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Hamirpur (Himachal) News: मसयाणा में पहाड़ी दरकी, नाल्टी-हमीरपुर सड़क पर गिर रहा मलबा, सफर बना जोखिम
Fri, 21 Aug 2026 01:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 21 Aug 2026 01:15 AM IST
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बलवंत ठाकुर पूर्व सैनिकबाडला
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हमीरपुर। निर्माणाधीन शिमला-कांगड़ा फोरलेन के कोहली-चीलबाहल टूलेन चरण का काम स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। मसयाणा जंगल से नाल्टी-हमीरपुर सड़क पर लगातार मलबा गिर रहा है।
यहां फोरलेन के तहत वाहन ओवरपास (वीओपी) का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए की गई गहरी खोदाई से सड़क के ऊपरी और निचले हिस्से से मलबा खिसक रहा है।
मसयाणा जंगल से पेड़ भी गिरकर सड़क तक पहुंच रहे हैं। वहीं, फोरलेन के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से बाहर पहाड़ी का हिस्सा भी दरक गया है। पहाड़ी संरक्षण के लिए लगाए गए चार से छह फीट ऊंचे डंगे बरसात में ध्वस्त हो चुके हैं।
बुधवार को पहाड़ी से गिर रहे मलबे की चपेट में आने से दो बसें बाल-बाल बचीं। निर्माण कंपनी और संबंधित विभाग ने मलबा हटाने के लिए जेसीबी तैनात की है, लेकिन लगातार मलबा गिरने से यातायात के बीच सफर जोखिम भरा बना हुआ है।
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लोक निर्माण विभाग के अनुसार बारिश के दौरान निगरानी के लिए कर्मचारी तैनात रहता है और भूस्खलन का खतरा होने पर वाहन चालकों को अलर्ट किया जाता है। इसके बावजूद सड़क पर वाहनों की आवाजाही जारी रहने से खतरा बना हुआ है।
पहाड़ी कटिंग से कुनाह खड्ड पर खतरा
मसयाणा चौक से करीब एक किलोमीटर आगे टूलेन निर्माण के दौरान पहाड़ी की भारी कटिंग और मलबा डंपिंग से परेशानी बढ़ गई है। करीब 100 से 150 फीट ऊंचाई तक काटी गई पहाड़ी से पेड़ और मलबा लगातार गिर रहा है। आरोप है कि मलबा सीधे कुनाह खड्ड में डाला गया है। बरसात में मलबा गाद के रूप में बहकर पेयजल योजनाओं को प्रभावित कर रहा है। कुनाह खड्ड पर नादौन क्षेत्र में दर्जनों पेयजल योजनाएं हैं, जिससे इनके प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
वन विभाग ने पिछले वर्ष किया जुर्माना, इस बार नहीं ली सुध
वन विभाग हमीरपुर की ओर से यहां अवैध डंपिंग और जंगल को नुकसान पहुंचाने पर पिछली बरसात के दौरान एक लाख 30 हजार रुपये का जुर्माना किया गया था। फोरलेन निर्माण की डीपीआर में यहां 11 डंपिंग साइट का प्रावधान है, लेकिन मलबा कटान के आसपास जंगल और कुनाह में डंप किया गया है। हालात ऐसे हैं कि जिला मुख्यालय से महज पांच से सात किलोमीटर दूर इस जगह पर वन विभाग के अधिकारी निरीक्षण तक के लिए नहीं पहुंचे हैं।
जवाब देने से बच रहा एनएचएआई, गांवों में तबाही
मसयाणा, कुसवाड़ सहित क्षेत्र के अन्य गांवों के आवागमन के रास्ते और पानी की निकासी के रास्ते भी तबाह हो चुके हैं। लोगों के घरों और खेतों में पानी घुस रहा है। मसयाणा चौक में पहाड़ी और फोरलेन का पानी सीधा गांव की ओर जा रहा है। यहां लोक निर्माण विभाग का कलवर्ट भी बंद है, जिससे एक तरफ पानी तालाब के रूप में खड़ा हो गया है।
कोट्स
यहां सड़क को फोरलेन निर्माण के चलते काफी नुकसान पहुंचा है। एनएचएआई को सड़क की मरम्मत करवाने और मलबे से बचाव के लिए पत्र लिखा गया है। - दीपक कपिल, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल हमीरपुर
मामले में जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा। नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। -अंकित सिंह, डीएफओ हमीरपुर
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पहाड़ी का पानी मकानों और दुकानों में घुस रहा है। पिछले वर्ष भी पूरे गांव में मलबा और पानी घुस गया था। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। -विजय शर्मा निवासी बाडला
कंपनी ने सड़क को पूरा तैयार किये बिना ही चालू कर दिया है। कंपनी की हैवी मशीनरी और कांगड़ा-शिमला का पूरा ट्रैफिक गांव के छोटे से रास्ते से निकल रहा है। घरों में दरारें आ चुकी हैं। -बलवंत ठाकुर, पूर्व सैनिक निवासी बाडला
हमीरपुर केवल पांच किलोमीटर की दूरी पर है। पूरा ट्रैफिक यहीं से गुजर रहा। आम आदमी घर आने में भी परेशान हो रहा। रास्ते में पहाड़ की सीधी कटाई किसी भी समय जान-माल को क्षति पहुंचा सकती है। -अश्वनी ठाकुर, निवासी बाडला
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यहां फोरलेन के तहत वाहन ओवरपास (वीओपी) का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए की गई गहरी खोदाई से सड़क के ऊपरी और निचले हिस्से से मलबा खिसक रहा है।
मसयाणा जंगल से पेड़ भी गिरकर सड़क तक पहुंच रहे हैं। वहीं, फोरलेन के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से बाहर पहाड़ी का हिस्सा भी दरक गया है। पहाड़ी संरक्षण के लिए लगाए गए चार से छह फीट ऊंचे डंगे बरसात में ध्वस्त हो चुके हैं।
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बुधवार को पहाड़ी से गिर रहे मलबे की चपेट में आने से दो बसें बाल-बाल बचीं। निर्माण कंपनी और संबंधित विभाग ने मलबा हटाने के लिए जेसीबी तैनात की है, लेकिन लगातार मलबा गिरने से यातायात के बीच सफर जोखिम भरा बना हुआ है।
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लोक निर्माण विभाग के अनुसार बारिश के दौरान निगरानी के लिए कर्मचारी तैनात रहता है और भूस्खलन का खतरा होने पर वाहन चालकों को अलर्ट किया जाता है। इसके बावजूद सड़क पर वाहनों की आवाजाही जारी रहने से खतरा बना हुआ है।
पहाड़ी कटिंग से कुनाह खड्ड पर खतरा
मसयाणा चौक से करीब एक किलोमीटर आगे टूलेन निर्माण के दौरान पहाड़ी की भारी कटिंग और मलबा डंपिंग से परेशानी बढ़ गई है। करीब 100 से 150 फीट ऊंचाई तक काटी गई पहाड़ी से पेड़ और मलबा लगातार गिर रहा है। आरोप है कि मलबा सीधे कुनाह खड्ड में डाला गया है। बरसात में मलबा गाद के रूप में बहकर पेयजल योजनाओं को प्रभावित कर रहा है। कुनाह खड्ड पर नादौन क्षेत्र में दर्जनों पेयजल योजनाएं हैं, जिससे इनके प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
वन विभाग ने पिछले वर्ष किया जुर्माना, इस बार नहीं ली सुध
वन विभाग हमीरपुर की ओर से यहां अवैध डंपिंग और जंगल को नुकसान पहुंचाने पर पिछली बरसात के दौरान एक लाख 30 हजार रुपये का जुर्माना किया गया था। फोरलेन निर्माण की डीपीआर में यहां 11 डंपिंग साइट का प्रावधान है, लेकिन मलबा कटान के आसपास जंगल और कुनाह में डंप किया गया है। हालात ऐसे हैं कि जिला मुख्यालय से महज पांच से सात किलोमीटर दूर इस जगह पर वन विभाग के अधिकारी निरीक्षण तक के लिए नहीं पहुंचे हैं।
जवाब देने से बच रहा एनएचएआई, गांवों में तबाही
मसयाणा, कुसवाड़ सहित क्षेत्र के अन्य गांवों के आवागमन के रास्ते और पानी की निकासी के रास्ते भी तबाह हो चुके हैं। लोगों के घरों और खेतों में पानी घुस रहा है। मसयाणा चौक में पहाड़ी और फोरलेन का पानी सीधा गांव की ओर जा रहा है। यहां लोक निर्माण विभाग का कलवर्ट भी बंद है, जिससे एक तरफ पानी तालाब के रूप में खड़ा हो गया है।
कोट्स
यहां सड़क को फोरलेन निर्माण के चलते काफी नुकसान पहुंचा है। एनएचएआई को सड़क की मरम्मत करवाने और मलबे से बचाव के लिए पत्र लिखा गया है। - दीपक कपिल, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल हमीरपुर
मामले में जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा। नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। -अंकित सिंह, डीएफओ हमीरपुर
पहाड़ी का पानी मकानों और दुकानों में घुस रहा है। पिछले वर्ष भी पूरे गांव में मलबा और पानी घुस गया था। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। -विजय शर्मा निवासी बाडला
कंपनी ने सड़क को पूरा तैयार किये बिना ही चालू कर दिया है। कंपनी की हैवी मशीनरी और कांगड़ा-शिमला का पूरा ट्रैफिक गांव के छोटे से रास्ते से निकल रहा है। घरों में दरारें आ चुकी हैं। -बलवंत ठाकुर, पूर्व सैनिक निवासी बाडला
हमीरपुर केवल पांच किलोमीटर की दूरी पर है। पूरा ट्रैफिक यहीं से गुजर रहा। आम आदमी घर आने में भी परेशान हो रहा। रास्ते में पहाड़ की सीधी कटाई किसी भी समय जान-माल को क्षति पहुंचा सकती है। -अश्वनी ठाकुर, निवासी बाडला