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अहमद सलमान: ये हाथ मैं तिरे हाथों में रख के भूल गया

ahmad salman famous ghazal ye hath main tere hath mein rakh ke bhool gaya
                
                                                         
                            


ये हाथ मैं तिरे हाथों में रख के भूल गया
कि इक किताब किताबों में रख के भूल गया

नुजूमियों ने बताया कि कातिब-ए-तक़दीर
मिरा नसीब सितारों में रख के भूल गया

हज़ार चेहरे जो बदले तो खो गया चेहरा
मैं अपना जिस्म लिबासों में रख के भूल गया

न जाने कौन से प्याले में आब-ए-कौसर था
यहीं कहीं मैं शराबों में रख के भूल गया

है याद आज भी दफ़्तर का एक इक काग़ज़
पर अपने ख़्वाब दराज़ों में रख के भूल गया

एक दिन पहले

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