बेबसी अपनी जगह है आशिक़ी अपनी जगह।।
याद सब अपनी जगह है जिंदगी अपनी जगह।।
ख़्वाब की आधी अधूरी अब सूरते क्या देखते ,,
ख़्वाहिशें अपनी जगह है चाँदनी अपनी जगह।।
रात के इस पहर से तुम रात के उस पहर तक,,
दरिया ये अपनी जगह है तिश्नगी अपनी जगह।।
इक निशानी इश्क़ की भी कब तलक जिंदा रखे,,
अश्क़ों की अपनी जगह है बंदगी अपनी जगह।।
दुनियाँ की इस भीड़ में जो खो गया सो खो गया,,
दूरियाँ अपनी जगह है परिंदगी अपनी जगह।।
यां किसी को क्या सुनाएं ग़म की अपनी दास्तां,,
दोस्ती अपनी जगह है दुश्मनी अपनी जगह।।
एक मुद्दत हो गई है साहिल को देखें मुझको देव,,
ये सफ़र अपनी जगह है दिल्लगी अपनी जगह।।
-सुनील देव
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