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आईआईटी दिल्ली के 500 से अधिक नवाचार: डेढ़ रुपये की गोली बताएगी खाने में कितना है आयरन, सेना के लिए बना रोबोट
Sun, 01 Nov 2026 02:02 PM IST
शिवम तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sun, 01 Nov 2026 02:02 PM IST
आईआईटी दिल्ली के 19वें ओपन हाउस में 500 से अधिक नए आविष्कारों का प्रदर्शन किया गया। इनमें डेढ़ रुपये की आयरन जांच गोली, सेना के लिए सामान ढोने वाला रोबोट और भुट्टे के कचरे से बना पैकेजिंग फिलर शामिल हैं। ये तकनीकें स्वास्थ्य, रक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती हैं। जानें इनकी खासियत, कीमत और इस्तेमाल से जुड़ी पूरी जानकारी।
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IIT Delhi Open House
- फोटो : AI Generated
विस्तार
नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में शनिवार को 19वें ओपन हाउस का आयोजन किया गया। इसमें स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रक्षा और अंतरिक्ष सहित दस विषयों पर 500 से अधिक तकनीकों के प्रतिरूप प्रदर्शित किए गए। इस आयोजन में डेढ़ रुपये की आयरन जांच गोली और सेना के लिए सामान ढोने वाले रोबोट जैसे नवाचार शामिल थे।
ओपन हाउस का उद्घाटन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणाली महानिदेशक डी. विनोद कुमार दास ने किया। उन्होंने स्वदेशी तकनीक विकसित करने में शिक्षण संस्थानों, उद्योग और राष्ट्रीय शोध संगठनों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रदर्शित तकनीकों में अर्धचालक, रोबोटिकी, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचार भी शामिल थे।
स्कूली और कॉलेज छात्रों को भी स्टार्टअप और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिला। आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने एक त्वरित जांच किट तैयार की है। यह किट डेढ़ रुपये की गोली की मदद से खाद्य सामग्री और दवा में आयरन की गुणवत्ता जांच सकेगी। ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के शोध और उद्योग सहयोगी प्रेरणा भारद्वाज और अंकुर राणा ने बताया कि यह शरीर में आयरन की कमी से होने वाली समस्याओं को रोकने में सहायक होगी। यह जांच किट अगले छह महीने में बाजार में उतारी जाएगी।
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ओपन हाउस का उद्घाटन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणाली महानिदेशक डी. विनोद कुमार दास ने किया। उन्होंने स्वदेशी तकनीक विकसित करने में शिक्षण संस्थानों, उद्योग और राष्ट्रीय शोध संगठनों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रदर्शित तकनीकों में अर्धचालक, रोबोटिकी, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचार भी शामिल थे।
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स्कूली और कॉलेज छात्रों को भी स्टार्टअप और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिला। आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने एक त्वरित जांच किट तैयार की है। यह किट डेढ़ रुपये की गोली की मदद से खाद्य सामग्री और दवा में आयरन की गुणवत्ता जांच सकेगी। ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के शोध और उद्योग सहयोगी प्रेरणा भारद्वाज और अंकुर राणा ने बताया कि यह शरीर में आयरन की कमी से होने वाली समस्याओं को रोकने में सहायक होगी। यह जांच किट अगले छह महीने में बाजार में उतारी जाएगी।
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हेक्सापॉड से दुर्गम पहाड़ी में होगी सामान की ढुलाई
कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों ने एक हेक्सापॉड रोबोट विकसित किया है। यह रोबोट पहाड़ी रास्तों पर सेना के लिए सात किलोग्राम तक सामान ले जा सकता है। छात्र ज्ञान प्रकाश और शिवांश ने बताया कि इसमें स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है। इसकी मदद से दुर्गम रास्तों पर सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। इसके अलावा, गांवों के लिए स्वचालित मोबाइल रोबोट (एएमआर) भी डिजाइन किए गए हैं।भुट्टे के कचरे से हो सकेगी गिफ्ट की पैकिंग
आईआईटी दिल्ली के एक इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ने भुट्टे और अन्य कृषि अपशिष्ट से अनबायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग फिलर बनाया है। यह फिलर पानी में दो मिनट में घुलनशील और मिट्टी में अपघटित हो सकता है। यह ऑनलाइन वाणिज्य बाजार में थर्माकोल, कागज और प्लास्टिक जैसे पर्यावरण-हानिकारक विकल्पों की जगह लेगा। इसकी कीमत लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम है।पहाड़ों पर कैसे काम करेगा रोबोट?
आईआईटी दिल्ली के कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों ने हेक्सापॉड नाम का छह पैरों वाला रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सेना के लिए सात किलोग्राम तक सामान ले जा सकता है। छात्र ज्ञान प्रकाश और शिवांश के अनुसार, इसे स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल उन जगहों पर किया जा सकता है, जहां सामान्य वाहनों से सामान पहुंचाना मुश्किल होता है। इसके अलावा, गांवों में काम आने वाले स्वचालित मोबाइल रोबोट भी तैयार किए गए हैं। इनसे सामान पहुंचाने और रोजमर्रा के कुछ कामों में मदद मिल सकती है।
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