फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: High Court's major ruling on dowry death case; states general allegations are insufficient; convictions of

यूपी: दहेज हत्या के अनुमान पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं; तीन आरोपियों की सजा रद

Sat, 22 Aug 2026 08:01 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 22 Aug 2026 08:01 AM IST
सार
Register For Event

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि दहेज हत्या का कानूनी अनुमान तभी लगाया जा सकता है, जब मौत से पहले दहेज मांग को लेकर क्रूरता साबित हो। सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं हैं। करीब 30 वर्ष पुराने मामले में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने तीन आरोपियों की सजा रद कर उन्हें बरी किया।

विज्ञापन
UP: High Court's major ruling on dowry death case; states general allegations are insufficient; convictions of
court - फोटो : X/fazenda_dom_pedro

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दहेज हत्या के मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के तहत दहेज हत्या का अनुमान तभी लागू हो सकता है, जब अभियोजन यह साबित करे कि महिला की मौत से ठीक पहले उसे दहेज की मांग को लेकर क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। केवल दहेज उत्पीड़न का सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने करीब 30 वर्ष पुराने मामले में तीन आरोपियों की सजा रद कर उन्हें बरी कर दिया।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति मनोज बजाज ने शिव नारायण उर्फ सूर्य नारायण, जय नारायण और पटेश्वर की अपील स्वीकार करते हुए फैजाबाद(अब अयोध्या) के अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय द्वारा 30 अप्रैल 1996 को सुनाई गई दोषसिद्धि और 13 मई 1996 को सुनाई गई सजा निरस्त कर दी। 

विज्ञापन

कुएं से बरामद हुआ

ट्रायल कोर्ट ने तीनों को धारा 498-ए, 304-बी, 201 और 120-बी आइपीसी के तहत दोषी ठहराया था। मामला उर्मिला की वर्ष 1991 में हुई मौत से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार 19/20 सितंबर 1991 की रात उर्मिला लापता हुई थी। 21 सितंबर को उसका शव ससुराल के पास स्थित कुएं से बरामद हुआ। आरोप लगाया गया था कि दहेज के लिए प्रताड़ित करने के बाद उसकी हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने पाया कि शव बरामद होने के समय मृतका के पिता और अन्य करीबी रिश्तेदारों ने कुएं में डूबने की आशंका जताई थी। उस समय हत्या या दहेज हत्या का आरोप नहीं लगाया गया था। घटना के 12 दिन बाद दो अक्टूबर 1991 को एफआइआर दर्ज की गई, लेकिन इस देरी का पर्याप्त स्पष्टीकरण अभियोजन नहीं दे सका।





 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed