फैटी लिवर कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ती बीमारी है। लिवर में फैट बढ़ने की समस्या शरीर पर कई तरह से असर डालने वाली हो सकती है। लाइफस्टाइल-खानपान की गड़बड़ी ने इस बीमारी के जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है।
Liver Disease: फैटी लिवर कब बन जाती है गंभीर बीमारी? थोड़ी सी लापरवाही सिरोसिस तक का बढ़ा सकती है खतरा
फैटी लिवर अक्सर शुरुआती दौर में बिना लक्षण के रहता है। कुछ लोगों में ये लिवर में सूजन और नुकसान बढ़कर फाइब्रोसिस व सिरोसिस तक पहुंच सकता है। अगर आप मोटापा का शिकार हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस या डायबिटीज की दिक्कत है तो अलर्ट हो जाइए।
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फैटी लिवर का बढ़ता खतरा
लिवर में फैट जमा होना काफी आम है। कई लोगों में फैटी लिवर लंबे समय तक स्थिर रह सकता है। हालांकि कुछ लोगों में फैट के साथ लिवर में सूजन और कोशिकाओं को नुकसान शुरू हो सकता है। यह स्थिति समय के साथ स्कारिंग यानी फाइब्रोसिस की ओर बढ़ सकती है।
- अगर स्कारिंग बहुत बढ़ जाए तो सिरोसिस हो सकता है।
- सिरोसिस में स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू बढ़ने लग जाते हैं और लिवर के लिए सामान्य तरीके से काम करना मुश्किल हो जाता है।
- हालांकि हर किसी में फैटी लिवर के कारण ये दिक्कतें हों, ये जरूरी नहीं है।
मोटापा और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी फैटी लिवर का प्रमुख कारण है। इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज वालों में भी ये बीमारी ज्यादा देखी जाती रही है।
- अगर फैटी लिवर के साथ डायबिटीज या मोटापा की समस्या है तो आपको ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
- इसके अलावा शराब का सेवन भी लिवर की बीमारी के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
फैटी लिवर की गंभीरता के संकेत क्या हैं?
फैटी लिवर में शुरुआती दौर में अक्सर कोई लक्षण नहीं होता। कुछ लोगों को थकान या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता हो सकती है। यही वजह है कि केवल लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर की गंभीरता का अनुमान लगाना मुश्किल है।
अगर लिवर की बीमारी आगे बढ़कर सिरोसिस का जोखिम बढ़ाने लगे तो इसके कारण अक्सर थकान और कमजोरी, भूख कम लगने, बिना कोशिश के वजन घटने,और पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द बना रह सकता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
डॉक्टर कहते हैं, लिवर की समस्याओं को बिल्कुल अनदेखा नहीं करना चाहिए।
- पेट में दर्द के साथ अगर आंखों में पीलापन रहता है या फिर पेट में पानी जमा होने से सूजन रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
- याददाश्त, व्यवहार या नींद के पैटर्न में बदलाव भी लिवर की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
- खून की उल्टी या मल में कालापन जैसी स्थिति आंतरिक रक्तस्राव का संकेत हो सकती है जिसे आपात समस्या माना जाता है।
अगर रिपोर्ट में फैटी लिवर आया है तो डॉक्टर तुरंत सलाह लेकर इसका इलाज शुरू कराएं। समय रहते ध्यान देने से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।