J&K: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान, भाजपा ने बताया बड़ी कूटनीतिक जीत
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
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अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे पर जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताए जाने और पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपा ने इसे जहां भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सफलता बताया, वहीं कांग्रेस और पीडीपी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। अपनी पार्टी ने गोर के बयान का स्वागत किया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने पर सधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी अन्य के दखल का कोई औचित्य नहीं है। वहीं, गठबंधन सहयोगी कांग्रेस द्वारा तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को केंद्र की विफलता बताए जाने पर उमर ने किसी राजनीतिक वाकयुद्ध में पड़ने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र है।
भाजपा : पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा पर करारा तमाचा
भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि श्रीनगर की जमीन से आया यह बयान कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान की दशकों पुरानी कोशिशों और उसके प्रोपेगैंडा पर करारा तमाचा है। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि दुनिया जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की वास्तविकता को स्वीकार कर रही है।
कांग्रेस : तीसरे पक्ष की गुंजाइश बनना केंद्र की नाकामी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि शिमला समझौते के तहत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप की स्थिति बनना केंद्र सरकार की कमजोर नीतियों की नाकामी को दर्शाता है।
अमेरिका को गंभीरता से लेने की
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अमेरिकी राजदूत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके वैश्विक हस्तक्षेपों ने केवल तबाही फैलाई है। उन्होंने 2019 के बाद विदेशी राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर दौरों को महज औपचारिक और प्रायोजित करार दिया। यह गौर करने वाली बात है कि महबूबा ने ही बुधवार को पहले दिन गोर से पर्यटन पाबंदियों में ढील की वकालत की थी। लेकिन अगले ही दिन उनका सुर बदल गया।
बुखारी ने किया बयान का स्वागत
अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बयान दर्शाता है कि वॉशिंगटन ने जम्मू-कश्मीर पर भारत की वास्तविक स्थिति की औपचारिक पुष्टि की है। बुखारी ने उम्मीद जताई कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी और जम्मू-कश्मीर को देश के एक मजबूत और बराबर के हिस्से के रूप में उसका वाजिब हक और प्राथमिकताएं मिलेंगी।
कश्मीर को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं : हांडू
सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता राकेश हांडू ने कहा कि कश्मीर का भारत में विलय एक ऐतिहासिक और तयशुदा सच है, जिसे किसी विदेशी राजनयिक की मान्यता या प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सात लाख विस्थापित कश्मीरी पंडितों के सम्मानजनक पुनर्वास के बिना कश्मीर अधूरा है। हांडू ने कश्मीर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मामलों में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की किसी भी गुंजाइश को केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता करार दिया।