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अजब-गजब एमपी: ई-अटेंडेंस के चक्कर में ट्यूब पर बैठकर नदी पार कर रहे शिक्षक, जान हथेली पर रखकर पहुंच रहे स्कूल

Tue, 25 Aug 2026 11:25 AM IST
भिन्ड ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड Published by: भिन्ड ब्यूरो Updated Tue, 25 Aug 2026 11:25 AM IST
सार
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भिंड के ग्राम पंचायत बबेड़ी में बारिश के बाद बरसाती खार में पानी भरने से नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा गांव का संपर्क मार्ग बंद हो जाता है। ऐसे में शिक्षक और ग्रामीण ट्यूब के सहारे पानी पार करने को मजबूर हैं। ई-अटेंडेंस के कारण शिक्षकों को तय समय पर स्कूल पहुंचना पड़ता है। 

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MP for E-Attendance Teachers Risk Lives Navigating Flooded River on Tubes in Bhind
भिंड में ई-अटेंडेंस लगाने के लिए शिक्षक ट्यूब के सहारे पानी पार करने को मजबूर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भिंड जिले के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत सामने आई है। ग्राम पंचायत बबेड़ी में बारिश के बाद बरसाती खार में पानी भरने से नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा गांव का संपर्क मार्ग बंद हो जाता है। ऐसे में स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक और ग्रामीण ट्यूब के सहारे पानी पार करने को मजबूर हैं।
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लंबे समय से बरकरार है समस्या
बताया जा रहा है कि बारिश के मौसम में करीब चार महीने तक यहां ऐसी स्थिति बनी रहती है। पानी बढ़ने के बाद पैदल या बाइक से निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यहां पुलिया या सुरक्षित रास्ते की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
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ई-अटेंडेंस ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी
इसी बीच सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था ने शिक्षकों की मुश्किल और बढ़ा दी है। शिक्षकों को निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचकर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होती है। ऐसे में रास्ता बंद होने के बावजूद शिक्षक स्कूल पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। सामने आई तस्वीरों में नदरौली प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक राजेश भारती ट्यूब के सहारे बरसाती खार पार करते नजर आ रहे हैं। पानी के तेज बहाव के बीच ट्यूब पर बैठकर दूसरी तरफ जाना किसी खतरे से कम नहीं है। यही रास्ता ग्रामीणों के लिए भी इस्तेमाल होता है।
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बारिश में विद्यार्थियों के सामने भी संकट
मामला सिर्फ शिक्षकों की परेशानी तक सीमित नहीं है। बारिश के दिनों में गांव का संपर्क टूटने से विद्यार्थियों के सामने भी स्कूल पहुंचने की चुनौती खड़ी हो जाती है। अगर बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी तरह पानी पार करना पड़े, तो उनकी सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

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ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना हर साल बारिश के मौसम में करना पड़ता है। उनका सवाल है कि जब स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित सड़क या पुलिया ही नहीं है, तो केवल ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था से शिक्षा व्यवस्था कैसे सुचारु रह सकती है?

प्रशासन के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल
बबेड़ी की ये तस्वीरें प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। क्या ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले उन ग्रामीण इलाकों की जमीनी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है, जहां शिक्षक और बच्चे आज भी बुनियादी रास्ते के लिए संघर्ष कर रहे हैं? अब ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस बरसाती खार पर स्थायी पुलिया या सुरक्षित रास्ते का निर्माण कराए, ताकि बारिश के दिनों में शिक्षकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पानी पार न करना पड़े।
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