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Bilaspur News: झबोला विद्युत अनुभाग में आधे पद खाली, पांच पंचायतों के दो हजार उपभोक्ता परेशान
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आठ स्वीकृत पदों में से चार रिक्त, 27 ट्रांसफार्मरों की देखरेख का जिम्मा चार कर्मचारियों पर
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। विद्युत उपमंडल तलाई के तहत झबोला विद्युत अनुभाग इन दिनों कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। अनुभाग में स्वीकृत आठ पदों में से चार लंबे समय से रिक्त हैं। इसका सीधा असर पांच पंचायतों के करीब दो हजार विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण बिजली संबंधी तकनीकी खराबियों को दूर करने में कई बार घंटों का समय लग जाता है। इससे ग्रामीणों में विद्युत विभाग और प्रदेश सरकार के प्रति रोष है।
झबोला विद्युत अनुभाग के तहत दसलेहड़ा, घराण, भड़ोली कलां, घंडीर और झबोला पंचायतें आती हैं। इन क्षेत्रों में करीब दो हजार उपभोक्ताओं के अलावा 27 ट्रांसफार्मरों की देखरेख का जिम्मा भी इसी अनुभाग के कर्मचारियों पर है। आठ पद स्वीकृत होने के बावजूद महज चार कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक कर्मचारी पर औसतन छह से सात ट्रांसफार्मरों की जिम्मेदारी है। शाम या रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। खंभे में खराबी आने या ट्रांसफार्मर का एक फेस उड़ने पर पर्याप्त स्टाफ के अभाव में मरम्मत में समय लग जाता है। कई बार उपभोक्ताओं को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार कई ट्रांसफार्मर मुख्य सड़क से काफी दूर स्थापित हैं। तकनीकी खराबी आने पर उन्हें सड़क तक पहुंचाना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाता है। जमराडियां गांव में हाल ही में ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी। इससे स्टाफ की कमी से पैदा हो रही मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और विद्युत विभाग से झबोला अनुभाग में रिक्त पड़े चारों पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा के लिए हजारों उपभोक्ताओं को कर्मचारियों की कमी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। उधर, विद्युत उपमंडल तलाई के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि झबोला अनुभाग में रिक्त पदों का मामला उनके ध्यान में है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
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झबोला विद्युत अनुभाग में आधे पद खाली, दो हजार उपभोक्ता परेशान
स्वीकृत आठ में चार पद लंबे समय से रिक्त, तकनीकी खराबी दूर करने में लग रहा घंटों समय
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। विद्युत उपमंडल तलाई के तहत झबोला विद्युत अनुभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। अनुभाग में स्वीकृत आठ पदों में से चार लंबे समय से रिक्त हैं। इसका असर पांच पंचायतों के करीब दो हजार विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से बिजली की तकनीकी खराबियां दूर करने में कई बार घंटों लग जाते हैं। इससे ग्रामीणों में रोष है।
झबोला विद्युत अनुभाग के तहत दसलेहड़ा, घराण, भड़ोली कलां, घंडीर और झबोला पंचायतें आती हैं। करीब दो हजार उपभोक्ताओं के साथ 27 ट्रांसफार्मरों की देखरेख का जिम्मा भी इसी अनुभाग पर है। आठ पद स्वीकृत होने के बावजूद चार कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में एक कर्मचारी के जिम्मे छह से सात ट्रांसफार्मर तक हैं।
ग्रामीणों के अनुसार शाम या रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने पर परेशानी बढ़ जाती है। खंभे में खराबी या ट्रांसफार्मर का फेस उड़ने पर स्टाफ की कमी के कारण मरम्मत में देरी होती है। कई बार लोगों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। ग्रामीणों ने सरकार और विद्युत बोर्ड से रिक्त चारों पद जल्द भरने की मांग की है। वहीं, सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है।
ट्रांसफार्मर सड़क तक पहुंचाना चुनौती
कई ट्रांसफार्मर मुख्य सड़क से दूर स्थापित हैं। तकनीकी खराबी आने पर इन्हें सड़क तक पहुंचाना भी कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाता है। हाल ही में जमराडियां में ट्रांसफार्मर खराब होने पर कर्मचारियों को उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। विद्युत उपमंडल तलाई के तहत झबोला विद्युत अनुभाग इन दिनों कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। अनुभाग में स्वीकृत आठ पदों में से चार लंबे समय से रिक्त हैं। इसका सीधा असर पांच पंचायतों के करीब दो हजार विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण बिजली संबंधी तकनीकी खराबियों को दूर करने में कई बार घंटों का समय लग जाता है। इससे ग्रामीणों में विद्युत विभाग और प्रदेश सरकार के प्रति रोष है।
झबोला विद्युत अनुभाग के तहत दसलेहड़ा, घराण, भड़ोली कलां, घंडीर और झबोला पंचायतें आती हैं। इन क्षेत्रों में करीब दो हजार उपभोक्ताओं के अलावा 27 ट्रांसफार्मरों की देखरेख का जिम्मा भी इसी अनुभाग के कर्मचारियों पर है। आठ पद स्वीकृत होने के बावजूद महज चार कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक कर्मचारी पर औसतन छह से सात ट्रांसफार्मरों की जिम्मेदारी है। शाम या रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने पर समस्या और गंभीर हो जाती है। खंभे में खराबी आने या ट्रांसफार्मर का एक फेस उड़ने पर पर्याप्त स्टाफ के अभाव में मरम्मत में समय लग जाता है। कई बार उपभोक्ताओं को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है।
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ग्रामीणों के अनुसार कई ट्रांसफार्मर मुख्य सड़क से काफी दूर स्थापित हैं। तकनीकी खराबी आने पर उन्हें सड़क तक पहुंचाना कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाता है। जमराडियां गांव में हाल ही में ट्रांसफार्मर खराब होने पर उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी। इससे स्टाफ की कमी से पैदा हो रही मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और विद्युत विभाग से झबोला अनुभाग में रिक्त पड़े चारों पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सुविधा के लिए हजारों उपभोक्ताओं को कर्मचारियों की कमी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। उधर, विद्युत उपमंडल तलाई के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि झबोला अनुभाग में रिक्त पदों का मामला उनके ध्यान में है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
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झबोला विद्युत अनुभाग में आधे पद खाली, दो हजार उपभोक्ता परेशान
स्वीकृत आठ में चार पद लंबे समय से रिक्त, तकनीकी खराबी दूर करने में लग रहा घंटों समय
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। विद्युत उपमंडल तलाई के तहत झबोला विद्युत अनुभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। अनुभाग में स्वीकृत आठ पदों में से चार लंबे समय से रिक्त हैं। इसका असर पांच पंचायतों के करीब दो हजार विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से बिजली की तकनीकी खराबियां दूर करने में कई बार घंटों लग जाते हैं। इससे ग्रामीणों में रोष है।
झबोला विद्युत अनुभाग के तहत दसलेहड़ा, घराण, भड़ोली कलां, घंडीर और झबोला पंचायतें आती हैं। करीब दो हजार उपभोक्ताओं के साथ 27 ट्रांसफार्मरों की देखरेख का जिम्मा भी इसी अनुभाग पर है। आठ पद स्वीकृत होने के बावजूद चार कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में एक कर्मचारी के जिम्मे छह से सात ट्रांसफार्मर तक हैं।
ग्रामीणों के अनुसार शाम या रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने पर परेशानी बढ़ जाती है। खंभे में खराबी या ट्रांसफार्मर का फेस उड़ने पर स्टाफ की कमी के कारण मरम्मत में देरी होती है। कई बार लोगों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। ग्रामीणों ने सरकार और विद्युत बोर्ड से रिक्त चारों पद जल्द भरने की मांग की है। वहीं, सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है।
ट्रांसफार्मर सड़क तक पहुंचाना चुनौती
कई ट्रांसफार्मर मुख्य सड़क से दूर स्थापित हैं। तकनीकी खराबी आने पर इन्हें सड़क तक पहुंचाना भी कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाता है। हाल ही में जमराडियां में ट्रांसफार्मर खराब होने पर कर्मचारियों को उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी।