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ED: आंध्र के पूर्व CM के चाचा की हत्या के लिए 40 करोड़ में सौदा, सियासत में चुनौती खत्म करने के लिए रची साजिश

Fri, 21 Aug 2026 05:44 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 21 Aug 2026 05:44 PM IST
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ED rs 40 crore deal struck to assassinate former Andhra Pradesh CM's uncle
ED - फोटो : ED

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हैदराबाद टीम ने दिवंगत वाईएस विवेकानंद रेड्डी मर्डर केस के सिलसिले में कई जगहों पर छापेमारी की है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के चाचा और कडप्पा के लोकप्रिय नेता (पूर्व एमएलए, एमपी) विवेकानंद रेड्डी की 15 मार्च  2019 को उनके घर पर हत्या कर दी गई थी। ईडी ने हैदराबाद और कडप्पा में छापेमारी के दौरान 24 लाख रुपये नकद व लॉकर की दो चाबियां बरामद की हैं।  

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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2020 को रिट याचिका संख्या 1639/2020 में सीबीआई को इस केस की जांच करने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और गहन जांच-पड़ताल के बाद इस केस में तीन चार्जशीट दाखिल की थीं। इनमें वाईएस अविनाश रेड्डी (कडप्पा से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद), वाईएस भास्कर रेड्डी, डी शिवा शंकर रेड्डी, टी गांगी रेड्डी, वाई सुनील यादव और अन्य को आरोपी बनाया गया था। 
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सीबीआई की चार्जशीट से पता चला कि डी शिवा शंकर रेड्डी (वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एक नेता) और उनके करीबी सहयोगी वाई एस अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई एस भास्कर रेड्डी इस बात से नाराज थे कि स्वर्गीय वाई एस विवेकानंद रेड्डी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। वजह, इससे राजनीति में उनके बढ़ते प्रभाव को चुनौती मिल सकती थी। ऐसे में आरोपियों ने विवेकानंद रेड्डी को रास्ते से हटाने के लिए एक आपराधिक साजिश रची। इसमें टी गांगी रेड्डी, शेख दस्तगीर और वाई सुनील यादव समेत उनके स्टाफ को भी शामिल किया गया। 
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शेख दस्तगीर ने सरकारी गवाह बन कर खोले राज 
शेख दस्तगीर सरकारी गवाह बन गया और सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उसे माफी दे दी। उन्होंने बताया कि यह साजिश, हत्या से लगभग एक महीने पहले रची गई थी। टी. गंगि रेड्डी ने उन्हें बताया कि वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या की योजना में डी शिवा शंकर रेड्डी और कुछ वरिष्ठ राजनेता भी शामिल थे। डी शिवा शंकर रेड्डी हत्या के लिए उन्हें 40 करोड़ रुपये देने वाले थे। टी गंगि रेड्डी ने शेख दस्तगीर को 40 करोड़ रुपये की तय रकम में से पांच करोड़ रुपये का हिस्सा देने का लालच दिया। पूछताछ के दौरान उन्होंने यह भी माना कि उन्हें वाई सुनील यादव से एक करोड़ रुपये मिले थे। उस राशि में से उन्होंने 25 लाख रुपये रख लिए थे, जबकि बाकी 75 लाख रुपये अपने दोस्त सैयद मुन्ना को दे दिए। जांच एजेंसी ने सैयद मुन्ना और उनकी मां के लॉकर से 46.70 लाख रुपये नकद और बिना हिसाब-किताब वाली ज्वेलरी बरामद की थी। 


सूचीबद्ध अपराध के तहत केस दर्ज 
ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया, क्योंकि आईपीसी, 1860 की धारा 120-B और 302 के तहत लगाए गए आरोप पीएमएलए, 2002 की अनुसूची के तहत 'सूचीबद्ध अपराध' हैं। जांच एजेंसी ने हैदराबाद और कडपा में मुख्य आरोपियों के घरों की तलाशी ली। इस दौरान नकदी और दूसरी वस्तुओं के अलावा आपत्तिजनक दस्तावेज व डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। 

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