Solah Somvar Vrat Udyapan: सावन की शुरुआत होते ही कई लोग सोलह सोमवार का व्रत रखना शुरू करते हैं। यह व्रत सावन के पहले सोमवार से शुरू कर लगातार 16 सोमवार तक रखा जाता है। इस दौरान व्रती पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं और व्रत से जुड़े सभी नियमों का पालन करते हैं। हिंदू धर्म में सोलह सोमवार के व्रत को सुख-समृद्धि, मनोकामना पूर्ति और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए विशेष माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप और व्रत किया था। इसी कारण सोलह सोमवार के व्रत को मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की कामना से भी रखा जाता है। हालांकि, 16 सोमवार का व्रत पूरा होने के बाद इसका उद्यापन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि, पूरे विधि-विधान से उद्यापन करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे किया जाता है।
Solah Somvar Vrat Udyapan: कैसे करें सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन ? जानें 5 बड़ी बातें
Solah Somvar Vrat Udyapan: 16 सोमवार का व्रत पूरा होने के बाद इसका उद्यापन करना महत्वपूर्ण होता है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है। ऐसे में आइए उद्यापन की विधि को जानते हैं।
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सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन
17वें सोमवार को करें उद्यापन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोलह सोमवार का व्रत पूरा होने के बाद 17वें सोमवार को इसका उद्यापन किया जाता है।
शिव परिवार की करें पूजा
मान्यता है कि, इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय सहित शिव परिवार की पूजा करें। साथ ही शिवलिंग का जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें। साथ ही व्रत में हुई भूल की क्षमा मांगे।
रुद्राभिषेक और हवन करें
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सोलह सोमवार के उद्यापन के शुभ मौके पर रुद्राभिषेक और हवन करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
चूरमा का लगाएं भोग
सोलह सोमवार के उद्यापन वाले दिन आप आटे का चूरमा बनाकर भगवान शिव को भोग लगाएं। इसके बाद इस भोग को आप सभी में प्रसाद के रूप में बांट सकते हैं। इसके अलावा घर पर कन्याओं को बुलाकर खीर का भोज करा सकते हैं।
भोजन और दान का रखें ध्यान
ज्योतिषियों की मानें, तो सोलह सोमवार के उद्यापन के दिन आप ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। इसके अलावा अपनी क्षमता के अनुसार दान-दक्षिणा दें। इस दौरान सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।