Ujjain Mahadev Temples: शिव के नेत्रों की ज्योति से ही ग्रहों का संचालन माना जाता है। इसलिए ग्रह पीड़ा निवारण के लिए शिव पूजा और अभिषेक सर्वोत्तम उपाय है। पृथ्वी का नाभि केंद्र होने के कारण उज्जैन एक चैतन्य तीर्थ है। यहाँ स्वयंभू प्रकट हुए 84 महादेवों में से प्रमुख शिवलिंगों पर नवग्रहों का अधिपत्य है। स्कंद पुराण (अवंतिखण्ड): इस ग्रंथ में उज्जैन स्थित 84 महादेवों की कथाएं वर्णित हैं, जहाँ पूजन से नवग्रह जनित दोषों और कष्टों की शांति होती है। भारतीय ज्योतिष और पुराणों के अनुसार नवग्रहों का नियंत्रण भगवान शिव के अधीन है। जानिए उज्जैन जाकर किस तरह कर सकते हैं नवग्रहों की शांति
Shiva Puja: उज्जैन के 84 महादेव और 9 ग्रहों का रहस्य, जानिए ग्रह दोष और जीवन की बाधाओं से शांति पाने के उपाय
Shiva Puja for Planetary Doshas: भारतीय ज्योतिष और पुराणों के अनुसार नवग्रहों का नियंत्रण भगवान शिव के अधीन है। ऐसे में आइए जानते हैं कि नवग्रह दोषों के निवारण के लिए उज्जैन के किन शिव मंदिरों में पूजा करनी चाहिए।
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1. अरुणेश्वर महादेव (सूर्य ग्रह)
कथा: माता विनिता को श्राप देने के पश्चात् प्रायश्चित हेतु अरुण ने यहाँ तपस्या की और शिवजी से सूर्य के सारथी बनने का वरदान पाया।
पूजन एवं दान: श्रावण मास व शुक्ल पक्ष की सप्तमी को पूजन एवं रुद्राभिषेक से सूर्य ग्रह जनित दोष नष्ट होते हैं। गेहूं, गुड़, लाल फूल और रक्त चंदन दान करें।
2. सोमेश्वर महादेव (चंद्र ग्रह)
कथा: दक्ष के श्राप से मुक्त होने और पुनः देह रूप पाने के लिए चंद्रमा (सोम) ने यहाँ शिवजी की उपासना की थी।
पूजन एवं दान: चंद्र दोष निवारण के लिए कच्चे दूध से अभिषेक करें। चांदी, मोती, चावल, मिश्री और कपूर दान करें।
3. अंगारेश्वर महादेव (मंगल ग्रह)
कथा: शिव के तेज से जन्मे भूमिपुत्र (अंगारक) ने अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण पाने के लिए यहाँ तपस्या की थी।
पूजन एवं दान: श्रावण मास व अंगारक चतुर्थी को अनार के रस से अभिषेक करें। तांबा, गुड़, मसूर की दाल और लाल चंदन दान करें।
4. संगमेश्वर महादेव (बुध ग्रह)
कथा: पूर्वजन्म के दोष से पीड़ित राजा सुबाहु को त्रिवेणी संगम पर जल अर्पित करने से सिरदर्द से मुक्ति मिली थी।
पूजन एवं दान: श्रावण मास में गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। मूंग, कांस्य पात्र, घी और मिश्री दान करें।
5. प्रयागेश्वर महादेव (गुरु ग्रह)
कथा: देवी सावित्री और वेदों के दर्शन के बाद मुनि नारद को अपना लुप्त ज्ञान पुनः प्राप्त हुआ था।
पूजन एवं दान: श्रावण मास में संतरे के रस से रुद्राभिषेक करें। चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र और सोना दान करें।
6. अगस्त्येश्वर महादेव (शुक्र ग्रह)
कथा: दानवों को भस्म करने के बाद ब्रह्महत्या के भाव से व्यथित अगस्त्य मुनि ने निर्विघ्न तपस्या के लिए यहाँ वरदान पाया था।
पूजन एवं दान: शुक्र शांति हेतु छाछ या दही से रुद्राभिषेक करें। श्वेत चंदन, घी, दूध, दही और चावल दान करें।
7. स्थावरेश्वर महादेव (शनि ग्रह)
कथा: शिवजी के निर्देश पर शनिदेव ने यहाँ तपस्या कर निवास किया, जिससे उनके प्रकोप का शमन हुआ।
पूजन एवं दान: ढैय्या-साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए काले अंगूर के रस से अभिषेक करें। तिल, तेल, लोहा और काली उड़द दान करें।
8. कर्कोटेश्वर महादेव (राहु ग्रह)
कथा: माता पार्वती के श्राप से मुक्ति के लिए कर्कोटक सर्प ने यहाँ शिव की आराधना की थी।
पूजन एवं दान: श्रावण मास व कृष्ण पक्ष पंचमी/चतुर्दशी को पूजन से सर्पदंश भय दूर होता है। कंबल, तिल और नारियल दान करें।