिला प्रशासन और डीपीसीसी को अवैध रूप से भूजल निकालने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन