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Tukaram Mundhe: 'कार्य संस्कृति को बदलना होगा', FDA आयुक्त तुकाराम बोले- न दबाव में आता हूं, न दबाव डालता हूं

Sat, 22 Aug 2026 07:47 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 22 Aug 2026 07:47 AM IST
सार
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Maharashtra FDA Chief Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। सिंथेटिक दूध, नकली पनीर और हानिकारक खाद्य सामग्री के खिलाफ अभियान में अब बड़ी कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। मुंढे का कहना है कि लक्ष्य कारोबार रोकना नहीं, नागरिकों का स्वास्थ्य बचाना है। क्या किसी एक सख्त अधिकारी पर निर्भर रहने के बजाय पूरी व्यवस्था को ही इतना मजबूत बनाया जा सकता है?

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Maharashtra FDA Chief Tukaram Mundhe says Work Culture Must Change and tell Neither take Pressure Nor Apply it
तुकाराम मुंढे, एफडीए के कमिश्नर, महाराष्ट्र - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। सिंथेटिक दूध, नकली पनीर और हानिकारक खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ एफडीए का अभियान जारी है। त्योहारी सीजन को देखते हुए विभाग की निगाह केवल छोटे दुकानदारों और मिठाई विक्रेताओं तक सीमित नहीं है। अमेजॉन, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसी बड़ी कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। कार्रवाई को लेकर विरोध के सवाल पर मुंढे का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी का कारोबार बंद कराना नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। उनके मुताबिक कानून और नियमों के आधार पर कार्रवाई होना जरूरी है।

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क्या किसी अधिकारी की सख्ती से ज्यादा जरूरी पूरी व्यवस्था में बदलाव है?

मुंढे के मुताबिक उनकी प्राथमिकता केवल छापेमारी या कार्रवाई तक सीमित नहीं है। वह ऐसी व्यवस्था तैयार करने की बात करते हैं, जो किसी एक अधिकारी के भरोसे न चले। इसके लिए मौजूदा व्यवस्था में सुधार, ऑटोमेशन, सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल और कामकाज में पारदर्शिता को जरूरी बताया गया है। उनका मानना है कि अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी समझाना और उन्हें उचित प्रशिक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। अगर व्यवस्था मजबूत होगी तो मिलावट के खिलाफ कार्रवाई किसी एक व्यक्ति की सख्ती पर निर्भर नहीं रहेगी। यही वजह है कि मुंढे कार्य संस्कृति में बदलाव को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रहे हैं।

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क्या जांच का दायरा छोटे दुकानदारों से बड़ी कंपनियों तक पहुंच गया है?

त्योहारी मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है और इसी दौरान मिलावट को लेकर चिंता भी बढ़ती है। एफडीए की कार्रवाई अब छोटे कारोबारियों और मिठाई विक्रेताओं के साथ बड़ी कंपनियों तक पहुंचने की बात कही गई है। ऑनलाइन खरीदारी और त्वरित डिलीवरी के बढ़ते चलन के बीच बड़ी कंपनियों के माध्यम से खाद्य सामग्री लोगों तक पहुंच रही है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पारंपरिक दुकानदारों तक सीमित नहीं रह सकती। मुंढे का कहना है कि जांच और कार्रवाई का आधार व्यक्ति या कंपनी नहीं, बल्कि कानून, तथ्य और नियम होने चाहिए। उनका जोर इसी बात पर है कि नियम सभी के लिए एक समान हों।

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क्या बिना दबाव के काम करना ही मुंढे की कार्यशैली की पहचान है?

तुकाराम मुंढे ने साफ कहा है कि वह न किसी के दबाव में काम करना चाहते हैं और न किसी पर दबाव डालना चाहते हैं। उनके अनुसार सरकारी अधिकारी का काम कानून, तथ्यों और तय नियमों के आधार पर होना चाहिए। मिलावट के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विरोध के बीच उनका यह रुख उनकी कार्यशैली को स्पष्ट करता है। लेकिन उनका सबसे बड़ा संदेश कार्रवाई से आगे व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो, उन्हें प्रशिक्षण मिले, तकनीक का इस्तेमाल बढ़े और कामकाज पारदर्शी हो। तभी ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जो किसी एक सख्त अधिकारी के जाने के बाद भी प्रभावी ढंग से काम करती रहे। सवाल यही है कि क्या प्रशासनिक व्यवस्था व्यक्ति-केंद्रित होने के बजाय संस्थागत रूप से इतनी मजबूत हो सकती है कि भविष्य में किसी तुकाराम की जरूरत ही न पड़े?

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