आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीवन अपने सारे पत्ते नहीं खोलता

                
                                                         
                            जीवन अपने सारे पत्ते नहीं खोलता
                                                                 
                            

हम अपने भविष्य की कितनी चिंता करते हैं,
हर आने वाले कल को
आज ही जान लेना चाहते हैं।

मगर जीवन अपने सारे पत्ते
एक साथ नहीं खोलता,
वह तो बस एक-एक कदम
हमारे सामने रखता है।

जीवन के सभी निर्णय
हमारे नहीं होते,
कुछ प्रकृति के होते हैं,
कुछ समय के।

फिर भी हम बेचैन रहते हैं
उस कल के लिए
जो अभी आया ही नहीं।

लेकिन जिन पुरानी पीड़ाओं से
हम निकल चुके हैं,
उनसे भी तो कभी
हमें डर लगता था।

जब उनसे गुज़र आए हैं,
तो भविष्य की परेशानियों से भी
गुज़र जाएंगे।

— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर