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केजीएमयू में सुविधाएं बदहाल: सर्जरी के लिए तीन माह की तारीख, धूप में स्ट्रेचर पर पड़ी रही महिला, एक पड़ताल

Fri, 21 Aug 2026 11:24 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 21 Aug 2026 11:24 AM IST
सार
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भारी-भरकम बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर वाले केजीएमयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों को चौखट पर ही धक्के खाने पड़ रहे हैं। ये अमर उजाला की पड़ताल के दौरान सामने आई तस्वीरों से साफ नजर आया।

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Poor facilities at KGMU: Three-month wait for surgery, woman left lying on a stretcher in the sun
केजीएमयू लखनऊ - फोटो : amar ujala

विस्तार

बेहतर इलाज की उम्मीद में दूर दराज से मरीज केजीएमयू पहुंचते हैं। उन्हें भरोसा होता है कि गंभीर स्थिति में तत्काल उपचार मिलेगा। हालांकि बृहस्पतिवार को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी के बाहर की तस्वीर इस उम्मीद से अलग नजर आई।

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अमर उजाला की पड़ताल में कई मरीज इलाज, जांच और भर्ती के लिए जद्दोजहद करते दिखे। कोई स्ट्रेचर पर या एंबुलेंस में इलाज व जांच के लिए घंटों इंतजार करता मिला तो कोई भर्ती होने के लिए जूझता नजर आया। गंभीर मरीजों को व्हीलचेयर तक के लिए भटकना पड़ा। एक मरीज को हालत गंभीर होने के बावजूद सर्जरी के लिए तीन महीने बाद नवंबर की तारीख मिली।
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कुल मिलाकर भारी-भरकम बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर वाले केजीएमयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में मरीजों को चौखट पर ही धक्के खाने पड़ रहे हैं। यहां मरीजों और तीमारदारों को तत्काल इलाज, भर्ती और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह अमर उजाला की पड़ताल के दौरान सामने आई तस्वीरों से साफ नजर आया।

केस- 1: हालत गंभीर, सर्जरी के लिए तीन माह की तारीख
कौशांबी से आईं 70 वर्षीय बेला देवी दर्द से कराह रही थीं। उनकी पित्त की थैली में पथरी है। इससे बाइल डक्ट में सूजन और रुकावट के साथ संक्रमण लीवर तक पहुंच गया है। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने जल्द सर्जरी की जरूरत बताई थी। इसके बावजूद उन्हें नवंबर की तारीख दी गई। यानी सर्जरी के लिए करीब तीन महीने इंतजार करना था। मरीज की हालत बिगड़ती देख परिजन परेशान रहे। बाद में वे मायूस होकर दूसरी जगह इलाज कराने के लिए मरीज को लेकर चले गए।

केस - 2: एंबुलेंस में तड़पते रहे, भर्ती के लिए जद्दोजहद

अंबेडकरनगर निवासी 60 वर्षीय मोहम्मद रईस किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले लोहिया संस्थान में भर्ती थे। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें एंबुलेंस से केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। भर्ती के लिए काफी देर तक जद्दोजहद चलती रही। इस दौरान रईस एंबुलेंस में ही तड़पते रहे। परिजन समय पर भर्ती कर इलाज शुरू करने का आग्रह करते दिखे। तेज धूप में एंबुलेंस के भीतर मरीज का इंतजार करना ट्रॉमा सेंटर का आम दृश्य बन चुका है।

केस - 3: नहीं मिली व्हीलचेयर, धूप में स्ट्रेचर पर पड़ी रहीं शिव देवी
बुद्धेश्वर से आईं शिव देवी का केजीएमयू में डायबिटिक फुट का इलाज चल रहा है। उनके दाहिने पैर में गंभीर सूजन है और पूरा पैर पट्टी से बंधा था। कुछ जांचों के लिए उन्हें ट्रॉमा इमरजेंसी भेजा गया लेकिन अंदर ले जाने के लिए व्हीलचेयर नहीं मिली। परिजन काफी देर तक इधर-उधर भटकते रहे। इस दौरान शिव देवी दोपहर की तेज धूप में स्ट्रेचर पर ही पड़ी रहीं। उनकी हालत इतनी खराब थी कि वह लगभग अचेत नजर आईं। परिजन बार-बार व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की गुहार लगाते रहे लेकिन तत्काल मदद नहीं मिल सकी।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि जहां तक सर्जरी के लिए तीन महीने की वेटिंग की बात है तो केजीएमयू में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। डिमांड और सप्लाई में गैप की वजह से मरीजों को सर्जरी आदि के लिए बाद की तरीखें देनी पड़ रही हैं। सभी ओटी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। मरीज को व्हीलचेयर न मिलने और काफी देर तक स्ट्रेचर पर रहने की जांच कराई जाएगी।

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