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दमोह में अंतिम यात्रा भी बनी इम्तिहान: मुक्तिधाम जाने के लिए कमरभर पानी में उतरी अर्थी, छह घंटे तक रखा रहा शव
Fri, 21 Aug 2026 11:06 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 11:06 AM IST
दमोह के सिंग्रामपुर स्थित टगरा मोहल्ला में नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए भी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। हाल ही में एक व्यक्ति की मौत के बाद तेज बहाव के कारण शव करीब 6 घंटे तक घर में रखा रहा। पानी कम होने के बाद ग्रामीण कमर तक पानी में नदी पार कर शव को मुक्तिधाम ले गए।
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दमोह में पुल न होने से कमरभर पानी से गुजरी अर्थी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दमोह जिले के सिंग्रामपुर के टगरा मोहल्ला में नदी पर पुल न होने की वजह से ग्रामीणों को अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। बरसात में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि शव को घंटों घर में रखना मजबूरी बन गया है।
छह घंटे घर में रखा रहा शव, फिर कमरभर पानी में निकली अर्थी
हाल ही में चौधरी परिवार में एक व्यक्ति की मौत हुई। नदी में तेज बहाव के चलते परिजन मुक्तिधाम तक नहीं पहुंच सके। मजबूरन शव को करीब 6 घंटे तक घर में रखना पड़ा। जब पानी का स्तर थोड़ा कम हुआ, तब ग्रामीणों ने कमर तक पानी में नदी पार कर शव को मुक्तिधाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार किया।
तीन साल से धूल फांक रही 40 लाख की फाइल
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है। पिछले कई वर्षों से पुल की मांग की जा रही है। करीब 3 साल पहले आरईएस विभाग ने मौके का निरीक्षण कर लगभग 40 लाख रुपये की लागत से पुल बनाने की फाइल तैयार की थी। लेकिन फाइल बनने के बाद से अब तक एक ईंट भी नहीं लगी।
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बारिश में बन जाती है मौत की नदी
स्थानीय जन कल्याण चौधरी, बबलू चौधरी, राजकुमार बंसल, छोटू बंसल, आशा, महेश, संजय समेत सभी ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी नदी पार करना मुश्किल है। बारिश में स्थिति और विकट हो जाती है। ऐसे में किसी की मौत हो जाए तो परिजनों को दोहरी पीड़ा झेलनी पड़ती है- एक अपनों को खोने का गम और दूसरा शव को ले जाने की जंग।
ये भी पढ़ें- शहडोल में बारिश का तांडव: 10 घंटे से लगातार तेज बरसात, बनास नदी उफान पर; पुल के ऊपर बहा पानी, मार्ग बंद
आक्रोश में ग्रामीण, प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और आरईएस विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने पुराने आवेदन और जांच रिपोर्ट के आधार पर टगरा मोहल्ला स्थित मुक्तिधाम तक तुरंत पुल निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो अगली बार शव सड़क पर रखना पड़ेगा।
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छह घंटे घर में रखा रहा शव, फिर कमरभर पानी में निकली अर्थी
हाल ही में चौधरी परिवार में एक व्यक्ति की मौत हुई। नदी में तेज बहाव के चलते परिजन मुक्तिधाम तक नहीं पहुंच सके। मजबूरन शव को करीब 6 घंटे तक घर में रखना पड़ा। जब पानी का स्तर थोड़ा कम हुआ, तब ग्रामीणों ने कमर तक पानी में नदी पार कर शव को मुक्तिधाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार किया।
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तीन साल से धूल फांक रही 40 लाख की फाइल
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है। पिछले कई वर्षों से पुल की मांग की जा रही है। करीब 3 साल पहले आरईएस विभाग ने मौके का निरीक्षण कर लगभग 40 लाख रुपये की लागत से पुल बनाने की फाइल तैयार की थी। लेकिन फाइल बनने के बाद से अब तक एक ईंट भी नहीं लगी।
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बारिश में बन जाती है मौत की नदी
स्थानीय जन कल्याण चौधरी, बबलू चौधरी, राजकुमार बंसल, छोटू बंसल, आशा, महेश, संजय समेत सभी ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी नदी पार करना मुश्किल है। बारिश में स्थिति और विकट हो जाती है। ऐसे में किसी की मौत हो जाए तो परिजनों को दोहरी पीड़ा झेलनी पड़ती है- एक अपनों को खोने का गम और दूसरा शव को ले जाने की जंग।
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आक्रोश में ग्रामीण, प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और आरईएस विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने पुराने आवेदन और जांच रिपोर्ट के आधार पर टगरा मोहल्ला स्थित मुक्तिधाम तक तुरंत पुल निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो अगली बार शव सड़क पर रखना पड़ेगा।
