झेलने पड़ते हैं अपनों के भी प्रहार,
परिवार में उठाते सब तरह का भार।
एक दिन सब चले जाते अपनी राह,
वक्त की इन पर पड़ जाती है मार।
फिर रह जाएं अकेले सभी नर नार,
तभी तो चलन में हैं एकल परिवार।
-चंद्र दत्त शर्मा
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