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सख्ती: ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने की लापरवाह ठेकेदार पर कार्रवाई, जूना महल तोड़कर मलबा हटाने का ठेका टर्मिनेट
Wed, 16 Sep 2026 05:43 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 16 Sep 2026 05:43 PM IST
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने जूना महल और ऑफिस बिल्डिंग को तोड़कर मलबा हटाने में कथित लापरवाही पर बद्रीकेदार इंफ्रा का ठेका टर्मिनेट कर दिया। निविदा राशि राजसात कर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। बारिश का पानी गर्भगृह और इलेक्ट्रिक कंट्रोल रूम तक पहुंचने तथा कार्य में देरी को कार्रवाई का आधार बनाया गया।
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ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने ठेकेदार पर कार्रवाई की है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्री ओंकारेश्वर मंदिर परिसर स्थित जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को डिस्मेंटल कर मलबा हटाने के कार्य में कथित गंभीर लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार के विरुद्ध मंदिर ट्रस्ट ने कड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्ता संबंधी निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करने, अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करने और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं करने के मामले में बद्रीकेदार इंफ्रा, सनावद की निविदा राशि राजसात कर उसका नाम एवं पंजीयन ब्लैक लिस्ट में दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही वर्तमान चालू ठेका भी टर्मिनेट कर दिया गया है।
श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा द्वारा 15 सितंबर 2026 को जारी आदेश में यह कार्रवाई की गई है। ट्रस्ट के अनुसार निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण बारिश का पानी मंदिर के इलेक्ट्रिक कंट्रोल रूम तक पहुंच गया था। इससे मंदिर परिसर की रेलिंग एवं रैंप में श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सुरक्षा के मद्देनजर कई घंटे तक विद्युत व्यवस्था भी बंद करनी पड़ी।
पानी निकासी के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
ट्रस्ट के अनुसार जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को डिस्मेंटल करने से पहले ठेकेदार को मंदिर की धार्मिकता, श्रद्धालुओं एवं आसपास के रहवासियों की सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा तथा बारिश के पानी की निकासी को ध्यान में रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान भी पानी निकासी को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए, लेकिन इनका अपेक्षित पालन नहीं किया गया। बारिश के दौरान पानी इलेक्ट्रिक कंट्रोल रूम में पहुंचने के बाद मंदिर कर्मचारियों ने तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था कर विद्युत लाइन को दुरुस्त कराया। ट्रस्ट का कहना है कि इसके बाद भी पानी निकासी की व्यवस्था दोबारा बाधित कर दी गई।
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ये भी पढ़ें- भस्म आरती में त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, राजसी शृंगार कर दिया ॐ नमः शिवाय का संदेश
गर्भगृह में पहुंचा पानी और कीचड़
इसके बाद जुलाई में हुई बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो गई। बारिश का पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी के साथ मिट्टी और कीचड़ आने से गर्भगृह में दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई। ट्रस्ट ने इस घटना को मंदिर की धार्मिक आस्था एवं गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला माना। जिस मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां गर्भगृह तक बारिश का पानी और कीचड़ पहुंचना निर्माण कार्य की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा द्वारा 15 सितंबर 2026 को जारी आदेश में यह कार्रवाई की गई है। ट्रस्ट के अनुसार निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण बारिश का पानी मंदिर के इलेक्ट्रिक कंट्रोल रूम तक पहुंच गया था। इससे मंदिर परिसर की रेलिंग एवं रैंप में श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सुरक्षा के मद्देनजर कई घंटे तक विद्युत व्यवस्था भी बंद करनी पड़ी।
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पानी निकासी के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
ट्रस्ट के अनुसार जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को डिस्मेंटल करने से पहले ठेकेदार को मंदिर की धार्मिकता, श्रद्धालुओं एवं आसपास के रहवासियों की सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा तथा बारिश के पानी की निकासी को ध्यान में रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान भी पानी निकासी को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए, लेकिन इनका अपेक्षित पालन नहीं किया गया। बारिश के दौरान पानी इलेक्ट्रिक कंट्रोल रूम में पहुंचने के बाद मंदिर कर्मचारियों ने तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था कर विद्युत लाइन को दुरुस्त कराया। ट्रस्ट का कहना है कि इसके बाद भी पानी निकासी की व्यवस्था दोबारा बाधित कर दी गई।
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गर्भगृह में पहुंचा पानी और कीचड़
इसके बाद जुलाई में हुई बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो गई। बारिश का पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी के साथ मिट्टी और कीचड़ आने से गर्भगृह में दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई। ट्रस्ट ने इस घटना को मंदिर की धार्मिक आस्था एवं गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला माना। जिस मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां गर्भगृह तक बारिश का पानी और कीचड़ पहुंचना निर्माण कार्य की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ओंकारेश्वर मे वर्तमान चालू ठेका भी टर्मिनेट कर दिया गया है।
- फोटो : अमर उजाला
12 निविदाकारों में सबसे कम दर पर मिला था काम
मंदिर ट्रस्ट की बैठक दिनांक 27 अगस्त 2024 के प्रस्ताव क्रमांक 08 के अनुसार जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को डिस्मेंटल कर मलबा हटाने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। 28 जून 2025 को निविदाएं खोली गईं, जिसमें कुल 12 निविदाकारों ने भाग लिया। इनमें बद्रीकेदार इंफ्रा, सनावद की न्यूनतम दर 6200 रुपये प्रति घन मीटर प्राप्त हुई। इसके बाद 2 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक ओम/2025/39 के माध्यम से कार्यादेश जारी किया गया।
सिंहस्थ की तैयारियों पर भी पड़ा असर
जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को हटाकर मलबा साफ करने का कार्य समय पर पूरा होने के बाद यहां श्रद्धालुओं के लिए वेटिंग रूम, दर्शन व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं से संबंधित निर्माण किया जाना था। इसके लिए मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल द्वारा आगे का कार्य किया जाना प्रस्तावित था। ट्रस्ट के अनुसार ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं किए जाने से आगामी निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ। जुलाई 2026 से ठेकेदार को मौके पर उपस्थित होकर लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद कार्य शुरू नहीं हुआ और करीब चार माह से काम बंद पड़ा रहा। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विभिन्न निर्माण कार्यों को समय पर पूरा किया जाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में जूना महल डिस्मेंटलिंग कार्य में हुई देरी का असर आगे की व्यवस्थाओं पर पड़ने की बात सामने आई है।
ट्रस्ट ने लिया कड़ा प्रशासनिक निर्णय
ट्रस्ट ने गुणवत्ता संबंधी शर्तों का पालन नहीं करने, निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों की अनदेखी, कार्य में लापरवाही और निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं करने को आधार बनाते हुए ठेकेदार की निविदा राशि राजसात करने, पंजीयन ब्लैक लिस्ट में दर्ज करने तथा वर्तमान चालू ठेका समाप्त करने की कार्रवाई की है। अब इस कार्रवाई के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जूना महल परिसर का लंबित कार्य किस एजेंसी के माध्यम से और कितनी समय सीमा में पूरा कराया जाता है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले श्रद्धालुओं की प्रस्तावित सुविधाओं का निर्माण समय पर पूरा हो सके।
मंदिर ट्रस्ट की बैठक दिनांक 27 अगस्त 2024 के प्रस्ताव क्रमांक 08 के अनुसार जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को डिस्मेंटल कर मलबा हटाने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। 28 जून 2025 को निविदाएं खोली गईं, जिसमें कुल 12 निविदाकारों ने भाग लिया। इनमें बद्रीकेदार इंफ्रा, सनावद की न्यूनतम दर 6200 रुपये प्रति घन मीटर प्राप्त हुई। इसके बाद 2 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक ओम/2025/39 के माध्यम से कार्यादेश जारी किया गया।
सिंहस्थ की तैयारियों पर भी पड़ा असर
जूना महल एवं ऑफिस बिल्डिंग को हटाकर मलबा साफ करने का कार्य समय पर पूरा होने के बाद यहां श्रद्धालुओं के लिए वेटिंग रूम, दर्शन व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं से संबंधित निर्माण किया जाना था। इसके लिए मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल द्वारा आगे का कार्य किया जाना प्रस्तावित था। ट्रस्ट के अनुसार ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं किए जाने से आगामी निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ। जुलाई 2026 से ठेकेदार को मौके पर उपस्थित होकर लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद कार्य शुरू नहीं हुआ और करीब चार माह से काम बंद पड़ा रहा। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विभिन्न निर्माण कार्यों को समय पर पूरा किया जाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में जूना महल डिस्मेंटलिंग कार्य में हुई देरी का असर आगे की व्यवस्थाओं पर पड़ने की बात सामने आई है।
ट्रस्ट ने लिया कड़ा प्रशासनिक निर्णय
ट्रस्ट ने गुणवत्ता संबंधी शर्तों का पालन नहीं करने, निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों की अनदेखी, कार्य में लापरवाही और निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं करने को आधार बनाते हुए ठेकेदार की निविदा राशि राजसात करने, पंजीयन ब्लैक लिस्ट में दर्ज करने तथा वर्तमान चालू ठेका समाप्त करने की कार्रवाई की है। अब इस कार्रवाई के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जूना महल परिसर का लंबित कार्य किस एजेंसी के माध्यम से और कितनी समय सीमा में पूरा कराया जाता है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले श्रद्धालुओं की प्रस्तावित सुविधाओं का निर्माण समय पर पूरा हो सके।
