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Udhampur News: दलहन के कम उत्पादन वाले गांवों को चिन्हित करने के निर्देश
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उधमपुर। जिले में दलहन (दालों) के उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से जिला विकास आयुक्त मिंगा शेरपा की अध्यक्षता में जिला स्टीयरिंग कमेटी की पहली बैठक आयोजित की गई। यह बैठक दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन के तहत आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में दालों की खेती को मजबूती प्रदान करना और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना है।
बैठक के दौरान मुख्य कृषि अधिकारी ने जिले में दलहन की खेती, प्रति हेक्टेयर उपज और वर्तमान उत्पादकता के आंकड़ों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में विभिन्न कृषि ब्लॉकों के बीच उत्पादकता में बड़े अंतर की बात सामने आई। इस पर डीडीसी ने चिंता व्यक्त करते हुए कृषि विभाग को निर्देश दिए कि कम उत्पादकता वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने ऐसे गांवों को ''''टेस्ट विलेज'''' या ''''मॉडल विलेज'''' के रूप में चिन्हित करने के निर्देश दिए ताकि वहां आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का गहनता से क्रियान्वयन किया जा सके।
दलहन उत्पादन का सटीक डेटा तैयार करने के लिए डीडीसी ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे जिलेभर में दालों की खेती करने वाले किसानों की व्यापक जनगणना (सेंसस) करें। इसमें खेती का क्षेत्रफल, वर्तमान कृषि पद्धतियां और किसानों की जरूरतों से संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हेल्थ कार्ड) योजना के महत्व पर जोर देते हुए मिट्टी के पोषक तत्वों की नियमित जांच और संतुलित उर्वरक प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में मुख्य योजना अधिकारी उत्तम सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, नाबार्ड के डीडीएम और लीड बैंक अधिकारी समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक के दौरान मुख्य कृषि अधिकारी ने जिले में दलहन की खेती, प्रति हेक्टेयर उपज और वर्तमान उत्पादकता के आंकड़ों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में विभिन्न कृषि ब्लॉकों के बीच उत्पादकता में बड़े अंतर की बात सामने आई। इस पर डीडीसी ने चिंता व्यक्त करते हुए कृषि विभाग को निर्देश दिए कि कम उत्पादकता वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने ऐसे गांवों को ''''टेस्ट विलेज'''' या ''''मॉडल विलेज'''' के रूप में चिन्हित करने के निर्देश दिए ताकि वहां आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का गहनता से क्रियान्वयन किया जा सके।
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दलहन उत्पादन का सटीक डेटा तैयार करने के लिए डीडीसी ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे जिलेभर में दालों की खेती करने वाले किसानों की व्यापक जनगणना (सेंसस) करें। इसमें खेती का क्षेत्रफल, वर्तमान कृषि पद्धतियां और किसानों की जरूरतों से संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हेल्थ कार्ड) योजना के महत्व पर जोर देते हुए मिट्टी के पोषक तत्वों की नियमित जांच और संतुलित उर्वरक प्रबंधन सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में मुख्य योजना अधिकारी उत्तम सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, नाबार्ड के डीडीएम और लीड बैंक अधिकारी समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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