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13 करोड़ वोट काटने का आरोप: सीईसी पर महाभियोग की मांग; 23 अक्तूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, क्या है पूरा विवाद?
Sun, 18 Oct 2026 10:59 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 18 Oct 2026 10:59 PM IST
'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' नामक संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर 23 अक्तूबर को देशव्यापी मार्च का आह्वान किया है। संगठन का आरोप है कि एसआईआर के जरिए 13.41 करोड़ नागरिकों के वोट काटने की साजिश रची गई है। किसान, मजदूर और नागरिक संगठनों की अगुवाई में होने वाला यह आंदोलन चुनाव सुधारों और आम नागरिकों के मताधिकार की बहाली तक जारी रखने का एलान किया गया है।
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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद गहरा गया है। 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' नाम के नए बने मंच ने आगामी 23 अक्तूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालने का बड़ा एलान किया है। इस संगठन का आरोप है कि एसआईआर की आड़ में देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीन लिए गए हैं। संगठन ने संसद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटाने और उन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
13 करोड़ से अधिक वोट काटे जाने का आरोप
'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' का आरोप है कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मिलीभगत से 13.41 करोड़ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। संगठन का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 जैसे सांविधानिक नियमों में बदलाव किए, जिससे असली मतदाताओं के नाम काट दिए गए। संगठन का कहना है कि चुनाव आयोग ने अपने सांविधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया है, इसलिए संसद जब तक सीईसी पर महाभियोग नहीं चलाती, यह संवैधानिक संकट खत्म नहीं होगा।
यह भी पढ़ें: सीईसी के इस्तीफे की मांग पर लाल हिट का विरोध: सीजेपी के आंदोलन पर उठाए सवाल, क्यों आमने-सामने आए संगठन?
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तिरंगे के साथ तहसील से लेकर राजधानी तक प्रदर्शन
संगठन ने 23 अक्तूबर के आंदोलन को लोकतंत्र की बहाली के लिए जनता का मार्च नाम दिया है। इसके तहत देश के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्यों की राजधानियों और दिल्ली में तिरंगे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन ने कहा कि कि वे इस विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं मांगेंगे। अगर पुलिस या प्रशासन प्रदर्शनकारियों को रोकता है, तो वहीं 'जनता की संसद' लगाकर चुनाव सुधारों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चर्चा की जाएगी।
जंतर-मंतर पर पाबंदी का भी विरोध
14 अक्तूबर को नई दिल्ली के सुरजीत भवन में गठित इस मंच में किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के कई बड़े संगठन शामिल हैं। इस मंच ने दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की सूची से हटाए जाने (डिनोटिफाई करने) के फैसले की भी कड़ी निंदा की है और इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारियों व पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है।
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13 करोड़ से अधिक वोट काटे जाने का आरोप
'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' का आरोप है कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मिलीभगत से 13.41 करोड़ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। संगठन का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 जैसे सांविधानिक नियमों में बदलाव किए, जिससे असली मतदाताओं के नाम काट दिए गए। संगठन का कहना है कि चुनाव आयोग ने अपने सांविधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया है, इसलिए संसद जब तक सीईसी पर महाभियोग नहीं चलाती, यह संवैधानिक संकट खत्म नहीं होगा।
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तिरंगे के साथ तहसील से लेकर राजधानी तक प्रदर्शन
संगठन ने 23 अक्तूबर के आंदोलन को लोकतंत्र की बहाली के लिए जनता का मार्च नाम दिया है। इसके तहत देश के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्यों की राजधानियों और दिल्ली में तिरंगे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन ने कहा कि कि वे इस विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं मांगेंगे। अगर पुलिस या प्रशासन प्रदर्शनकारियों को रोकता है, तो वहीं 'जनता की संसद' लगाकर चुनाव सुधारों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चर्चा की जाएगी।
जंतर-मंतर पर पाबंदी का भी विरोध
14 अक्तूबर को नई दिल्ली के सुरजीत भवन में गठित इस मंच में किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के कई बड़े संगठन शामिल हैं। इस मंच ने दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की सूची से हटाए जाने (डिनोटिफाई करने) के फैसले की भी कड़ी निंदा की है और इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारियों व पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है।