तुझको देखा जो हमने, तो ज़माना ही जी लिया।
दिल बोलता रहा पर ,होठों को सी लिया।।
शराब तो झूठ का पानी ही रह गई।
वो कातिलाना था, जो तेरी आंखों से पी लिया।।
रिश्ते- नाते - यार -दोस्त,पीछे ही रह गए।
हमने तेरी चाह में, खुद को ही खो लिया।।
प्यार इश्क और मोहब्बत,कुछ झूठ तो नहीं।
जो कलयुग में भी श्याम, मीरा का हो लिया।।
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