{"_id":"6a88c3b56d1e809c24098f22","slug":"agriculture-news-jammu-news-c-10-jam1005-992593-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: बारिश, भूस्खलन से 3,500 हेक्टेयर में फसल तबाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: बारिश, भूस्खलन से 3,500 हेक्टेयर में फसल तबाह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से खेतों को भारी नुकसान हुआ है। जम्मू संभाग में अब तक 3,500 हेक्टेयर भूमि में खेती तबाह हुई है। मौजूदा समय में धान और मक्की की खेती है। मक्की को 40 करोड़ तो धान की फसल को 90 करोड़ रुपये के आसपास नुकसान हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहती है तो नुकसान बढ़ सकता है।
इस साल एक जुलाई से लेकर 18 जुलाई तक नुकसान 1800 हेक्टेयर में हुआ था। 19 जुलाई से लेकर 19 अगस्त तक नुकसान 3500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यह खुलासा कृषि विभाग की ओर से निदेशालय को रिपोर्ट गई रिपोर्ट से हुआ है। किश्तवाड़ और रामबन जिले में शत-प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। यहां धान, मक्की, सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है। पुंछ, कठुआ और सांबा में औसतन 50 से 80 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है।
किश्तवाड़, राजोरी, पुंछ और डोडा में बादल फटे हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन भी हुआ है। इससे भी खेती को नुकसान पहुंचा है। मैदानी इलाकों में बारिश का पानी रुकने से भी पैदावार प्रभावित हुई है। संभाग मेें करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में खेती की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस साल एक जुलाई से लेकर 18 जुलाई तक नुकसान 1800 हेक्टेयर में हुआ था। 19 जुलाई से लेकर 19 अगस्त तक नुकसान 3500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यह खुलासा कृषि विभाग की ओर से निदेशालय को रिपोर्ट गई रिपोर्ट से हुआ है। किश्तवाड़ और रामबन जिले में शत-प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। यहां धान, मक्की, सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है। पुंछ, कठुआ और सांबा में औसतन 50 से 80 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है।
विज्ञापन
किश्तवाड़, राजोरी, पुंछ और डोडा में बादल फटे हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन भी हुआ है। इससे भी खेती को नुकसान पहुंचा है। मैदानी इलाकों में बारिश का पानी रुकने से भी पैदावार प्रभावित हुई है। संभाग मेें करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में खेती की जाती है।
विज्ञापन