ये नदी नाले पर्वत पठार
यही है भारत मां का संसार
ये पेड़ पौधों का संसार
ये ही हैं भारत मां का श्रृंगार
ये समंदर ये खेत खलिहान
यही है हमारा हिंदुस्तान
इसी में छुपे हैं भगवान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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