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शिमला: हिमालयी जड़ी-बूटियों से पर्वतारोहियों के लिए तैयार की चोको बार, परीक्षण सफल

Wed, 16 Sep 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 16 Sep 2026 05:30 AM IST
सार
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एचपीयू के पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन संस्थान ने हिमालयी जड़ी-बूटियों से पर्वतारोहियों के लिए चोको बार तैयार करने में कामयाबी हासिल की है।  इसका उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में परीक्षण भी सफल रहा है।

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Choco bars for mountaineers prepared using Himalayan herbs; trials successful. Choco bars
चोको बार। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन संस्थान ने हिमालयी जड़ी-बूटियों से पर्वतारोहियों के लिए चोको बार तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इसका उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में परीक्षण भी सफल रहा है। अब एचपीयू ने इस ग्रोग चॉकलेट बार का पेटेंट भी हासिल कर लिया है। खास बात यह है कि इम्युनिटी बढ़ाने के साथ ऊंचाई में सांस लेने की तकलीफ यानी एएमएस (एक्यूट माउंटेन सिकनेस) के लक्षणों को भी यह चोको बार कम करेगी। इस उत्पाद पर वर्ष 2023 में काम शुरू किया गया था। करीब डेढ़ साल बाद इसे तैयार किया गया।

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संस्थान ने इसे सामान्य चॉकलेट से अलग ऊर्जा देने वाले खाद्य उत्पाद के रूप में विकसित किया है। इसमें डार्क चॉकलेट के साथ ग्रोग मदिरा, ड्राई फ्रूट और चयनित जड़ी-बूटियों का मिश्रण किया गया है। उत्पाद में बनकशा, अदरक, हरी और बड़ी इलायची, जावित्री और केसर जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इन पारंपरिक सामग्री को चॉकलेट के आधार के साथ मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार करने पर काम किया गया, जिसे यात्रा और ऊंचाई वाले इलाकों में आसानी से साथ ले जाया जा सके। एएमएस को लेकर किए गए परीक्षण इस उत्पाद की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।

 

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ऊंचाई वाले वातावरण में परीक्षण के दौरान चॉकलेट बार को एएमएस के लक्षणों को कम करने में मददगार पाया गया। हालांकि, इसे एएमएस के इलाज के रूप में नहीं, बल्कि ऊंचाई पर उपयोग के लिए विकसित खाद्य उत्पाद के तौर पर देखा गया है। संस्थान ने उत्पाद के लिए जरूरी लाइसेंस और अनुमतियां भी हासिल कर ली हैं। अब इसे बड़े स्तर पर तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। भविष्य में इसके उत्पादन और बाजार तक पहुंच बनाने की योजना है। इससे विश्वविद्यालय के शोध को पर्यटन, पर्वतीय गतिविधियों और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र से जोड़ने की संभावना भी बनी है।

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स्थानीय सामग्री को खाद्य उत्पाद में जगह
ग्रोग चॉकलेट बार को खास तौर पर ऐसे उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जो पर्वतीय यात्राओं, ट्रैकिंग और अन्य ऊंचाई वाले अभियानों पर जाते हैं।  ग्रोग के निर्माता एचपीयू के डॉ. नितिन व्यास और डॉ. प्रति नागल ने बताया कि उत्पाद में इस्तेमाल की गई पारंपरिक जड़ी-बूटियों और मसालों के जरिये हिमाचल की स्थानीय खाद्य एवं पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक खाद्य उत्पाद से जोड़ा गया है। डार्क चॉकलेट के साथ सूखे मेवों और मसालों का संयोजन इसके स्वाद और पोषण संबंधी विशेषताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। भविष्य में अलग फ्लेवर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।

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