आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को सँवारोगे तो याद आऊँगा
रंग कैसा हो ये सोचोगे तो याद आऊँगा
जब नया सूट ख़रीदोगे तो याद आऊँगा
भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद...और पढ़ें
सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो
ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
फ़िलहाल इस से बचने का है एक रास्ता
वो ये कि इस से बच के रहो फ...और पढ़ें
बिछड़े अपने, रूह में मेरी समाते हैं
चाह कर भी हम भुला उनको न पाते हैं
आज तक भी हम बिछड़ कर उनसे ज़िंदा है
जिस्म का क्यूँ बोझ हम अब भी उठाते हैं
ख़ामुशी की इस ज़ुबाँ में यादें हैं उनकी
यादों के ग़म र...और पढ़ें
यार क्यूँ हम भी प्यार कर बैठे
दिल तुम्हीं पर निसार कर बैठे
कुछ न हासिल हुआ मोहब्बत में
दिल ही अपना फ़िगार कर बैठे
तुम पे कितना यकीं था हमको तो
झूठ पर ए'तिबार कर बैठे
तुम न अहद-ए-व...और पढ़ें
दिल की गली में चाँद निकलता रहता है
एक दिया उम्मीद का जलता रहता है
जैसे जैसे यादों कि लौ बढ़ती है
वैसे वैसे जिस्म पिघलता रहता है
सरगोशी को कान तरसते रहते हैं
सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है...और पढ़ें
न धूप की तेजी
न अंधेरे का साया
मैं वो रंग हूँ
जो सबके मन को भाया
शाम भी मुस्कुराकर कहती है
न दिन हूँ न रात हूँ
मैं सबसे खास हूँ
मैं शाम हूँ
न मैं अंधेरा हूँ
न मैं उजाला हू...और पढ़ें
हमें आज के ज़माने में भी किरदार-पेशी की क्या ज़रूरत है भला...
हमने तो भरी जवानी में भी अपने जिस्म को उसकी ही ज़रूरत से महरूम रखा...
क्योंकि उस पर हक़ उनका था जिन्होंने हमारी ज़ुल्फ़ों को तक नहीं छुआ थाऔर पढ़ें
कुछ भी कहने से हम कतरा रहे हैं
वो बेख़ौफ़ होकर कहे जा रहे हैं।
गर्दिश में जिनको दिया था सहारा
वही हाथ छोड़े चले जा रहे हैं।
वफाओं की जिनसे थी उम्मीद हमको
वो गम का सियापा दिए जा रहे हैं।
म...और पढ़ें
हर कोई चाहता है तेरे दिल में रहना
पर तू, हर किसी को कहाँ नसीब होता है।।
जैसे हर गुलसिता चाहता है एक गुलाब
पर उसे गुलाब कहाँ नसीब होता है
दिल चाहता है तेरी मुस्कुराहट की वजह बनू
पर तेरी मुस्कुराहट के पीछे तो, एक राज...और पढ़ें
भाषा को सौंदर्य बढ़ावन
प्राण सींचित करके लिखू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,समर्पण भाव लक लिखू।।
सागर ला गहराई मांगू।
बादलों ला ऊंचाई मांगू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,बहारों ला सौंदर्य मांग...और पढ़ें
बाद में करना है आराम
तो आज करो तुम अपना काम।
रोजगार पाना है कल
तो आज परिश्रम करो जीभर।
पानी है अपनी पहचान
तो लगन से करो उसके लिए काम।
आज कर लिए तुम आराम
तो बाद मे होगा जीवन हराम...और पढ़ें
जिसे भी चाहो उसे सताना अच्छा लगता हैं।।
गलियों गलियों एक दीवाना अच्छा लगता है।।
दिल की इस दुनियाँ में भी कुछ तो बेहतर है,,
तितली बनके फूल पकड़ना अच्छा लगता है।।
छूने से गर मैला हो तन तो फिर क्या है बात,,
आंखों के बस...और पढ़ें
चाहता हूं मैं स्वदेश पर सब कुछ लुटाऊं
स्वदेश के लिए कुछ तो काम मैं आऊं
स्वदेश को और सुंदर मैं बनाऊं
स्वदेश को प्रथम स्थान पर मैं लाऊं
पर अकेले तो होगा नहीं, तो एकता लाऊं
और स्वदेश को सुंदरतम मैं बनाऊं
स्वदेश...और पढ़ें
फ़न और हुनर तो बस एक यही है सीखने का
कि क्या सीखना है और क्या नहीं है सीखने का
-एन. आर. कस्वाँ...और पढ़ें
करूं भी अब क्या हमें बर्बाद होना पड़ेगा मिटा कर अरमां सारे जश्न ए बर्बादी अब तो हमें मानना पड़ेगा
मिल कर तुमसे दिल से जुदा ना हो पाएं हम कभी होकर मायूस अपनी जिंदगी से दर्द और बढ़ाना पड़ेगा
मत जाना तुम मेरी नादानियों पर किया यकीं जिस पर...और पढ़ें
मधुशाला का नज़ारा क्या खूब लगता है,
सुबह जो छिपा रहे, शाम को दिखता है।
दिन ढले तो महफ़िल का रंग निराला है,
हर गली में खुलती एक छोटी मधुशाला है!
इंसान को दीवाना बनाती ये बोतलें,
खुद तो नहीं नाचतीं, सबको नचाती...और पढ़ें
बेबसी अपनी जगह है आशिक़ी अपनी जगह।।
याद सब अपनी जगह है जिंदगी अपनी जगह।।
ख़्वाब की आधी अधूरी अब सूरते क्या देखते ,,
ख़्वाहिशें अपनी जगह है चाँदनी अपनी जगह।।
रात के इस पहर से तुम रात के उस पहर तक,,
दरिया ये अपनी जगह ह...और पढ़ें
इश्क में झूठ बेईमानी धोखा और हत्या इन सबको तू किनारे रख,
तू है बड़ा मासूम अपने इस मासूमियत को भी दूर तू बेचारे रखें,
सचमुच जिस इश्क के नाम पर जमाना दीवानों को छोड़ देता है बेसहारा,
दीवाने जीते भी हैं और मरते भी हैं खुद को उसी इश्...और पढ़ें
कभी खुशी तो कभी गम
कभी आशा तो कभी निराशा
कभी सुख तो कभी दुःख
सब समय का खेल।
कभी दिन कभी रात
कभी सर्द तो कभी गर्म
कभी वर्षा तो कभी सूखा
सब समय का खेल है।
कभी तेज़ तो कभी धीरे...और पढ़ें
पशु पक्षी के झुंड से, गाँव, देश, परिवार।
एक स्वार्थ की डोर से, आज जुड़े हैं यार।
-पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'...और पढ़ें