फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   manimahesh kailash mystery shepherd stone story

हिमाचल: मणिमहेश का वो रहस्य, जिसे आज भी नहीं भूले लोग… कैलाश की ओर बढ़ा था गड़रिया, फिर पत्थर बनने की कहानी

Fri, 28 Aug 2026 10:20 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/चंबा।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/चंबा। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 28 Aug 2026 10:20 AM IST
सार
Register For Event

चंबा के भरमौर स्थित मणिमहेश कैलाश भगवान शिव की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां कई लोककथाएं भी प्रचलित हैं। इनमें एक कहानी गड़रिये की है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने कैलाश की ओर चढ़ने की कोशिश की और बाद में पत्थर बन गया। इस घटना का कोई वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है, जो आज भी मणिमहेश की रहस्यमयी पहचान का हिस्सा बनी हुई है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
manimahesh kailash mystery shepherd stone story
मणिमहेश पर्वत और पवित्र डल झील। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में कई ऐसी जगहें हैं, जहां पहुंचते ही माहौल बदल जाता है। चारों तरफ ऊंची चोटियां, सामने बर्फ से ढका पहाड़ और बीच में शांत मणिमहेश झील। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं होती, बल्कि भगवान शिव के दरबार तक पहुंचने जैसा अनुभव होता है।

विज्ञापन

manimahesh kailash mystery shepherd stone story
मणिमहेश कैलाश पर्वत। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

मणिमहेश कैलाश को लेकर कई कहानियां स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच सुनने को मिलती हैं। इनमें एक कथा ऐसी भी है, जो बरसों से लोगों की जुबान पर है। कहानी एक गड़रिये की है, जिसने कैलाश की चोटी की तरफ बढ़ने की कोशिश की थी। कहा जाता है कि इसके बाद जो हुआ, उसे लोग आज भी मणिमहेश की रहस्यमयी मान्यता से जोड़कर देखते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

manimahesh kailash mystery shepherd stone story
मणिमहेश झील तक का टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
गड़रिया कैलाश की तरफ क्यों बढ़ा?
स्थानीय लोककथा के अनुसार, एक गड़रिया अपनी भेड़-बकरियों के साथ मणिमहेश कैलाश क्षेत्र में पहुंचा था। बताते हैं कि उसने कैलाश की ऊंचाई की तरफ जाने का प्रयास किया। उसके साथ कुछ अन्य लोग भी आगे बढ़ने लगे।
विज्ञापन

manimahesh kailash mystery shepherd stone story
मणिमहेश झील की एक झलक - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
जितना ऊपर जाने की कोशिश की गई, रास्ता उतना ही मुश्किल होता गया। इसी दौरान एक ऐसी घटना होने की बात कही जाती है, जिसने इस कहानी को हमेशा के लिए लोकविश्वास का हिस्सा बना दिया मान्यता है कि गड़रिया और उसके साथ मौजूद लोग पत्थर में बदल गए।

manimahesh kailash mystery shepherd stone story
मणिमहेश कैलाश पर्वत का नजारा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

आज भी कुछ प्राकृतिक चट्टानों और पहाड़ी आकृतियों को इसी कथा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस कहानी की पुष्टि करने वाला कोई वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह पीढ़ियों से चली आ रही लोकमान्यता है।

कैलाश की चोटी को लेकर क्यों है इतनी आस्था?
मणिमहेश कैलाश को भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव का वास है। इसलिए यात्रा के दौरान लोग कैलाश के दर्शन को ही सबसे बड़ा सौभाग्य मानते हैं। मणिमहेश झील तक पहुंचने के बाद सामने दिखाई देने वाला कैलाश पर्वत श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। मौसम साफ हो तो बर्फ से ढकी चोटी का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। लेकिन इसी के साथ एक धारणा भी मजबूत है कैलाश की चोटी तक पहुंचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यही वजह है कि मणिमहेश यात्रा में कैलाश के दर्शन और झील में आस्था की डुबकी को विशेष महत्व दिया जाता है।

कहानी कितनी सच है?
गड़रिये के पत्थर बनने की कहानी सुनने में जितनी रहस्यमयी लगती है, उतना ही जरूरी है इसके दूसरे पहलू को समझना। इस घटना का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक रिकॉर्ड या वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं है। इसलिए इसे घटना के बजाय मणिमहेश से जुड़ी धार्मिक लोककथा और स्थानीय मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं। समय के साथ उनमें नए प्रसंग जुड़ते गए और वे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बन गईं। मणिमहेश की यह कहानी भी उसी परंपरा का हिस्सा मानी जाती है।

मणिमहेश में रहस्य से ज्यादा आस्था है
मणिमहेश की खासियत सिर्फ यहां की कहानियां नहीं हैं। कठिन पहाड़ी रास्ते के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कोई मन्नत लेकर आता है तो कोई भगवान शिव के दर्शन के लिए। सुबह के समय जब पहाड़ों के बीच से रोशनी मणिमहेश झील पर पड़ती है और सामने कैलाश की बर्फीली चोटी चमकती है, तो श्रद्धालुओं के लिए वह दृश्य अपने आप में एक आस्था बन जाता है। शायद यही कारण है कि गड़रिये की कहानी आज भी खत्म नहीं हुई। किसी के लिए यह सिर्फ एक लोककथा है, तो किसी के लिए भगवान शिव की शक्ति से जुड़ी चेतावनी।

मणिमहेश का रहस्य आखिर क्या है, इसका जवाब हर व्यक्ति अपने विश्वास के अनुसार देता है। लेकिन एक बात तय है कि मणिमहेश कैलाश की कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही गहरी यहां आने वाले लोगों की आस्था भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed