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Indore News: 45 डिग्री के एंगल पर बैलेंस है भगवान गणेश की प्रतिमा, बनाने में लग गए ढाई महीने
Sun, 23 Aug 2026 06:36 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 23 Aug 2026 06:36 PM IST
Indore News: इंदौर में मूर्तिकार अतुल पाल और उनकी टीम ने अनूठी मिट्टी की बैलेंसिंग गणेश प्रतिमा तैयार की है, जो केवल 1 पैर पर और 45 डिग्री के कोण पर लोहे के गर्डर के सहारे टिकी है। मुंबई के मॉडल से प्रेरित यह प्रतिमा अब राजगढ़ भेजी जा रही है।
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बैलेंसिंग गणेश प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर शहर में इस वर्ष मिट्टी की एक अनोखी गणेश प्रतिमा निर्मित की गई है। यह एक विशेष बैलेंसिंग प्रतिमा है जो केवल एक ही पैर पर पूरी तरह टिकी हुई है। इस अद्भुत प्रतिमा का निर्माण इंदौर के मूर्तिकार अतुल पाल और उनकी टीम ने मिलकर लगभग 2.5 महीने की कठिन मेहनत के बाद पूरा किया है। निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद अब इस प्रतिमा को बेहद सावधानीपूर्वक राजगढ़ भेजने की तैयारी कर ली गई है।
मुंबई के मॉडल से मिली प्रेरणा
पिछले वर्ष मुंबई में बनाई गई इस प्रकार की 45 डिग्री के कोण पर संतुलित प्रतिमा इंटरनेट पर काफी चर्चित हुई थी। उसी तर्ज पर इस बार राजगढ़ के आयोजकों ने इंदौर के मूर्तिकारों से ऐसी ही प्रतिमा बनाने का अनुरोध किया था। कार्य की जटिलता और जोखिम को देखते हुए शुरुआती दौर में कोई भी मूर्तिकार इसे बनाने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। इसके बाद पाल मूर्तिकार आर्ट्स के अतुल पाल ने इस कार्य को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अतुल पाल और उनकी टीम ने 2.5 महीने का समय देकर इसे सफलतापूर्वक आकार दे दिया। सोमवार के दिन यह प्रतिमा राजगढ़ के लिए रवाना की जा रही है। इस संरचना को संतुलित करने के लिए लोहे की गर्डर का आधार के रूप में उपयोग किया गया है और तत्पश्चात उस पर मिट्टी से नक्काशी की गई है। यह प्रतिमा कुल 16 फीट ऊंची है और इसका वजन लगभग 2.5 क्विंटल दर्ज किया गया है।
महीनों पहले आरंभ होता है निर्माण कार्य
शहर के बंगाली चौराहा स्थित विभिन्न कारखानों में गणेश चतुर्थी से कई महीनों पूर्व ही प्रतिमाओं के निर्माण का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। यहां पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार हजारों की संख्या में मूर्तियों का निर्माण करते हैं। इन प्रतिमाओं के लिए विशेष रूप से गंगा नदी की मिट्टी मंगवाई जाती है। इसके अतिरिक्त बांस, घास, सुतली तथा श्रृंगार की सामग्री भी बाहरी क्षेत्रों से लाई जाती है। प्रतिमाओं के चेहरे एवं हाथों की उंगलियों को सुडौल और बारीक आकार देने के लिए शिप्रा नदी की पीली मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। इस वर्ष बढ़ती महंगाई के कारण प्रतिमाओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, परंतु इसके बाद भी बाजार में इनकी मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है।
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विभिन्न स्वरूपों की मांग में वृद्धि
मुख्य बड़ी प्रतिमा के अलावा इसी बैलेंसिंग तकनीक पर आधारित 3 अन्य छोटी प्रतिमाएं भी निर्मित की गई हैं। इस साल इंदौर के गणेश उत्सव में भैरव बाबा स्वरूप वाली प्रतिमाओं की विशेष मांग बनी हुई है। इसके साथ ही बाल स्वरूप, जगन्नाथ स्वरूप तथा श्रीराम स्वरूप में ढली गणेश प्रतिमाओं को भी श्रद्धालु अत्यधिक पसंद कर रहे हैं।
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मुंबई के मॉडल से मिली प्रेरणा
पिछले वर्ष मुंबई में बनाई गई इस प्रकार की 45 डिग्री के कोण पर संतुलित प्रतिमा इंटरनेट पर काफी चर्चित हुई थी। उसी तर्ज पर इस बार राजगढ़ के आयोजकों ने इंदौर के मूर्तिकारों से ऐसी ही प्रतिमा बनाने का अनुरोध किया था। कार्य की जटिलता और जोखिम को देखते हुए शुरुआती दौर में कोई भी मूर्तिकार इसे बनाने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। इसके बाद पाल मूर्तिकार आर्ट्स के अतुल पाल ने इस कार्य को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अतुल पाल और उनकी टीम ने 2.5 महीने का समय देकर इसे सफलतापूर्वक आकार दे दिया। सोमवार के दिन यह प्रतिमा राजगढ़ के लिए रवाना की जा रही है। इस संरचना को संतुलित करने के लिए लोहे की गर्डर का आधार के रूप में उपयोग किया गया है और तत्पश्चात उस पर मिट्टी से नक्काशी की गई है। यह प्रतिमा कुल 16 फीट ऊंची है और इसका वजन लगभग 2.5 क्विंटल दर्ज किया गया है।
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महीनों पहले आरंभ होता है निर्माण कार्य
शहर के बंगाली चौराहा स्थित विभिन्न कारखानों में गणेश चतुर्थी से कई महीनों पूर्व ही प्रतिमाओं के निर्माण का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। यहां पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार हजारों की संख्या में मूर्तियों का निर्माण करते हैं। इन प्रतिमाओं के लिए विशेष रूप से गंगा नदी की मिट्टी मंगवाई जाती है। इसके अतिरिक्त बांस, घास, सुतली तथा श्रृंगार की सामग्री भी बाहरी क्षेत्रों से लाई जाती है। प्रतिमाओं के चेहरे एवं हाथों की उंगलियों को सुडौल और बारीक आकार देने के लिए शिप्रा नदी की पीली मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। इस वर्ष बढ़ती महंगाई के कारण प्रतिमाओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, परंतु इसके बाद भी बाजार में इनकी मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है।
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विभिन्न स्वरूपों की मांग में वृद्धि
मुख्य बड़ी प्रतिमा के अलावा इसी बैलेंसिंग तकनीक पर आधारित 3 अन्य छोटी प्रतिमाएं भी निर्मित की गई हैं। इस साल इंदौर के गणेश उत्सव में भैरव बाबा स्वरूप वाली प्रतिमाओं की विशेष मांग बनी हुई है। इसके साथ ही बाल स्वरूप, जगन्नाथ स्वरूप तथा श्रीराम स्वरूप में ढली गणेश प्रतिमाओं को भी श्रद्धालु अत्यधिक पसंद कर रहे हैं।
