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सीट का समीकरण: बीते 10 में पांच चुनाव BJP के नाम, 12 साल से सपा का दबदबा, ऐसा है ठाकुरद्वारा का चुनावी इतिहास
Sat, 22 Aug 2026 07:57 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 22 Aug 2026 07:57 AM IST
मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। इस सीट पर हुए पिछले 10 में से पांच चुनाव में भाजपा कोज जीत मिली है। वहीं दो बार बसपा यहां से जीती। पिछले तीन बार से यहां सपा का कब्जा है।आइए जानते हैं ठाकुरद्वारा सीट का पूरा चुनावी इतिहास...
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ठाकुरद्वारा सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। हमारी खास पेशकश 'सीट का समीकरण' की आज की इसी कड़ी में मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट की बात करेंगे। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं ठाकुरद्वारा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मुरादाबाद है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- ठाकुरद्वारा, कांठ, बिलारी, मुरादाबाद शहर, मुरादाबाद ग्रामीण और कुंदरकी शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' में आज हम मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट की बात करेंगे। मुरादाबाद जनपद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। ठाकुरद्वारा विधानसभा के पहले विधायक शिव स्वरूप सिंह थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ठाकुर-चौहान और जाटव (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद ठाकुर-चौहान मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और जाटव मतदाताओं की करीब 10% है, जबकि सैनी मतदाता लगभग 9% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम और ठाकुर-चौहान मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।
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पहले जानते हैं ठाकुरद्वारा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मुरादाबाद है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- ठाकुरद्वारा, कांठ, बिलारी, मुरादाबाद शहर, मुरादाबाद ग्रामीण और कुंदरकी शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' में आज हम मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट की बात करेंगे। मुरादाबाद जनपद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। ठाकुरद्वारा विधानसभा के पहले विधायक शिव स्वरूप सिंह थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
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ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ठाकुर-चौहान और जाटव (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद ठाकुर-चौहान मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और जाटव मतदाताओं की करीब 10% है, जबकि सैनी मतदाता लगभग 9% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम और ठाकुर-चौहान मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।
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1952: कांग्रेस के दबदबे की शुरुआत
ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो शुरुआती समय में ठाकुरद्वारा सीट पर कांग्रेस की पकड़ रही। ठाकुरद्वारा से 1952 में कांग्रेस के शिव स्वरूप सिंह विधायक बने थे। इसके बाद 1957 में कांग्रेस से किशन सिंह और 1962 में कांग्रेस से ही रामपाल सिंह विधायक चुने गए। यहां शुरुआत के लगातार तीन चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा, हालांकि इस दौरान विधायकों के चेहरे बदलते रहे।
कांग्रेस के इस विजयरथ पर 1967 में तब लगाम लगी, जब 1967 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी से ए. खान ठाकुरद्वारा के विधायक चुने गए। उस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के आर. सिंह को हराया, जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।
ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो शुरुआती समय में ठाकुरद्वारा सीट पर कांग्रेस की पकड़ रही। ठाकुरद्वारा से 1952 में कांग्रेस के शिव स्वरूप सिंह विधायक बने थे। इसके बाद 1957 में कांग्रेस से किशन सिंह और 1962 में कांग्रेस से ही रामपाल सिंह विधायक चुने गए। यहां शुरुआत के लगातार तीन चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा, हालांकि इस दौरान विधायकों के चेहरे बदलते रहे।
कांग्रेस के इस विजयरथ पर 1967 में तब लगाम लगी, जब 1967 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी से ए. खान ठाकुरद्वारा के विधायक चुने गए। उस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के आर. सिंह को हराया, जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।
1969: स्वतंत्र पार्टी की लगातार दूसरी जीत
इस चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से स्वतंत्र पार्टी (SWA) के अहमद उल्लाह खान लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के शिव स्वरूप सिंह को 2,086 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अहमद उल्लाह खान को 26,594 वोट, जबकि शिव स्वरूप सिंह को 24,508 वोट मिले।
1974: कांग्रेस ने की वापसी
1974 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के रामपाल सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के अहमदुल्ला खान को 22,637 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के रामपाल सिंह को 38,648 वोट, जबकि बीकेडी के अहमदुल्ला खान को 16,011 वोट मिले। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह 8,958 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) के मुकीमुर रहमान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) के अहमद हुसैन को 10,210 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मुकीमुर रहमान को 23,230 वोट, जबकि अहमद हुसैन को 13,020 वोट मिले।
इस चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से स्वतंत्र पार्टी (SWA) के अहमद उल्लाह खान लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के शिव स्वरूप सिंह को 2,086 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अहमद उल्लाह खान को 26,594 वोट, जबकि शिव स्वरूप सिंह को 24,508 वोट मिले।
1974: कांग्रेस ने की वापसी
1974 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के रामपाल सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के अहमदुल्ला खान को 22,637 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के रामपाल सिंह को 38,648 वोट, जबकि बीकेडी के अहमदुल्ला खान को 16,011 वोट मिले। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह 8,958 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) के मुकीमुर रहमान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) के अहमद हुसैन को 10,210 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मुकीमुर रहमान को 23,230 वोट, जबकि अहमद हुसैन को 13,020 वोट मिले।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: कांग्रेस के रापपाल को मिली जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) कांग्रेस (आई) के रामपाल सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के मुकीमुर्रहमान को 760 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामपाल सिंह को 26,498 वोट, जबकि मुकीमुर्रहमान को 25,738 वोट मिले। चुनाव में सीपीएम के राम पाल सिंह 12,844 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: कांग्रेस के रापपाल को मिली जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) कांग्रेस (आई) के रामपाल सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के मुकीमुर्रहमान को 760 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामपाल सिंह को 26,498 वोट, जबकि मुकीमुर्रहमान को 25,738 वोट मिले। चुनाव में सीपीएम के राम पाल सिंह 12,844 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1985: जगजीवन राम की कांग्रेस को मिली जीत
1980 के बाद राज्य में 1985 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर इंडियन कांग्रेस (जे) (ICJ) के सखावत हुसैन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के उदय पाल सिंह को 8,182 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में सखावत हुसैन को 33,113 वोट मिले, जबकि उदय पाल सिंह को 24,931 वोट मिले।
1989: ठाकुरद्वारा में पहली बार जीती बसपा
1989 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मोहम्मदुल्ला खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के रामपाल सिंह को 9,502 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मदुल्ला खान को 34,170 वोट, जबकि रामपाल सिंह को 24,668 वोट मिले। चुनाव में जनता दल (जेडी) के जे. पी. सिंह 21,678 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1991: भाजपा के दबदबे की शुरुआत
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण उत्तर प्रदेश में 1991, 1993 और 1996 में विधानसभा चुनाव हुए। हालांकि, इन चुनावों में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट लगातार भाजपा के खाते में रही। 1991, 1993, 1996 और 2002 में भाजपा के सर्वेश कुमार उर्फ राकेश लगातार चार बार विधायक चुने गए। 2002 के चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद उल्लाह खान को 3,255 वोटों से हराया।
1980 के बाद राज्य में 1985 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर इंडियन कांग्रेस (जे) (ICJ) के सखावत हुसैन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के उदय पाल सिंह को 8,182 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में सखावत हुसैन को 33,113 वोट मिले, जबकि उदय पाल सिंह को 24,931 वोट मिले।
1989: ठाकुरद्वारा में पहली बार जीती बसपा
1989 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मोहम्मदुल्ला खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के रामपाल सिंह को 9,502 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मदुल्ला खान को 34,170 वोट, जबकि रामपाल सिंह को 24,668 वोट मिले। चुनाव में जनता दल (जेडी) के जे. पी. सिंह 21,678 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1991: भाजपा के दबदबे की शुरुआत
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण उत्तर प्रदेश में 1991, 1993 और 1996 में विधानसभा चुनाव हुए। हालांकि, इन चुनावों में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट लगातार भाजपा के खाते में रही। 1991, 1993, 1996 और 2002 में भाजपा के सर्वेश कुमार उर्फ राकेश लगातार चार बार विधायक चुने गए। 2002 के चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद उल्लाह खान को 3,255 वोटों से हराया।
2007: 18 साल बाद फिर जीती बसपा
2007 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विजय कुमार उर्फ विजय यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर सर्वेश कुमार को 9,110 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विजय कुमार उर्फ विजय यादव को 62,394 वोट, जबकि कुंवर सर्वेश कुमार को 53,284 वोट मिले। चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद उल्लाह खान 39,067 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2012: सर्वेश और भाजपा ने दर्ज की पांचवीं जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर सर्वेश कुमार विजयी हुए। उन्होंने मुस्लिम डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडी) के विजय कुमार को 37,974 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार को 84,530 वोट, जबकि विजय कुमार को 46,556 वोट मिले।
2014 के उपचुनाव में क्या हुआ?
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट से कुंवर सर्वेश कुमार सिंह (भाजपा) विधायक चुने गए थे। इसके बाद मई 2014 के लोकसभा चुनाव में वे मुरादाबाद सीट से सांसद चुने गए। सांसद बनने के बाद उन्होंने ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण सितंबर 2014 में यहां उपचुनाव कराने पड़े। 2014 के इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाब जान ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से छीन ली थी।
2017: सपा ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत
2017 के चुनावों में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाब जान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजपाल सिंह चौहान को 13,409 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में नवाब जान को 1,07,865 वोट, जबकि राजपाल सिंह चौहान को 94,456 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विजय यादव 37,753 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विजय कुमार उर्फ विजय यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर सर्वेश कुमार को 9,110 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विजय कुमार उर्फ विजय यादव को 62,394 वोट, जबकि कुंवर सर्वेश कुमार को 53,284 वोट मिले। चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद उल्लाह खान 39,067 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2012: सर्वेश और भाजपा ने दर्ज की पांचवीं जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुंवर सर्वेश कुमार विजयी हुए। उन्होंने मुस्लिम डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडी) के विजय कुमार को 37,974 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार को 84,530 वोट, जबकि विजय कुमार को 46,556 वोट मिले।
2014 के उपचुनाव में क्या हुआ?
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट से कुंवर सर्वेश कुमार सिंह (भाजपा) विधायक चुने गए थे। इसके बाद मई 2014 के लोकसभा चुनाव में वे मुरादाबाद सीट से सांसद चुने गए। सांसद बनने के बाद उन्होंने ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण सितंबर 2014 में यहां उपचुनाव कराने पड़े। 2014 के इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाब जान ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से छीन ली थी।
2017: सपा ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत
2017 के चुनावों में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नवाब जान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजपाल सिंह चौहान को 13,409 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में नवाब जान को 1,07,865 वोट, जबकि राजपाल सिंह चौहान को 94,456 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विजय यादव 37,753 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
पिछले चुनाव में सपा को मिली लगातार तीसरी बार जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सपा के नवाब जान ने भाजपा के अजय प्रताप सिंह को हराया। इस चुनाव में सपा के नवाब को 1,34,391 वोट मिले, जबकि भाजपा के अजय प्रताप सिंह को 1,14,707 वोट मिले। इस चुनाव में सपा के नवाब ने 19,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। ये इस सीट नवाब और सपा की लगातार तीसरी जीत थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सपा के नवाब जान ने भाजपा के अजय प्रताप सिंह को हराया। इस चुनाव में सपा के नवाब को 1,34,391 वोट मिले, जबकि भाजपा के अजय प्रताप सिंह को 1,14,707 वोट मिले। इस चुनाव में सपा के नवाब ने 19,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। ये इस सीट नवाब और सपा की लगातार तीसरी जीत थी।