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कर्नाटक में फिर गरमाया सीडी विवाद: सिद्दारमैया के वीडियो पर राजन्ना बोले- स्टिंग ऑपरेशन के पीछे एक ही नेटवर्क
Tue, 13 Oct 2026 08:03 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, बंगलूरू
आईएएनएस, बंगलूरू
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 13 Oct 2026 08:03 PM IST
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने दावा किया कि इस मामले के पीछे वही लोग हो सकते हैं, जिनका नाम 2021 में भाजपा नेता रमेश जारकीहोली से जुड़े सीडी विवाद में सामने आया था।
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राजन्ना ने सीएम शिवकुमार से की जांच कराने की मांग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने मंगलवार को कहा कि पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रमेश जारकीहोली से जुड़े विवादित सीडी मामले के पीछे जो लोग थे, वही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाने वाले वीडियो के लिए भी जिम्मेदार हैं।
राजन्ना की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई, जब कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया ने बंगलूरू की एक अदालत में याचिका दायर कर स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े मानहानिकारक ऑडियो और वीडियो क्लिप के प्रसारण और प्रसार पर रोक लगाने की मांग की।
सिद्दारमैया के वीडियो का भाजपा नेता जारकीहोली से क्या कनेक्शन?
बंगलूरू में मीडिया से बात करते हुए सिद्दारमैया के करीबी सहयोगी राजन्ना ने कहा, "आप ही बताइए कि रमेश जारकीहोली की सीडी के पीछे कौन था? जिन लोगों ने उनकी सीडी बनवाई थी, उन्होंने ही सिद्दारमैया का मामला भी तैयार किया है।"
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इस विवाद के बाद 2021 में सामने आई उस सीडी को लेकर राजनीतिक अटकलें फिर तेज हो गई हैं, जिसमें रमेश जारकीहोली का नाम जुड़ा था। उस विवाद के बाद जारकीहोली ने तत्कालीन भाजपा सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि राजन्ना के बयान से मौजूदा मामले में किसी की भूमिका का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया।
केएन राजन्ना ने किया चौंकाने वाला दावा
राजन्ना ने यह भी दावा किया कि जब वह सिद्दारमैया के पिछले मंत्रिमंडल में मंत्री थे, तब उनके खिलाफ भी स्टिंग ऑपरेशन करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ भी ऐसी कोशिश हुई थी। वे मेरा स्टिंग ऑपरेशन करना चाहते थे। चूंकि वह सरकारी आवास था, इसलिए मुझे लगा कि सुरक्षा के लिए वहां सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, लेकिन बाद में पता चला कि वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया था।"
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 2025 में राजन्ना और डीके शिवकुमार के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। राजन्ना ने कहा था कि वह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हैं, यह पद उस समय डीके शिवकुमार के पास था। उन्होंने यह मांग भी की थी कि यदि सिद्दारमैया के स्थान पर कोई नया मुख्यमंत्री बनाया जाए तो वह दलित समुदाय से होना चाहिए।
कांग्रेस विधायक ने लगाया स्टिंग ऑपरेशनों के जरिए ब्लैकमेलिंग का आरोप
मौजूदा स्टिंग ऑपरेशनों को ब्लैकमेल का एक तरीका बताते हुए राजन्ना ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मामले को स्पष्ट करने और उचित जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के अधीन सभी जांच एजेंसियां हैं। उन्हें लोगों के बीच की भ्रम की स्थिति को दूर करना चाहिए। इस पूरे मामले से राज्य की प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंची है। हम अपनी इज्जत और सम्मान खुद ही खो रहे हैं।"
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए राजन्ना ने कहा, "मुख्यमंत्री खुद एक असहाय व्यक्ति की तरह कैसे बात कर सकते हैं? यदि जांच कराई जाए और सब कुछ सार्वजनिक किया जाए, तो यह स्टिंग माफिया यहीं रुक जाएगा।" राजन्ना ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सीडी बनाने, जारी करने और स्टिंग ऑपरेशन चलाने का मूल तंत्र एक ही है, हालांकि इसमें शामिल लोग अलग-अलग हो सकते हैं।
राजन्ना बोले- सीडी बनाने वाली फैक्ट्री एक, लेकिन साझेदार अलग-अलग
उन्होंने कहा, "राज्य में सीडी बनाने और जारी करने तथा स्टिंग ऑपरेशन चलाने की केवल एक ही फैक्ट्री है, लेकिन उसके साझेदार अलग-अलग हैं।" सिद्दारमैया की अदालत में दायर याचिका का जिक्र करते हुए राजन्ना ने कहा कि यह वीडियो नया नहीं बल्कि पुराना है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया पर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल किया गया हो, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्होंने इसे अफवाहों और आशंकाओं के रूप में बताया।
उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि ऐसे वीडियो बनाने वालों से उनके उद्देश्य के बारे में सवाल पूछे जाएं। राजन्ना ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने उस व्यवस्था पर चर्चा की थी, जिसके तहत दो मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल का कार्यकाल संभालेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सिद्दारमैया और शिवकुमार इस व्यवस्था पर सहमत थे या नहीं। इसी आधार पर सिद्दारमैया से पद छोड़ने के लिए कहा गया था, किसी आरोप की वजह से नहीं।
सिद्दारमैया से जुड़े वीडियो के प्रसारण पर अंतरिम रोक
सिद्दारमैया की याचिका पर बंगलूरू की एक अदालत ने मंगलवार को उनसे संबंधित एक वीडियो के प्रसारण पर अंतरिम रोक लगा दी। 19वें एडिशनल सिटी सिविल एवं सेशंस जज बी. पुष्पांजलि ने एकतरफा अंतरिम आदेश में प्रतिवादियों को किसी भी माध्यम से उस वीडियो को प्रसारित, पुनः प्रसारित, प्रकाशित, अपलोड व साझा करने या किसी अन्य तरीके से फैलाने से रोक दिया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा इसलिए खटखटाया क्योंकि उन्हें निशाना बनाकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चलाया जा रहा था।
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राजन्ना की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई, जब कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया ने बंगलूरू की एक अदालत में याचिका दायर कर स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े मानहानिकारक ऑडियो और वीडियो क्लिप के प्रसारण और प्रसार पर रोक लगाने की मांग की।
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सिद्दारमैया के वीडियो का भाजपा नेता जारकीहोली से क्या कनेक्शन?
बंगलूरू में मीडिया से बात करते हुए सिद्दारमैया के करीबी सहयोगी राजन्ना ने कहा, "आप ही बताइए कि रमेश जारकीहोली की सीडी के पीछे कौन था? जिन लोगों ने उनकी सीडी बनवाई थी, उन्होंने ही सिद्दारमैया का मामला भी तैयार किया है।"
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इस विवाद के बाद 2021 में सामने आई उस सीडी को लेकर राजनीतिक अटकलें फिर तेज हो गई हैं, जिसमें रमेश जारकीहोली का नाम जुड़ा था। उस विवाद के बाद जारकीहोली ने तत्कालीन भाजपा सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि राजन्ना के बयान से मौजूदा मामले में किसी की भूमिका का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया।
केएन राजन्ना ने किया चौंकाने वाला दावा
राजन्ना ने यह भी दावा किया कि जब वह सिद्दारमैया के पिछले मंत्रिमंडल में मंत्री थे, तब उनके खिलाफ भी स्टिंग ऑपरेशन करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ भी ऐसी कोशिश हुई थी। वे मेरा स्टिंग ऑपरेशन करना चाहते थे। चूंकि वह सरकारी आवास था, इसलिए मुझे लगा कि सुरक्षा के लिए वहां सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, लेकिन बाद में पता चला कि वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया था।"
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 2025 में राजन्ना और डीके शिवकुमार के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। राजन्ना ने कहा था कि वह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हैं, यह पद उस समय डीके शिवकुमार के पास था। उन्होंने यह मांग भी की थी कि यदि सिद्दारमैया के स्थान पर कोई नया मुख्यमंत्री बनाया जाए तो वह दलित समुदाय से होना चाहिए।
कांग्रेस विधायक ने लगाया स्टिंग ऑपरेशनों के जरिए ब्लैकमेलिंग का आरोप
मौजूदा स्टिंग ऑपरेशनों को ब्लैकमेल का एक तरीका बताते हुए राजन्ना ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मामले को स्पष्ट करने और उचित जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के अधीन सभी जांच एजेंसियां हैं। उन्हें लोगों के बीच की भ्रम की स्थिति को दूर करना चाहिए। इस पूरे मामले से राज्य की प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंची है। हम अपनी इज्जत और सम्मान खुद ही खो रहे हैं।"
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए राजन्ना ने कहा, "मुख्यमंत्री खुद एक असहाय व्यक्ति की तरह कैसे बात कर सकते हैं? यदि जांच कराई जाए और सब कुछ सार्वजनिक किया जाए, तो यह स्टिंग माफिया यहीं रुक जाएगा।" राजन्ना ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सीडी बनाने, जारी करने और स्टिंग ऑपरेशन चलाने का मूल तंत्र एक ही है, हालांकि इसमें शामिल लोग अलग-अलग हो सकते हैं।
राजन्ना बोले- सीडी बनाने वाली फैक्ट्री एक, लेकिन साझेदार अलग-अलग
उन्होंने कहा, "राज्य में सीडी बनाने और जारी करने तथा स्टिंग ऑपरेशन चलाने की केवल एक ही फैक्ट्री है, लेकिन उसके साझेदार अलग-अलग हैं।" सिद्दारमैया की अदालत में दायर याचिका का जिक्र करते हुए राजन्ना ने कहा कि यह वीडियो नया नहीं बल्कि पुराना है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया पर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल किया गया हो, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्होंने इसे अफवाहों और आशंकाओं के रूप में बताया।
उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि ऐसे वीडियो बनाने वालों से उनके उद्देश्य के बारे में सवाल पूछे जाएं। राजन्ना ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने उस व्यवस्था पर चर्चा की थी, जिसके तहत दो मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल का कार्यकाल संभालेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सिद्दारमैया और शिवकुमार इस व्यवस्था पर सहमत थे या नहीं। इसी आधार पर सिद्दारमैया से पद छोड़ने के लिए कहा गया था, किसी आरोप की वजह से नहीं।
सिद्दारमैया से जुड़े वीडियो के प्रसारण पर अंतरिम रोक
सिद्दारमैया की याचिका पर बंगलूरू की एक अदालत ने मंगलवार को उनसे संबंधित एक वीडियो के प्रसारण पर अंतरिम रोक लगा दी। 19वें एडिशनल सिटी सिविल एवं सेशंस जज बी. पुष्पांजलि ने एकतरफा अंतरिम आदेश में प्रतिवादियों को किसी भी माध्यम से उस वीडियो को प्रसारित, पुनः प्रसारित, प्रकाशित, अपलोड व साझा करने या किसी अन्य तरीके से फैलाने से रोक दिया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा इसलिए खटखटाया क्योंकि उन्हें निशाना बनाकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चलाया जा रहा था।