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लेह: लद्दाख के सातों जिलों में अब होगी हिल काउंसिल, एलजी की मंजूरी; चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू होने के हालात

Fri, 04 Sep 2026 03:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 04 Sep 2026 03:32 AM IST
सार
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र के फैसले के बाद अब सभी सात जिलों में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी।

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All seven districts of Ladakh will now have Hill Councils; LG grants approval.
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लद्दाख में स्थानीय शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से वीरवार को बड़ा बदलाव हुआ। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र के फैसले के बाद अब सभी सात जिलों में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही पांच नए जिलों शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास में भी निर्वाचित हिल काउंसिल के गठन का रास्ता साफ हो गया है।

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लद्दाख में अब लेह, कारगिल, शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास, सभी सात जिलों में अलग-अलग स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदें होंगी। अभी तक निर्वाचित एलएएचडीसी केवल लेह और कारगिल में थीं। नए जिलों के गठन के बाद भी वहां के लोगों के लिए निर्वाचित परिषद का ढांचा उपलब्ध नहीं था। अब यह व्यवस्था पांचों नए जिलों तक विस्तारित होगी।
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उपराज्यपाल ने इस फैसले को लद्दाख के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय शासन मजबूत होगा, प्रशासन का विकेंद्रीकरण होगा और विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे जमीनी स्तर पर स्थानीय निकायों को वास्तविक स्वायत्तता देने और लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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पांच नए जिलों के बाद बढ़ा दायरा
लद्दाख में इस साल अप्रैल में पांच नए जिलों का औपचारिक गठन किया गया था। इनमें शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। इससे केंद्रशासित प्रदेश में जिलों की संख्या दो से बढ़कर सात हो गई। हालांकि, निर्वाचित हिल काउंसिल की व्यवस्था अभी तक केवल लेह और कारगिल तक सीमित थी। इसके बाद 13 जुलाई को केंद्र ने सभी सात जिलों तक एलएएचडीसी व्यवस्था का विस्तार करने का निर्णय लिया था। अब उपराज्यपाल की मंजूरी के साथ इस निर्णय को प्रशासनिक रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

यह होगा बदलाव एलएएचडीसी व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यह होगा कि दूरदराज के इलाकों में विकास और स्थानीय जरूरतों से जुड़े फैसलों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ेगी। हिल काउंसिल को स्थानीय विकास योजनाओं, प्राथमिकताओं और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े कई अधिकार हासिल हैं। अभी तक नए जिलों के लोगों को जिला प्रशासन के स्तर पर अपनी मांगें और विकास संबंधी प्राथमिकताएं उठानी पड़ती थीं। अब उनके पास अपने जिले के लिए निर्वाचित परिषद होगी, जो स्थानीय मुद्दों को संस्थागत रूप से उठाने और विकास योजनाओं को प्राथमिकता देने का माध्यम बनेगी। विशेष रूप से नुब्रा, चांगथांग और जांस्कर जैसे दूरदराज और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में भौगोलिक दूरी और कठिन परिस्थितियों के कारण प्रशासन तक पहुंच हमेशा चुनौती रही है।

अब चुनाव की तैयारी
अधिसूचना जारी होने के बाद अगला बड़ा कदम इन परिषदों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करना होगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सातों परिषदों के चुनाव उचित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कराए जाएंगे। इसके लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और अन्य जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसका मतलब यह है कि आज की मंजूरी के साथ परिषदें तत्काल निर्वाचित नहीं हो जाएंगी, बल्कि यह चुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण संवैधानिक-प्रशासनिक कदम है।
लेह-कारगिल के बाद अब पूरे लद्दाख में एक जैसा ढांचा

एलएएचडीसी की शुरुआत लद्दाख में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से हुई थी। लेह में परिषद 1995 से और कारगिल में 2003 से काम कर रही है। अब पहली बार इसी तरह का निर्वाचित स्थानीय शासन मॉडल पूरे लद्दाख के सातों जिलों में लागू होगा। लद्दाख में विधानसभा नहीं है। ऐसे में हिल काउंसिल का महत्व और बढ़ जाता है। ये परिषदें स्थानीय स्तर पर लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के साथ विकास संबंधी निर्णयों में उनकी भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं।


स्वायत्तता की मांग के बीच फैसला महत्वपूर्ण
लद्दाख में पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से स्थानीय लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार की सुरक्षा तथा अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग उठती रही है। ऐसे समय में सातों जिलों में एलएएचडीसी का विस्तार केंद्रशासित प्रदेश में स्थानीय शासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आज की मंजूरी के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि पांच नए जिलों में परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया कब पूरी होती है और पहली बार वहां के लोग अपनी-अपनी हिल काउंसिल के लिए प्रतिनिधि कब चुनते हैं।

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