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अहम फैसला: आईएनडी की जांच के बाद ही बाजार में आएंगी विदेश बनी दवाएं, उद्योगों को मिलेगी राहत

Tue, 25 Aug 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh सोमदत्त शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी,सोलन।
सोमदत्त शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी,सोलन। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Aug 2026 05:30 AM IST
सार
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अब ऐसी दवाओं का सीधे भारत में आयात और मार्केटिंग नहीं की जा सकेगी, जिन्हें अभी तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। आयात और मार्केटिंग से पहले संबंधित दवा को इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (आईएनडी) डिविजन से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

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Key Decision: Medicines imported from abroad will enter the market only after IND scrutiny; industries to get
दवाएं(सांकेतिक)। - फोटो : Freepik.com

विस्तार

 केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने विदेशों से आयात होने वाली सभी प्रकार की नई दवाओं को लेकर अहम फैसला लिया है। अब ऐसी दवाओं का सीधे भारत में आयात और मार्केटिंग नहीं की जा सकेगी, जिन्हें अभी तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। आयात और मार्केटिंग से पहले संबंधित दवा को इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (आईएनडी) डिविजन से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। सीडीएससीओ की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, ऐसी दवाएं जिनके फेज-3 के वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं या भारतीय नागरिकों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो चुके हैं, उनके आवेदनों की समीक्षा अब सीडीएससीओ मुख्यालय स्थित आईएनडी डिविजन की ओर से की जाएगी।

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संबंधित आवेदकों को गैर-क्लीनिकल और क्लीनिकल डेटा भी प्रस्तुत करना होगा। किसी अन्य देश में दवा की नियामकीय स्थिति को भी समीक्षा के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। इस फैसले से बीबीएन के सैकड़ों दवा उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विदेशों से वही दवाएं भारत में आएं, जो निर्धारित सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावकारिता के मानकों पर खरी उतरती हों। इससे पहले कई मामलों में फेज-3 ट्रायल के दौरान ही दवाओं का आयात और उनकी मार्केटिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी, जिसका असर भारतीय फार्मा उद्योग पर पड़ता था। 

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अभी सीडीएससीओ देता था मंजूरी
भारत में विदेश से आने वाली दवाओं और उनके आयात को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन मंजूरी देता है। संगठन के प्रमुख ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) होते हैं, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत नई दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और उनके आयात को नियंत्रित करते हैं। विदेशी निर्माताओं या उनके स्थानीय एजेंटों को भारत में दवा लाने से पहले सीडीएससीओ पोर्टल के माध्यम से उत्पाद और विनिर्माण स्थल का पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद सीडीएससीओ यह सुनिश्चित करता है कि आयातित दवा भारतीय गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के मानकों पर खरी उतरे।

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इसलिए लिया गया यह फैसला
सीडीएससीओ को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि भारत में क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर उन दवाओं की मार्केटिंग की अनुमति मांगी जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर अभी अप्रमाणित या समीक्षा के अधीन हैं। इस विषय पर सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने विचार-विमर्श किया। समिति ने माना कि विदेशी नियामकीय संस्थाओं के पास समीक्षा के अधीन दवाओं के गैर-क्लीनिकल और क्लीनिकल डेटा का न्यू ड्रग्स एंड क्लीनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 के तहत व्यापक मूल्यांकन जरूरी है।

आवेदकों के लिए जारी निर्देश
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि अब संबंधित आवेदकों को अपने आवेदन सीधे नई दिल्ली स्थित आईएनडी डिविजन में प्रस्तुत करने होंगे। सीडीएससीओ का यह कदम देश में दवाओं की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन को अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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