आईआईटी बॉम्बे: भेदभाव रोकने के लिए नई गाइडलाइन जारी, छात्रों से जाति और जेईई रैंक समेत ये बातें नहीं पूछ सकते
आईआईटी बॉम्बे ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जाति, प्रवेश श्रेणी और परीक्षा रैंक से जुड़े सवाल पूछने से बचने को कहा है। नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। अपमानजनक संदेशों और भेदभावपूर्ण व्यवहार पर भी सख्त रुख अपनाया गया है। जानें नए गाइडलाइन में और क्या-क्या...
विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे ने परिसर में भेदभाव रोकने और छात्रों के बीच आपसी सम्मान बढ़ाने के लिए भेदभाव-विरोधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संस्थान ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे किसी विद्यार्थी से उसकी जन्म पृष्ठभूमि, प्रवेश श्रेणी या प्रवेश परीक्षा की रैंक से जुड़ी जानकारी न पूछें, क्योंकि इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पक्षपात पैदा हो सकता है।
ये दिशा-निर्देश मंगलवार को जारी किए गए। संस्थान के छात्र मामलों के डीन कार्यालय की ओर से भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि इनका उद्देश्य परिसर में समावेशी माहौल बनाना और जाति, धर्म तथा सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से परे छात्रों के बीच मेलजोल बढ़ाना है।
जेईई रैंक और गेट के अंक पूछने पर भी रोक
संस्थान के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी दूसरे छात्र से उसकी जन्म या प्रवेश श्रेणी के बारे में पूछना अनुचित है। इसी तरह, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी विद्यार्थियों से ऐसी जानकारी नहीं मांगनी चाहिए, जिससे उनकी जाति या उससे जुड़े पहलुओं का पता चल सकता हो। इसमें खास तौर पर इन जानकारियों का उल्लेख किया गया है:
- संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई एडवांस्ड) में प्राप्त रैंक
- इंजीनियरिंग में स्नातक अभिरुचि परीक्षा (गेट) के अंक
- प्रवेश श्रेणी से जुड़ी जानकारी
- जन्म और सामाजिक पृष्ठभूमि से संबंधित ऐसी जानकारी, जिससे पक्षपात की आशंका पैदा हो
संस्थान ने कहा है कि भले ही ऐसे सवाल केवल जिज्ञासावश पूछे जाएं, लेकिन उनका नकारात्मक असर हो सकता है और उन्हें भेदभावपूर्ण माना जा सकता है।
अपमानजनक संदेश और जातिवादी चुटकुलों पर क्या है नियम?
आईआईटी बॉम्बे ने ऐसे संदेशों के आदान-प्रदान और उन्हें आगे भेजने पर भी सख्त रुख अपनाया है, जिनमें किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रति अपमान, नफरत या भेदभाव हो। दिशा-निर्देशों के अनुसार, जातिवादी, लैंगिक भेदभाव वाले, धार्मिक कट्टरता दर्शाने वाले या यौन अभिरुचि के आधार पर किसी का अपमान करने वाले संदेश साझा करना प्रतिबंधित है। इसमें ऐसे चुटकुले भी शामिल हैं, जिन्हें उत्पीड़न या डराने-धमकाने के रूप में देखा जा सकता है।
संस्थान ने स्पष्ट किया है कि ये नियम सभी प्रकार के संवाद पर लागू होते हैं, चाहे वे व्हाट्सऐप, फेसबुक, ईमेल या आमने-सामने बातचीत के माध्यम से हों। ईमेल में चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
छात्रों को आपसी मेलजोल बढ़ाने के लिए क्या सलाह दी गई है?
आईआईटी बॉम्बे ने विद्यार्थियों से कहा है कि वे एक-दूसरे से जुड़ने के लिए साझा रुचियों को आधार बनाएं। इससे अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों के बीच बेहतर संबंध बनाने में मदद मिल सकती है। संस्थान ने मेलजोल बढ़ाने के लिए इन विषयों को उपयोगी बताया है:
- विभाग और पढ़ाई से जुड़ी रुचियां
- खेलकूद
- संगीत और फिल्में
- अपने शहर और गृह नगर से जुड़ी बातें
- शौक और अन्य साझा रुचियां
इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य छात्रों के बीच ऐसा माहौल बनाना है, जहां उनकी पहचान या सामाजिक पृष्ठभूमि के बजाय आपसी समझ और साझा रुचियों को महत्व मिले।
साहिल वाकोड़े की मौत के बाद बढ़ी चिंता
यह मामला 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोड़े की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद चर्चा में है। परीक्षा में नकल के आरोप के बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। उनके माता-पिता ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला पर प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में प्रोफेसर से पूछताछ भी की है। आरोपों की जांच जारी है।
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