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मराठा आरक्षण पर सियासत तेज: मनोज जरांगे ने फिर शुरू की भूख हड़ताल, सीएम फडणवीस को क्यों बताया दुश्मन?

Sat, 29 Aug 2026 01:59 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 29 Aug 2026 01:59 PM IST
सार
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मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। उनकी प्रमुख मांग पात्र मराठा लोगों को उपलब्ध कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर जाति प्रमाणपत्र देने की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो समर्थकों के साथ मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास तक मार्च किया जाएगा।

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मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से पहले से चिन्हित 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर मराठा समुदाय के लोगों को तुरंत जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समुदाय सरकार को इस मामले में अब और समय नहीं देगा। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने कहा कि यह उनका अंतिम आंदोलन होगा। 
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उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर मराठा समुदाय के प्रति दुश्मनी रखने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उन्हें चुपचाप समर्थन दे रहे हैं। मनोज जरांगे ने जाति सत्यापन समिति को खत्म करने की भी मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर सरकार आरक्षण से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का समाधान नहीं करती है तो वह मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' की ओर मार्च करेंगे।
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फडणवीस और शिंदे पर लगाए क्या आरोप?
मनोज जरांगे ने कहा, ''देवेंद्र फडणवीस जानबूझकर मराठा समुदाय के प्रति दुश्मनी रख रहे हैं और एकनाथ शिंदे सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट के जरिए उन्हें गुप्त समर्थन दे रहे हैं। अगर वे हमारे मुद्दों का समाधान नहीं करते हैं तो हम मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' की ओर मार्च करेंगे। अगर सरकार का प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए आता है तो हम उससे बात करेंगे, लेकिन उसे ठोस समाधान के साथ आना होगा।''
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जरांगे ने मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग को लेकर कई आंदोलन किए हैं। कुनबी एक कृषि समुदाय है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा, ''सरकार को 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर मराठा समुदाय के लोगों को तुरंत जाति प्रमाणपत्र जारी करने चाहिए। समुदाय सरकार को इसके लिए अब और समय नहीं देगा।''

मनोज जरांगे ने की क्या मांगें?
उन्होंने राज्य सरकार से सातारा गजट के आधार पर आरक्षण देने की भी मांग की। उन्होंने महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लेने की मांग की। उन्होंने पिछले आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा देने की भी मांग की।

जरांगे ने मराठा और कुनबी समुदायों के लिए अलग राज्य स्तरीय विभाग बनाने और उसमें तत्काल कर्मचारियों की नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने अन्नासाहेब पाटील आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से दिए गए कर्ज पर ब्याज की राशि जारी करने और लंबित सारथी छात्रवृत्तियां जारी करने की भी मांग की।

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता ने लगाया पक्षपात का आरोप
उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्ति पत्र देने की मांग भी की। व्यवस्था में पक्षपात का आरोप लगाते हुए जरांगे ने कहा, ''यह सरकार नहीं चाहती कि मराठा समुदाय आगे बढ़े। मैंने अपने लोगों से कहा है कि वैध ऐतिहासिक रिकॉर्ड मिल चुके हैं, लेकिन प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार अब भी ऐसे अधिकारियों के पास है, जो समुदाय की प्रगति से ईर्ष्या करते हैं।''

राज्य में न हो जाति सत्यापन की कोई प्रक्रिया
जरांगे ने आगे आरोप लगाया कि अधिकारी वैध दावों को मनमाने तरीके से खारिज कर रहे हैं। उन्होंने जाति सत्यापन समिति को खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा, ''सरकार दस्तावेजी सबूतों को तब भी खारिज करके हमें प्रमाणपत्र देने से रोकने की कोशिश कर रही है, जब वे रिकॉर्ड से मेल खाते हैं। राज्य में जाति सत्यापन की कोई प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। दूसरे राज्यों में तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारी प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार रखते हैं, तो यहां अलग सत्यापन समिति की जरूरत क्यों है? कानून एक समान होना चाहिए।''


जरांगे ने समुदाय के लोगों से आंदोलन का समर्थन करने के लिए बाहर निकलने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जाति प्रमाणपत्र या वैधता दस्तावेज हासिल करने में देरी या अस्वीकृति का सामना करना पड़ रहा है, वे अंतरवाली सराटी में आंदोलन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन में शामिल हों।
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