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Railway: कश्मीर के सेब पर नहीं पड़ेगा हाईवे बंद होने का असर, दिल्ली-मुंबई तक भेजने के लिए रेलवे ने बनाया प्लान
Sat, 22 Aug 2026 08:32 PM IST
शिवम गर्ग
डिजिटल ब्यूरो।
डिजिटल ब्यूरो।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 22 Aug 2026 08:32 PM IST
रेलवे से सेब की ढुलाई किसानों और कारोबारियों के लिए सस्ती और सुरक्षित है। सड़क के मुकाबले रेल भाड़ा कम है। इससे प्रति पेटी लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। खराब मौसम, भूस्खलन या हाईवे बंद होने पर भी रेल से सेब समय पर मंडियों तक पहुंचाया जा सकेगा।
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दिल्ली से मुंबई तक रेल से पहुंचेंगे कश्मीर के सेब
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद रहने से नुकसान झेल रहे कश्मीर के सेब बागवानों और कारोबारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे ने सेब सीजन 2026 के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मकसद घाटी के सेब को देश के विभिन्न राज्यों तक सुरक्षित, सस्ता और समय पर पहुंचाना है।
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इसी सिलसिले में श्रीनगर में अहम बैठक हुई। इसमें रेलवे अधिकारियों ने हॉर्टिकल्चर विभाग और घाटी के कारोबारियों के साथ सेब की ढुलाई की रणनीति पर चर्चा की। बैठक का मुख्य मकसद इस बार सेब की ढुलाई को रेलवे के जरिए बेहतर और आसान बनाना रहा। क्योंकि 2025 में प्राकृतिक कारणों से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे बंद हो गया था। इससे हजारों टन सेब के खराब होने का खतरा पैदा हो गया था। ऐसे समय में रेलवे ने सेब की ढुलाई कर बागवानों को बड़े नुकसान से बचाया था। पिछले साल जम्मू डिवीजन ने गुड्स ट्रेन, जेपीपी-आरसीएस पार्सल ट्रेन, पार्सल वैन और बीसीएन वैगन से करीब 20 हजार टन सेब देश की अलग-अलग मंडियों तक पहुंचाया था। इससे किसान और व्यापारी बड़े नुकसान से बच गए थे।
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जानकारी के मुताबिक, सेब सीजन 2026 को लेकर हुई बैठक में दो मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें अनंतनाग और पंपोर गुड्स शेड से फलों की ढुलाई तेज करने और बडगाम से आदर्श नगर, दिल्ली तक पार्सल ट्रेन सेवा को बेहतर बनाने पर मंथन हुआ। इस दौरान तय हुआ कि बागवानी निदेशालय एक हफ्ते में इस साल के अनुमानित सेब उत्पादन और ढुलाई की जरूरतों की जानकारी रेलवे को देगा। इससे रेलवे समय पर पार्सल वैन और बीसीएन वैगनों की व्यवस्था कर सकेगा। रेलवे ने एग्रीगेटर्स से जरूरत के मुताबिक पार्सल सेवा लेने और पहले से इंडेंट भरने को कहा है। व्यापारी ऑनलाइन भी इंडेंट जमा कर सकते हैं। इससे माल को तय रूट में शामिल करने और जरूरत के मुताबिक पार्सल रेक या वैगन उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
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अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे से सेब की ढुलाई किसानों और कारोबारियों के लिए सस्ती और सुरक्षित है। सड़क के मुकाबले रेल भाड़ा कम है। इससे प्रति पेटी लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। खराब मौसम, भूस्खलन या हाईवे बंद होने पर भी रेल से सेब समय पर मंडियों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे फल खराब होने का खतरा कम होगा। पार्सल वैन और बीसीएन वैगन से एक साथ बड़ी मात्रा में सेब भेजे जा सकेंगे। इससे छोटे-छोटे लोड बार-बार भेजने की परेशानी भी कम होगी। बडगाम से आदर्श नगर दिल्ली के साथ मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े फल बाजारों तक सेब पहुंचाने की सुविधा मिलेगी।