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एसआईआर के समर्थन में आरएसएस: दत्तात्रेय होसबाले का विपक्ष पर निशाना, पूछा- मतदाता सूची सुधारने में गलत क्या?
Thu, 05 Nov 2026 03:38 AM IST
प्रशांत तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 05 Nov 2026 03:38 AM IST
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एसआईआर की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची को गलतियों से मुक्त रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने युवाओं को भड़काने वाली ताकतों से सतर्क रहने, आरक्षण जारी रखने और धार्मिक विवादों को अदालत के जरिए सुलझाने की बात कही।
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दत्तात्रेय होसबाले
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एसआईआर प्रक्रिया का समर्थन करते हुए विपक्ष को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को गलतियों से मुक्त रखने के लिए इसका पुनरीक्षण जरूरी है। साथ ही उन्होंने युवाओं को भड़काने वाली देशी और विदेशी ताकतों को लेकर चिंता जताई। होसबाले ने कहा कि सत्ता बदलने के नाम पर हिंसा और अशांति फैलाना किसी के हित में नहीं है।
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युवाओं को भड़काने की हो रही कोशिश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछे जाने पर होसबाले ने कहा कि देश के अंदर और बाहर कुछ ऐसी ताकतें हैं, जो युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि युवाओं की बात सुनना जरूरी है। उनके मुताबिक, सरकार और समाज दोनों को युवाओं की उम्मीदों और परेशानियों को समझना चाहिए।
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चुनाव के जरिए ही बदलती है सत्ता
होसबाले ने कहा कि युवाओं में कई बार मौजूदा व्यवस्था को लेकर नाराजगी पैदा होती है, लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल करने लगते हैं। आरएसएस ऐसी कोशिशों का विरोध करता है। भारत में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है। सत्ता परिवर्तन के नाम पर हिंसा, अशांति या समाज में भेदभाव फैलाना सही नहीं है। इससे देश और समाज दोनों को नुकसान पहुंचता है।
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एसआईआर का विरोध करने से पहले जांच करें विपक्षी दल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध किए जाने पर होसबाले ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने एजेंडे के हिसाब से काम करने का अधिकार है, लेकिन सिर्फ विरोध के लिए विरोध करना ठीक नहीं है। विपक्षी नेताओं को पहले यह देखना चाहिए कि एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों में कितनी सच्चाई है। इस प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को सही करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। कई ऐसे नाम हटाए गए हैं, जिन लोगों की मौत हो चुकी थी या जो दो अलग-अलग जगहों पर मतदाता के तौर पर दर्ज थे।
गैर-नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में होना गलत
होसबाले ने कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची में शामिल होना देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। देश में समय-समय पर मतदाता सूचियों की जांच और सुधार की प्रक्रिया होती रही है। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर वह बंगलूरू में रहते हैं, तो उनके पैतृक गांव की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह इस पद पर थे, तब बिहार में भी मतदाता सूचियों में सुधार किया गया था। उस समय किसी ने इसे गलत नहीं बताया था।
ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि पर नया आंदोलन नहीं करेगा आरएसएस
काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर होसबाले ने कहा कि हर मामले को सुलझाने का तरीका एक जैसा नहीं हो सकता। अगर कोई मामला अदालत में चल रहा है, तो उसका फैसला अदालत के जरिए ही होना चाहिए। हर मुद्दे पर आंदोलन शुरू करने की जरूरत नहीं है। हिंदू समाज के कई लोग पहले से ही इन विवादों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में आरएसएस फिलहाल इन मुद्दों पर कोई नया आंदोलन शुरू करने के बारे में नहीं सोच रहा है।
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भेदभाव रहने तक जारी रहना चाहिए आरक्षण
जाति के आधार पर मिलने वाले आरक्षण पर होसबाले ने कहा कि यह ऐतिहासिक और सामाजिक जरूरत है। जब तक समाज में जातिगत भेदभाव, पिछड़ापन और असमानता बनी हुई है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक दलों को वोट बैंक की राजनीति नहीं करनी चाहिए।